Monday, 26 May 2014

तेरा वादा ! मेरा दावा !!
कृपया स्मरण करें कि मोदी जी ने वादा किया था कि एक वर्ष में वे सभी चुने हुए सांसदों पर चल रहे न्यायालयीन प्रकरणो का समयबद्ध निपटारा करवायेंगे एवं दोषियों को सजा दिलवा देंगे .... कहा था ना !!!
उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में मैं ब्रह्म प्रकाश दुआ सार्वजनिक रूप से ताल ठोंक के 2 दावे करता हूँ ....
दावा क्र. 1 : -
यदि मोदी के वादे अनुसार सभी चुने सांसदों पर चल रहे न्यायालयीन प्रकरणो का निपटारा 1 वर्ष में हो जाएगा तो मोदी सरकार भी 1 वर्ष के भीतर गिर जायेगी - गडकरी अंदर होंगे - केजरीवाल बाहर ....
दावा क्र. 2 : -
मोदी अपना वादा पूर्ण नहीं करेंगे ....
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नौटंकीबाज़ ????
भाजपाई परेशान हैं केजरीवाल चुपचाप ज़मानत क्यों नहीं लेते ....
मैं परेशान हूँ मोदी चुपचाप शपथ क्यों नहीं लेते ....
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न ये गुनाह है न ये ड्रामा है ....
गुनाह तो हरेक उस ऐबले भारतवासी का है जो अरविंद को गाली देता है और उसे ड्रामेबाज़ कहता है ....

Thursday, 22 May 2014

बिरयानी बोनान्ज़ा !!!!
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ यदि भारत आ रहे हैं .... तो मेरी कूटनीतिक समझ अनुसार समक्ष में अति-अति-महत्त्वपूर्ण प्रश्न हैं कि ....
क्या उन्हें बिरयानी परोसी जानी चाहिए ?
क्या उन्हें बिरयानी परोसी जायेगी ?
क्या उन्हें बिरयानी ही परोसी जायेगी ??
क्या उन्हें बिरयानी भी नहीं परोसी जायेगी ???
क्या उन्हें बिरयानी तो परोसी जाएगी पर .... ????
और क्या उनके पाकिस्तान लौटने के बाद पूर्वानुसार "बिरयानी" संबंधित चर्चा होगी ? और यदि होगी तो अनन्य लोगों के द्वारा पूर्व में लिए गए स्टैंड में कोई परिवर्तन दिखेगा ??
http://daily.bhaskar.com/…/NAT-TOP-narendramodi-lashes-out-…

Sunday, 18 May 2014

AAP FORMING GOVERNMENT IN DELHI ???????????

I have lost my trust over 2 things ….
After fixing exposed and POLITICIANS AND RICH DIRTY MEN taking control of the game; Firstly I cannot trust a single ball bowled and single run scored to be genuine in Cricket ….
After viewing few many interviews and sponsored / paid news and then same POLITICIANS AND RICH DIRTY MEN taking control of media houses; Secondly I cannot believe single news appearing on TV channels to be trustworthy ….
I will request and suggest all intellectuals to better watch WWF and leave viewing IPL like thing, and do not blindly trust what is being shown on TV Channels please; For instance please apply your mind on the news - AAP FORMING GOVERNMENT IN DELHI ???????????
And lastly I would request intellectual to give serious thought as to who were these persons in control of cricket dooming the royal game and who are now the POLITICIANS IN CHARGE; and think should we not doubt the ability and capability and integrity of same POLITICIANS AND RICH DIRTY MEN ??????????

Friday, 16 May 2014

I AM HAPPY WITH DECIMATION AND DEVASTATION OF CONGRESS ….
I AM HAPPY WITH TREMENDOUS VICTORY OF MODI ….
I AM EXTREMELY SAD AND DISAPPOINTED FOR KEJRIWAL ….
I AM HIGHLY WORRIED AND DISGUSTED WITH MEDIA ….
AND I PITY MODI SUPPORTERS WHO RIDICULED AND ABUSED KEJRIWAL ….
OVERALL I AM HAPPY AND HOPEFUL FOR BETTERMENT OF COUNTRY ….
BUT PROUDLY MY SUPPORT FOR KEJRIWAL SHALL CONTINUE ….

Wednesday, 14 May 2014

बहुत से लोगों की उम्मेदवारी निरस्त की जा सकती है - की ही जानी चाहिए और बहुत से उम्मीदवारों और पार्टियों के विरुद्ध भी उनके साक्षात उल्लंघनों के विरुद्ध भी कार्यवाही होनी ही चाहिए .....
पर आज की परिस्थितियों में और हमारे जनतंत्र की अपरिपक्वता के मद्देनज़र ऐसा कुछ भी नहीं होगा .... हमें अभी कुछ वर्ष और इंतज़ार करना होगा ....
http://www.newindianexpress.com/nation/Hiding-Info-can-Disqualify-Candidates/2014/05/14/article2223597.ece
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नमो नमो नमो .... अभी प्रधानमंत्री बने नहीं हैं - और हमें इतनी गन्दी गाली !!! क्यों ???
ऐसे में यदि आप प्रधानमंत्री बन भी गए तो क्या लम्बे समय तक रह भी पाएंगे ???
और यदि रह भी गए तो क्या हमें न्याय दे पाएंगे ???
http://www.abplive.in/india/2014/05/14/article312932.ece/Giriraj-hits-again-says-pro-Pakistan-people-opposing-Modi#.VIbBLtKUeM9
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निष्क्रिय ठूंठ खम्बा क्या बेहतर ना होता ???

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा निम्नस्तर को छूते हुए नकारात्मकता फूहड़ता और घपलेबाजी का जिस नग्नता और ढीढता के साथ प्रदर्शन किया है .... वह मेरे सामने स्पष्ट है ....
मैं एक सिविल इंजीनियर होने के नाते कह सकता हूँ की एक खम्बे का दायित्व बिना झुके बिना हिले डुले अपने ऊपर आये भार का लगातार वहन मात्र करते हुए "निष्क्रिय ठूंठ" बने रहना ही होता है ....
मुझे लगता है यदि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया अपनी सक्रिय भूमिका की अतिरिक्त जवाबदारी ना भी निभाता और मात्र निष्पक्ष तटस्थता भी कायम रख "निष्क्रिय ठूंठ" भी बना रहता तो भी शायद वो अपने को खम्बा कहलाने लायक दंभ भर पाता ....
पर मित्रों अफ़सोस ऐसा नहीं हुआ .... इसलिए अब मीडिया अपने को "ठूंठ" कहलाने लायक भी नहीं बचा ....
इसलिए मैं सोचता हूँ की अब हमें हमारे लोकतंत्र के भवन को टिकाये रखने के लिए सड़ चुके चौथे स्तम्भ को हटा मात्र 3 या 5 खम्बो के हिसाब से नई डिज़ाइन जल्दी ही तैयार कर लेनी चाहिए ....
अन्यथा इन 4 खम्बो पर तो लोकतंत्र की शवयात्रा ही निकल जाएगी ....

Monday, 12 May 2014

अब समझ आया की मोदी जी वाराणसी से नदारद क्यों ?
आपको याद होगा की मोदी जी ने स्वयं कहा था की वो अपनी माँ से साल भर में केवल दो बार ही मिलने जाते हैं ....
और गंगा माँ से इस साल दो बार मिलने का उनका कोटा पूरा हो गया है ....
अब तो गंगा माँ को मोदी जी के दर्शन अगले वर्ष ही हो सकेंगे .... बेचारी गंगा माँ ???
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क्या बात है? वाराणसी में आज वोटिंग हो रही है और मोदी जी गायब ?
क्या आज भी उन्हें गंगा ने नहीं बुलाया ??
बेचारे मोदी जी ???
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क्रांति की शहनाई !!! .... या .... भ्रष्टाचार का भोंपू ? 
बस यही यक्ष प्रश्न है - काशी के गंगा घाटों से कौनसी आवाज़ गूंजेगी ???

Saturday, 10 May 2014

क्योंकि वड़ोदरा में वोटिंग हो गयी है और वाराणसी में १२ को होनी है - इसलिए उल्लू बनाइँग ???
क्यों भाई मोदी गूंगे हैं जो यह बात पहले खुद खुल कर नहीं बोल सकते थे ??? और अब राजनाथ बोल रहे हैं !!! हार का खतरा के खातिर ना बबुआ !!!
और भाई मेरे वैसे भी वाराणसी सीट तो तब रिटेन करोगे ना जब जीतोगे ? कि यूँही खाली पीली बोम !!!
http://www.abplive.in/video/2014/05/10/article310465.ece/Modi-to-retain-Varanasi-seat-hints-BJP-chief-Rajnath-Singh#.VIbCedKUeM9
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मोदी कहिन ----- "माँ बेटे की सरकार तो गयी" !!!!
ज़रा गौर फरमाइयेगा ....
यदि चल रहे प्रचार प्रसार को सही मान लें और ज़रा तर्क लगाएं तो ....
>> यदि UPA की सरकार जायेगी - तो NDA की सरकार आएगी ....
>> यदि कांग्रेस की सरकार जायेगी - तो भाजपा की सरकार आएगी ....
>> यदि मनमोहन सरकार जायेगी - तो मोदी सरकार आएगी ....
पर ज़रा विसंगति देखिये कि कोई भी ये तो बोल नहीं रहा है कि - "मनमोहन सरकार" जायेगी - तो फिर प्रश्न उठता है - "मोदी सरकार" कैसे आएगी ????
और इसके विपरीत मोदी तो बहुत ही फूहड़ और नीच अंदाज़ में अनावश्यक उपहास करके बार-बार यही कह रहें है कि - "माँ बेटे की सरकार तो गयी !"
और तर्क यह कहता है कि ....
>> यदि माँ बेटे की सरकार जायेगी - तो परित्यक्त की सरकार आएगी ....
तो क्या मोदी सरकार "परित्यक्त सरकार" ही कहलाएगी न ????
क्या अब भी मोदी अपनी ५६" ज़ुबान को लगाम देंगे ?? या ....
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वाराणसी के DM ने जब राहुल को अनुमति दी तो मोदी को क्यों नहीं ??? - जेटली !
बात में दम हैं - जब राहुल और मोदी में कोई अंतर ही नहीं है तो ये तो खुल्लमखुल्ला पक्षपात हो गया जिसकी वजह से मोदी जी को भारी कीमत चुकानी पड़ती दिख रही है !
पर एक प्रश्न उठ रहा है कि जब केजरीवाल को गुजरात में रोका गया था तब जेटली जी ने तो कोई बयान जारी नहीं किया था - गलती हो गयी हो तो अब बता दें कि - जब मोदी का वाराणसी में स्वछन्द विचरण को रोकना गलत है तो गुजरात में केजरीवाल को रोकना गलत क्योँ नहीं था ?
चलो अब जो हुआ सो हुआ गंगा किनारे इतना मातम क्यूँ ??
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मुझे लगता है कि अब दुष्ट बेशर्मों से प्रश्न पूछने की परिपाटी एवं व्यवस्था में व्यवहार कुशल चालाकी भरा परिवर्तन लाना होगा !
मैं अनुभव कर रहा हूँ कि बहुत काबिल पत्रकारों एवं आम जनता में से अनेक बुद्धिजीवियों और आम जनता में से ईमानदार तैश खाने वाले कुछ उत्साही लोगों द्वारा बहुत से तर्कसंगत एवं महत्वपूर्ण प्रश्न समक्ष में रखे जाते हैं - और ऐसा होने पर वे प्रश्न सार्वजनिक पटल पर काफी धूम भी मचाते हैं - हो सकता है कि कुछ असर भी छोड़ते हों - और हो सकता है कि उनका कुछ परिणाम भी निकलता हो - पर सामान्यतः ज्यादातर प्रश्न प्रश्न ही रह जाते हैं - और या तो उनको दफ़न कर दिया जाता है या उनका तात्कालिक, सामयिक, या दीर्घकालिक देहावसान हो जाता है !
और जिनसे या जिनके बारे में प्रश्न पूछे जाते हैं वो 8 -10 घिसे पिटे पर आज़माये असरकारक फॉर्मूले - जुमलों का उपयोग कर चालाकी से निजात पा लेते हैं - जैसे कि .... "प्रश्न ये नहीं है.." ; "पहले मेरे प्रश्न का उत्तर दें.." ; "प्रश्न गलत नियत से पूछा जा रहा है" ; "इस प्रश्न के पीछेे गंदी राजनीति है" ; "इस प्रश्न का जवाब मैं दे चुका हूँ" ; "इस प्रश्न का जवाब मैं जनता को दूंगा" ; "जरूरी नहीं मैं हर प्रश्न का जवाब दूँ" ; "मैं ऐसे घटिया प्रश्न का जवाब नहीं दूंगा" .... आदि आदि !
अतः मेरा मानना है की हम भी अपनी शैली को बदलें और बजाय ऐसे सही सही प्रश्न पूछने के कि - "कहाँ से आया इतना पैसा?" हम कुछ गलत मनगढंत प्रश्न कुछ अलग अंदाज़ में पूछें जैसे कि: -
अडानी ने 500 अम्बानी ने 490 करोड़ दिए - भाजपा में मोदी समर्थक नेताओं / कार्यकर्ताओं के द्वारा चंदे के रूप में 1000 करोड़ जबरन वसूली में से 200 करोड़ पार्टी फण्ड के माद्यम से आये - खुद मोदी ने अपने अज्ञात स्त्रोत से लगभग 40 करोड़ लगाये - एवं बाकी के 3200 करोड़ सोनिया गांधी के जरिये इटली से आये - अतः प्रश्न उठता है कि - अम्बानी ने अडानी से कम क्यों दिए? 1000 करोड़ की वसूली में से 800 करोड़ कहाँ गए ? सोनिया गांधी ने मोदी जी को 3200 करोड़ क्यूँ दिए ???
(कृपया स्मरण करिए कि इसी स्तर के प्रश्न विपक्ष ने पूछे जैसे कि - केजरीवाल ने फोर्ड फाउंडेशन से पैसे क्यों लिए? अन्ना के 2 करोड़ रुपये क्यों हड़प कर लिए ? आदि )
आशा है आप मेरा आशय समझ गए होंगे !!!!!! यदि कुत्ते को गधा सूअर बोला जाए तो हो सकता है उसे बुरा लगे और वो भौंके और हम आशा करें की भौंकने में कुछ उगल भी दे .... और यदि कुछ भी न करे तो कम से कम गाली तो खाये ....
तुम डाल - डाल हम पात - पात .... तुम पात - पात हम जड़ में घुस पत्ता ही साफ़ करें ....
शायद इसीलिए संपूर्ण परिवर्तन और केजरीवाल जरूरी हैं .... क्योंकि जब उन्हें उनके प्रश्नों का जवाब नहीं मिला तो वो चुपचाप नहीं बैठ गए - उन्होंने सड़ी गली व्यवस्था की जड़ पर वार किया है ....
(टीप : मैं अपने आप को केवल "आम जनता में से ईमानदार तैश खाने वाले कुछ उत्साही लोगों" में से एक मानता हूँ - कृपया मुझे बुद्धिजीवी या काबिल पत्रकार न समझ बैठें - धन्यवाद ! )