Saturday, 2 August 2014

"2-इन-1 रेडियो-टेप रिकॉर्डर" - राष्ट्रीय उपकरण घोषित हो !!!!
जब से नंगे बेशर्म आमिर खान का बेहूदा पोस्टर आया है .... बाज़ार में यक़ीनन आमिर खान की कीमत तो गिर गयी है पर 2-इन-1 रेडियो-टेप रिकॉर्डर की कीमत रुपये और रुतबे दोनों में बढ़ गयी है .... कारण इस 2-इन-1 रेडियो-टेप रिकॉर्डर ने ही खुद आगे आकर नंगे आमिर खान को नंगा दिखने से बचा देशवासियों को शर्मसार होने से बचा लिया !!!!
आप स्वयं सोचें कि एक अदद "बजाने" का उपकरण स्वमेव इज़्ज़त "बचाने" के काम आया !!!!
इसलिए मैं सरकार से पुरज़ोर माँग करता हूँ कि ....
// ऐसे महान उपकरण 2-इन-1 रेडियो-टेप रिकॉर्डर को राष्ट्रीय उपकरण घोषित किया जाय //
// और साथ ही देश के हर नंगे को बिना 2-इन-1 रेडियो-टेप रिकॉर्डर साथ लिए सड़क पर नहीं निकलने हेतु निषेधाज्ञा जारी की जाय //
मोदी सरकार ने अभी तक जन कल्याण का एक भी काम नहीं किया है आशा है शुरुआत तो करेंगे ....
सावधान !!!! - फेंकने का काम हो चुका है - अब फाँकने का काम चालू !!

सूत्रों द्वारा मुझे अभी अभी सुखद जानकारी दी गई है कि .....
मोदी सरकार ने मानवरहित रेलवे क्रासिंग पर हुई स्कूल बस दुर्घटना से सीख लेते हुए निर्णय किया है कि अहमदाबाद मुंबई के बीच अतिशीघ्र चलने वाली बुलेट ट्रेन के संपूर्ण पथ पर कहीं भी मानवरहित क्रासिंग नहीं रखा जायेगा !!!!
इसे कहते हैं शानदार सोच, दुर्घटनाओं से सीख लेने और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता ?@#$%!?

Friday, 1 August 2014

मोदी जी - आपकी पार्टी के दिल्ली वाले विजय गोयल आपकी घोषित नीति से हटकर खुल्लेआम क्षेत्रीयता की बात कर आपकी छवि की वाट लगा रहे हैं !!!! और आप मनमोहनसिंघ जैसे ही चुप निष्क्रिय निर्विकार !!!!
क्या कुछ करेंगे ? .... या सब कुछ 5 साल बाद जनता की अदालत में ????

FENKU (फेंकू) .... V/S .... FANKU (फाँकू) !!!!

फेंकू प्रायः फाँकू भी होता ही है - और फाँकू प्रायः फेंकू होता ही है .... पर दोनों शब्दों के अर्थ में झीना सा अंतर है ....
15 अगस्त आने वाला है - मुझे लगता है की फेंकू अब फाँकने वाला है !!!!
इसलिए फेंकू और फाँकू का अंतर आप को समझाना अपना फ़र्ज़ समझता हूँ ....
>> फेंकू का मतलब होता है भविष्य में होने वाले क्रियाकलापों के बारे में लम्बी लम्बी छोड़ना - जैसे बुलेट ट्रेन चलाएंगे - 100 स्मार्ट सिटी बनाएंगे - लाखों झाड़ लगाएंगे - पाक चीन को मजे चखा देंगे - महंगाई कम कर देंगे - भ्रष्टाचार कम कर देंगे - भ्रष्टाचारियों को अंदर कर देंगे - काला धन वापस ला सब देश वासियों को मालामाल कर देंगे .... आदि !!!!
>> फाँकू का मतलब होता है कि भूतकाल में कुछ भी उपलब्धि न होने के बावजूद लम्बी लम्बी छोड़ना - जैसे हम दिन रात ईमानदारी से मेहनत कर रहे हैं - अर्थव्यवस्था पटरी पर ले आएं हैं - पाक चीन स्तब्ध हो चुके हैं - विदेश यात्राओं से झंडे गाड़ दिए गए हैं - अच्छे दिन आ गए हैं .... आदि (और ज्यादा विस्तृत उदाहरणों हेतु कृपया 15 अगस्त का इंतज़ार करें) !!!!
आशा है मैं आपको सही सही समझा पाया हूँ .... यदि हाँ तो कृपया बताएं कि आगे से अब आप क्या कहना पसंद करेंगे .... फेंकू या फाँकू ???????????
पुनश्चः - सारांश ....
फेंकू फेंकता है - फाँकू फाँकता है !
फेंकने का काम हो चूका है - फाँकने का काम अपेक्षित है !!
आमिर खान - वही सत्यमेव जयते वाला - आज कोई 'PK' फिल्म के पोस्टर में नंगा दिखा - बिलकुल बेशर्म नंगा !!
सरकार में तो ऐसी संस्कारी की अपेक्षा रखना बेमानी है जो इस घिनौने प्रकरण में कुछ त्वरित कार्यवाही कर सके ....
इसलिए सबसे पहले तो उम्मीद है कि कोई न्यायालय जाय और वहां से इस नग्न प्रदर्शन और नंगे पर प्रतिबन्ध लगवाये ....
नहीं तो फिर तो इस सभ्य समाज के लोगों को ही आगे आ ये संकल्प लेना पड़ेगा कि कोई भी इस नंगे की ये या फिर कोई और फिल्म नहीं देखेगा ....
पर यदि कुछ अलग प्रकार की सोच और संस्कार वाले छिछोरे नंगों को इसमें कुछ भी गलत नहीं लगता और वे आमिर के साथ खड़े होते हैं तो मेरा उनसे केवल एक निवेदन है कि .... आमिर खान जहाँ भी दिखे उसके पीछे पड़ जाना और उसके कपडे उतार उससे 'PK' फिल्म की एक्टिंग करने को कहना और खूब एन्जॉय करना .... OK Dude - I mean Nude ......

आज के "'गोपीचंद जासूस' !!!!

ये गडकरी जी भी न खुद किसी जासूस से कम नहीं दिखते - आज यदि राज कपूर होते और उन्हें वही 'गोपीचंद जासूस' फिल्म बनानी होती तो मैं दावे से कहता हूँ कि वो खुद के बजाय गडकरी को ही ये रोल देते !!!!
अरे नहीं तो आप स्वयं विचार करें कि सवा करोड़ हिन्दुस्तानियों में अमेरिका ने केवल गडकरी को ही क्यूँ चुना जासूसी के लिए ?
पर अब पेंच उलझ गया है ....
पहले सूत्र बता रहे थे कि गडकरी की जासूसी हुई - पर फिर गडकरी ने स्वयं कह दिया कि मेरी जासूसी नहीं हुई .... और यदि नेता स्वयं के बारे में कुछ कहता है तो इस देश की महान परिपाटी अनुसार वो तो सत्य माना ही जाता है ... और इसलिए मामला ठन्डे बस्ते जाता दिखा !!!!
लेकिन तुरंत बाद सूत्र एवं कयासबाज़ ताल ठोंक के कह रहे थे कि गडकरी की जासूसी हुई - पर एक बार फिर गडकरी ने कह दिया मेरी जासूसी नहीं हुई .... और सरकार ने भी फुल्टू टेका दे दिया कि जब स्वयं गडकरी ने कह दिया कि मेरी जासूसी नहीं हुई तो इसके मायने हैं कि गडकरी की जासूसी नहीं हुई ... बस ! और इसलिए मामला फिर ठन्डे बस्ते !!!!
पर साहब गजब हो गया इस सरकार के पागलपन की तो हद्द ही हो गयी .... बड़ी मशक्कत के बाद
सरकार ने मामले को येन केन प्रकारेण ठंडा किया ही था कि सरकार ने अमेरिका को चेतावनी जारी कर दी कि - भारत को जासूसी बर्दाश्त नहीं है !!!!
लो कर लो बात - किये कराये पर पानी फेर दिया - क्यूंकि अब लोग पूछेंगे ही भाई कि जब जासूसी हुई ही नहीं तो बेचारे निरीह अमेरिका को बिलावजह क्यूँ डपट रहे हो ????
खैर अब तो ये मामला उलझ ही गया है ... और इतना उलझ गया है कि सीबीआई अब कुछ नहीं कर सकेगी ... अब तो सत्य पता लगाने के लिए जासूस ही लगेंगे ...
तो मेरा सुझाव है कि दिल्ली में दो और नेता जो बिलकुल जासूस टाइप दिखते हैं और वैसा व्यवहार भी करते हैं क्यों न उनको ये जासूसी का काम सौंपा जाय ?? जी हाँ ये नेता हैं विजय जॉली और नलिन कोहली ..... हो जाय दूध का पानी और पानी का दूध .... है ना ?@#$%?