Friday, 9 January 2015

//// अब करीना कपूर ? अरे शर्म करो बस करो - अपनी बताओ "विकास" पुत्तर कब ? ////

मुझे लगता है 'मौनदी जी' ने अब सब सुनते हुए भी मौन रहते कुछ ना सुनने की बाजीगरी का परिचय देना शुरू कर दिया है ....
'मौनदी जी' के पगले संगी साथी लगातार कैसी कैसी बेवकूफी पटक रहे हैं - जैसे लेटेस्ट में "करीना कपूर का लव जेहाद" ....और मैं ऐसा मानता हूँ कि 'मौनदी जी' को साफ़ हो ही गया होगा कि जिन लोगों का वे नेतृत्व करते हैं उन्होंने शर्म बेच खाई है - वे नंगाइयत पर उत्तर आये हैं - और उनके क्रियाकलाप आपत्तिजनक और शर्मनाक हैं ....
और चूँकि निकट पूर्व में पूरे विपक्ष ने 'मौनदी जी' को संसद में आकर अपनी बात करने हेतु निवेदन या अपेक्षा या मांग की थी और 'मौनदी जी' एक शब्द बोलने के लिए भी तैयार नहीं हुए और यहां तक कि आज भी 'मौनदी जी' इस पूरे मामले में घुन्नी चुप्पी साधे हैं - इसलिए अब तो मेरी निजी राय में मुझे 'मौनदी जी' ही असली मुजरिम लगते हैं !!!!
इसलिए आज मैं 'मौनदी जी' को चुनौती देना चाहता हूँ कि बार-बार पूछे गए सैंकड़ों सवालों में से अब कम से कम सैंपल के आधार पर अपने छर्रों से एक सवाल का जवाब लिखित में दिलवा दें कि -
// करीना कपूर और शाहनवाज़ हुसैन के दोनों मामले 'लव-जेहाद' के परिप्रेक्ष्य में एक समान हैं या नहीं - जबकि दोनों मामलों में एक मुस्लिम पुरुष की शादी हिन्दू महिला के साथ राजी ख़ुशी से हुई ? //
मुझे मालूम है कि सत्य को पीठ दिखाते ये भगोड़े इन सवालों का जवाब नहीं देंगे क्योंकि इन मक्कारों के पास ऐसे सैकड़ों प्रश्नों के जवाब हैं ही नहीं ....
इसलिए इनके लिए तो मैं इनकी ही भाषा में एक सुझाव देता चलूँ तो ही बेहतर होगा ....
'मौनदी जी' का हनीमून पीरियड खत्म हो चुका है - साक्षी महाराज ने ४ बच्चे करने की बात कही है - तो अब 'मौनदी जी' को इधर उधर शानपत पटकने के बजाय अपने काम पर ध्यान देना चाहिए और "विकास" पुत्तर के पैदा होने की सूचना देनी चाहिए - यदि दम खम है तो .... !!!!

\\\\ साम्प्रदायिकता कट्टरता आतंकवाद कायरता से उद्वेलित .... \\\\

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 बड़े नादान हो पर मासूम से लग रहे हो !
 ये आग बुझती क्यों नहीं ये पूछ रहे हो ?
 ज़रा गौर से देखो ये लट्ठों का पीठा है  !!
 क्यों उसे जानते नहीं जो हवा दे रहा है ??
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"ब्रह्म प्रकाश दुआ" ०९-०१-१५

Thursday, 8 January 2015

//// मेरा भी "निजी बयान" - भाजपा दोगली .... ////

भाजपा की दोगलाई फिर मेरे सामने है .... जिस विषयक मेरा १००% टंच "निजी बयान" आप सबकी सेवा में प्रस्तुत है .....
असादुद्दीन ओवैसी का "सभी मुसलमान पैदा होते हैं" वाला बयान और साक्षी महाराज का "हिन्दू महिलाओं को चार बच्चे पैदा करने चाहिए" वाला बयान दोनों लगभग साथ साथ ही आए ....
दोनों महानुभाव सांसद हैं - और दोनों ही सांसदों द्वारा ये बयान जनसभा के दौरान दिए गए .....
और दोनों ही बयानों के मद्देनज़र "विकास" को भुला और सभी काम की बातों को दरकिनार कर १-२ रोज़ से गरमा-गरम बहस जारी है ....
पर बहस में साक्षी महाराज स्वयं कहीं नज़र नहीं आये - बल्कि भाजपा के प्रवक्ता आए और आज सुबह के अखबारों के अनुसार भाजपा ने साक्षी महाराज के बयान को उनका "निजी बयान" घोषित कर किनारा कर लिया .... यानि साक्षी महाराज के बयान का भाजपा ने अपनी सुविधानुसार परंपरागत तरीके से एवं आधिकारिक एवं औपचारिक रूप से पटाक्षेप कर दिया .... और भाजपा भी चुप साक्षी महाराज भी चुप मोदी भी चुप शाह भी चुप संघ भी चुप साधु भी चुप साध्वी भी चुप भक्त भी चुप - यानी अधिकाँश लोग चुप !!!!
पर इसके उलट ओवैसी स्वयं लगभग सभी बहस में स्वयं उपस्थित हो अपनीं बात को रखते समझाते उससे बचते बचाते अपने तर्क कुतर्क देते और सबसे लोहा लेते दिखे .... और बहस के दौरान लगभग दसियों बार उन्होंने ये कहा कि उन्होंने जो भी कहा वह उनका निजी बयान था व्यकिगत विश्वास था और है और वे कदापि इसे किसी पर थोपना नहीं चाहते और यहाँ तक कहा कि आप चाहें तो मेरी बात से असहमत हो सकते हैं .... पर जनाब सभी एंकर और बहस में भाग ले रहे अन्य लोग ओवैसी पर पिले पड़े रहे - यहाँ तक कि कुछ चीखने चिल्लाने वाले अंग्रेज़दाँ एंकर तो यहाँ तक कह दिए कि ओवैसी का बयान उनके सभी समर्थकों और उनकी पूरी जमात का अपमान है - पर ओवैसी कभी मुस्कुराते कभी ललकारते कभी गुस्सा करते सभी को बखूबी पुरज़ोर जवाब देते नज़र आए ....
उपरोक्त के परिप्रेक्ष्य में अब मेरा "निजी बयान" >>>>
जब साक्षी जी और ओवैसी जी को निजी बयान देने की छूट है तो मुझे भी है - और मेरा निजी बयान ये है कि - या तो दोनों के बयानों को निजी मान आगे बढ़ा जाए या दोनों के बयानों को निजी ना मानते हुए दोनों को ख़ारिज किया जाए .... पर भाजपा की दोगलाई को अस्वीकार किया जाए !!!!
किसी को मेरे बयान से आपत्ति हो तो "टिल्लेलिल्ले" !! कुढ़ते सड़ते रहो क्योंकि मेरा बयान तो "निजी बयान" ही है और रहेगा .... है ना !!!!

Wednesday, 7 January 2015

//// सोचना ही होगा कि इस डरावनी अंतहीन कहानी का अंत कैसे हो .... ////

पेरिस में फिर एक आतंकवादी हमला ....
कुछ दिन पहले ही पेशावर में आतंकवादी हमला ....
निश्चित ही ये इस्लामिक कट्टरता का प्रतीक प्रतीत होते हैं और इसे इस्लामिक आतंकवाद की ही संज्ञा दी जा सकती है ....
पर बहुत सोच विचार के लिखना चाहता हूँ की क्या ज्यादा उचित नहीं होगा कि हम इसे धार्मिक कट्टरता मानते हुए इसे धार्मिक आतंकवाद की संज्ञा देवें .... क्योंकि जैसा कि सभी सभ्य सहिष्णु और समझदार यही तो बोलते हैं कि कट्टरवाद किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं हो सकता और ना ही आतंकवाद का कोई धर्म होता है ....
लेकिन इसके साथ ही बहुत सोच विचार के मैं ये भी लिखना चाहूंगा की आज हिन्दुओं या अन्य धर्मों के अनुयायियों से कहीं ज्यादा जवाबदारी सभी मुसलमान भाइयों और बहनों की बनती है कि वो सभी इस घटना की पुरज़ोर भर्त्सना और विरोध करें ....
और हम सभी ये सोचें कि इस डरावनी अंतहीन कहानी का अंत कैसे हो ??
क्या हमें ये नहीं सोचना चाहिए कि धर्म जिसकी स्थापना अच्छे उद्देश्यों के लिए ही की गयी होगी और जिसके कल तक अच्छे परिणाम मिलते भी रहे होंगे शायद अब उसी धर्म का दुरपयोग हो रहा है और वही धर्म अपनी प्रासंगिकता खोता जा रहा है और इसके दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं ????
इसलिए मेरा मानना है कि सभी बातों पर समग्र समाज को पुनरावलोकन करना ही होगा - और शायद हर प्रकार की कट्टरता का विरोध भी !!!!

//// तेल देखा तेल की धार देख ली - मनमोहन अच्छे - मोदी फ़ड़तूस ////

मित्रों आज मैं मोदी जी की ही बात को मानते हुए लोकतंत्र के हित में मोदी जी की स्वच्छ तीखी 'आलोचना' करना चाहता हूँ - कृपया इसे 'आरोप' ना समझें ....
विषय है तेल की कीमतें >>>>
> कल अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम साढ़े पांच साल के निचले स्तर पर आ गए - यानि रूपए ५३.५० प्रति बैरल जो मई २००९ के समतुल्य हो गए !!!!
> पर जनाब मई २००९ में पेट्रोल की कीमत थी रुपये ४०.६२ प्रति लीटर - लेकिन आज ये कीमत है ६५.२३ प्रति लीटर .... यानि रुपये २४.६१ प्रति लीटर अधिक ....
> इसी तरह मई २००९ में डीज़ल की कीमत थी रुपये ३०.८६ प्रति लीटर - लेकिन आज ये कीमत है ५५.७७ प्रति लीटर .... यानि रुपये २४.९१ प्रति लीटर अधिक !!!!
क्या ये मेरे साथ लूट नहीं है ???? पूरे २४-२५ रुपये प्रति लीटर कि खुल्लम खुल्ला लूट ????
क्या ये आपके साथ भी लूट नहीं है ?? क्या ये हिन्दुओं भक्तों भाजपा कार्यकर्ताओं आदि सभी के साथ भी लूट नहीं है ????
और जनाब आलम देखें कि मोदी जी "अच्छे दिन - अच्छे दिन" की रट लगाए हुए राजनैतिक आक्रामकता का भोंडा प्रदर्शन करते रहे हैं - जबकि आदरणीय मनमोहन सिंह जी ने कभी भी शालीनता का परित्याग नहीं किया था ....
इसलिए मोदीजी कृपया अपनी आलोचना सुनें - कि आप से तो लाख दर्जे अच्छे थे मनमोहन सिंह जी लेकिन आप तो फ़ड़तूस निकले .... इसलिए अब बेहतर होगा कि मनमोहन सिंह जी के व्यक्तित्व और कार्यप्रणाली की कुछ अच्छाइयों को पहचानें और उनका अनुसरण करें ....
और हाँ राष्ट्रहित में आपकी एक और आलोचना ....
मोदी जी बेहतर होता यदि आप नए 'नीति आयोग' में स्मृति ईरानी या गडकरी की जगह काबिल मनमोहन सिंह जैसे किसी व्यक्ति को स्थान देते .... पर लगता है ना तो आप स्वयं कुछ करने में सक्षम सिद्ध हो रहे हैं ना ही सही व्यक्तियों का चयन करने में .... तो ज़रा ठंडे दिमाग से सोचिये - गिरेबान में झांकिए - केवल रामज़ादों के बारे में सोचना बंद कीजिये और अपने दत्तक पुत्र "विकास" के बारे में कुछ सोचिये और कुछ तो करिये ....
या फिर इस्तीफ़ा दे पहुंचे साबरमती किनारे कुछ साल मंथन करने के लिए - या नर्मदा किनारे पटेल की मूर्ती बनाने के लिए - या गंगा किनारे घाट की सफाई करने के लिए - या कुछ और सार्थक आपकी योग्यता अनुसार !!!! धन्यवाद !!!!

Tuesday, 6 January 2015

//// ये सरकार और तेल .... ////

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिर गिरीं .... गिरते ही जा रही हैं .... कुछ उछाल उतार के बाद अंततः पिछले साढ़े पांच साल के सबसे निचले स्तर पर ....
और इधर राष्ट्रीय स्तर पर केंद्र सरकार की साख भी गिरी .... गिरते ही जा रही है ....कुछ उछाल उतार के बाद अंततः पिछले साढ़े पांच साल के सबसे निचले स्तर पर ....
लगता है केंद्र सरकार और तेल का कुछ तो संबंध है .... ऐसा अर्थशास्त्री भी मानते हैं ....
पर फिर भी लगता है इस बेशर्म सरकार की तो फिर भी चांदी ही है - क्योंकि सरकार के लिए साख गयी है तेल लेने ....
लूट खसोट जारी है - तेल के दाम दुखते मन और कंजूसी से इतने ही घटाते हैं जैसे कोई लाचारी है - और महंगाई कम होना दूर सब्जियों तक के दाम बढ़ना फिर भी जारी है ....
और असल में तेल तो जनता का ही निकल रहा है ....
इसलिए मित्रों मुझे लगता है की हमें इस सरकार को ही भेजना पड़ेगा - तेल लेने !!!!

//// सत्ता का 'नशा' और निर्लज्जता का 'हेलमेट' ////

ये बात तो सब मानते हैं कि नशा बुरी चीज़ है - इसमें कई परिवार उजड़ गए - कई ज़िंदगियाँ ख़त्म हो गईं - और नशा छोड़ देने से कई ज़िंदगियाँ बच सकती हैं ....
और ये बात भी सब मानते हैं कि हेलमेट पहनना बहुत जरूरी है - सड़क दुर्घटना में कई मौतें हो चुकीं हैं - और हेलमेट पहनने से कई ज़िंदगियाँ बच सकती हैं ....
पर जनाब इन दोनों समान सी जनहित की बातों के प्रति सरकार का दृष्टिकोण और रवैय्या कितना भिन्न है और क्यों है - ज़रा गौर फरमाइएगा ....
सरकार द्वारा जनहित का हवाला देते हुए हेलमेट पहनने को नियम में प्रावधान कर अनिवार्य बना दिया गया है .... बावजूद इसके कि अधिकाँश लोगों को इसे पहनना और इसको सम्हालते फिरना असुविधाजनक लगता है - और बावजूद नियम के लोग इसे सहर्ष स्वीकार्य नहीं कर सके हैं - पर सरकार है कि नियम पेले पड़ी है - और यदि हेलमेट नहीं पहना तो चालान और जुर्माना .... यानि सीधे सीधे नंबर १ व २ की सरकारी आय - और हेलमेट बनाने वाली कंपनियों से सांठ-गांठ से फायदे सो अलग !!!!
पर इसी सरकार द्वारा नशा करने को नियम में प्रावधान कर जनहित में वर्जित नहीं किया गया है  .... नशे के लिए तो बस मोदी जी प्रवचन कर चुप हो गए - और भी सब नशे को कोसते रहते हैं - और आजकल तो पंजाब में अकालीदल  और भाजपा के बीच इस नशे पर राजनीती भी गज़ब हो रही है - पर इन्होने करना कुछ नहीं है - कारण सभी सरकारें इससे होने वाली कमाई और अन्य अवैधानिक लाभ का मोह त्याग नहीं पायी हैं .... यानी घड़ियाली आंसू !!!!
तो मित्रों उपरोक्त बात से मैं यह सिद्ध करना चाहता हूँ कि >>>>
जनहित गया भाड़ में - सरकार और सरकार में बैठे सत्ताधीशों की सुविधा और फायदे ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं - सरकार को आपकी भलाई या ज़िन्दगी की कोई परवाह नहीं है - ये सरकार नशे को बंद करने के लिए कत्तई भी संजीदा नहीं है - और मोदी जी केवल बातें करते हैं करते कुछ नहीं हैं - और ना ही कुछ करने वाले हैं  ....
और मुझे लगता है कि सरकार स्वयं 'नशा' कर 'हेलमेट' पहन बैठ गयी है ....
जी हाँ !! सत्ता का 'नशा' और निर्लज्जता का 'हेलमेट' !!!!