Wednesday, 14 January 2015

//// ४ बच्चे - ५ बच्चे - और तो और अग्रिम आवंटन भी .... क्या ये कुत्ताई नहीं ?? ////

कोई कहता है हिन्दू महिलाओं ने ४ बच्चे पैदा करने चाहिए .....
उनसे बड़े वाले कह बैठे हिन्दू महिलाओं ने 5 बच्चे पैदा करने चाहिए .....
और तो और बच्चों का अग्रिम आवंटन भी कर दिया गया .... एक धर्म के नाम एक सीमा पर एक समाज को - और बचा हुआ घर टिकने को तैयार हो तो जाओ ऐश करो क्या याद रखोगे उसे खुद रख लेना .... वाह क्या दूरदर्शिता और उदारता का परिचय देने का भोंडा प्रयास है !!!!
 पर मुझे तो इसमें गंदगी वाहियातपन और कुत्ताई के अलावा कुछ भी नहीं दिखता ....
और वो इसलिए कि अभी मोहल्ले में एक कुतिया ने भी ५ पिल्लों को जनम दिया - तो एक असलम भाई ने बुक करा दिया एक गौरीशंकर जी ने एक मेरे पडोसी गब्बरसिंह ने अपने फार्महाउस के लिए और एक कुतिया के मालिक के दोस्त ने - और सबने कुतिया के मालिक को छूट दे दी है कि एक वो खुद और कुतिया के पास ही रहने दे ....
उपरोक्त संदर्ह में मैं विवेचना निहित कुछ प्रश्न भी समक्ष में रखना चाहूँगा >>>>
> मान लें यदि आजम खान टाइप मुस्लिम महिलाओं को ६-६ बच्चे पैदा करने का फरमान या सुझाव पटक मारे तो क्या ये बेहूदा लोग कॉम्पीटीशन में उत्तर कर हिन्दू महिलाओं को ८-१० बच्चे पैदा करने का फरमान जारी कर देंगे .... वैसा ही कॉम्पीटीशन जैसा कि अभी मोदी जी ने बिजली कंपनियों के बीच दिल्ली बिजली समस्या के निदान हेतु सुझाया है ????
> कुतिया सुअरनी बिना किसी की मांग अनुसार या इज़ाज़त या समझाइश लिए सदियों से जो ५-१० बच्चे जनती रही हैं - वो कहाँ जाते हैं ? अभी तक दुनिया कुत्तों और सूअरों से भर क्यूँ नहीं गयी - अभी भी कुत्ते सूअर लिमिटेड क्वांटिटी में ही क्यूँ नज़र आते हैं ????
> मुर्गी भी क्या रोज़ अंडे देने के पहले साधू संतों मौलवियों और मंदिर मस्जिद की इज़ाज़त लेती है - कि प्लीज ज़रा अनकम्फर्टेबल लग रहा है - एक अंडा देने दो महाराज ??
तो मित्रों मेरे इस कदर बकवास प्रतीत होने वाले रोषपूर्ण लेख का बहुमूल्य सार यही निकलता है कि - जो खुद बच्चा तो छोड़ एक अंडा भी ना पैदा कर सके उनके द्वारा ऐसी बकवास बातों का जम कर विरोध करें - गुस्सा करें रोष ज़ाहिर करें - और सभ्य समाज में सब को यथायोग्य इज़्ज़त देते हुए इज़्ज़त के साथ रहने का प्रमाण देवें !!!! धन्यवाद !!!!

Tuesday, 13 January 2015

//// इतिहास गवाह है ?? ....तो ठीक है आज तुलसीदास जी हाजिर हों .... ////

"इतिहास गवाह है - इतिहास गवाह है" .... सुन सुन कर मेरे तो कान पक गए - जिसको देखो अपना केस खुद लड़ रहा है - खुद मुजरिम होते हुए खुद जज बना बैठा है - और खुद पैरवी भी कर लेता है - और जब देखो गवाही बंधक बनाये इतिहास की देने को तैयार ....
तो आज मैंने भी सोचा कि मैं मेरे मन की बात को स्थापित करने हेतु इतिहास की गवाही का सहारा लूँ >>>>
इतिहास गवाह है कि तुलसीदास जी ने कहा था कि ....
// शूद्र गंवार ढोल पशु नारी - सकल ताड़ना के अधिकारी //
जिसका १/५ आंशिक पुख्ता मतलब ये है कि - "नारी ताडन की अधिकारी होती है" - यानी वो मारा-कूटी डाँट-डपट और प्रतारणा के ही लायक होती है ....
यानी ये तो मामला राष्ट्रीय महिला आयोग से संबंधित हो गया भाई .... !!!!
और मैं दावे से कहता हूँ कि यदि आज कोई भी खाप छाप नेता यदि ये सार्वजनिक रूप से कह दे कि - नारी का क्या - नारी तो होती ही ऐसी वैसी है - करो इसे प्रताड़ित .... तो जनाब मान लीजिये कि "ताड़न" "वाडन" तो छोड़ वो मिनटों में  'तड़क-तड़ाक-तड़ित' हुआ समझो - बिलकुल 'एंटीफटाक' हो विलुप्त हुआ ही समझो - जैसे ईश निंदा के इलज़ाम में हज्जारों हिमाकती होते आये हैं - बस उसका अस्तित्व बचेगा तो केवल इतिहास के पन्नों में - जहाँ लिखा जाएगा कि फलां नेता ने नारी के लिए ये ये कहा था और उसे नेस्तनाबूद कर दिया गया था - और वो आज फिर हाज़िर है गवाही के लिए - यानी ससुरी एक गवाही और तैयार ....!!!!
मित्रों मेरा आशय न तो तुलसीदास जी का उपहास करने का है और ना ही इतिहास को झुठलाने का - बस मेरा मकसद तो इतना भर है कि जो इतिहास हुआ उसे इतिहास के रूप में ही लिया जाय - उसे वर्तमान में बदनियती और कम ओछी अकल के तड़के के साथ पेश ना किया जाय .... पैगम्बर क्या कह गए बुद्ध क्या सुन गए महावीर क्या समझ गए - किसके पिछवाड़े किसने आग लगाई किसके किसने कहाँ कीलें ठोंकी किस पर किसने कितनी बार कचरा फेंका - किसके कितनी बीवियां थीं किसके कितने पति थे किसके कितने बच्चे थे - किसने किसपे आक्रमण किया था क्यूँ किया थे क्या हुआ था - गांधी स्टालिन नेहरू हेडगेवार हिटलर वाजपेयी ने क्या किया क्या नहीं किया क्यों नहीं किया आदि पर हम कब तक कुमंथन कर इतराते लड़ते बघारते रहेंगे - और चार्ली एब्दो पर गोलियां बरसाते रहेंगे ????
मित्रों मेरा निवेदन है कि कुछ समय के लिए उस बदमाश गवाह इतिहास को भूल जाएँ और "विकास" को कोर्ट के कटघरे में खड़ा कर वर्तमान के अपराधियों को पहचानें .... कृपया विचार करें कि ये रामज़ादे हरामज़ादे कौन हैं - ये लव जेहाद के जनक कौन हैं - बिन बच्चे ४-४ बच्चे पैदा करने की बात कौन पटक रहा है - अपने घर में वापसी के नाम पर आपको कौन घुसेड़ रहा है - कौन अपने पद का दुरपयोग कर रहा है और अपना और अपने पद का स्तर गिरा रहा है - कौन आपको बेवकूफ बना रहा है - कौन अपने वादों को भुला रहा है - कौन नए नए वादे फेंक रहा है ????
और यदि आपने ऐसा नहीं किया तो याद रखें - एक और जुमला इतिहास के नाम - जी हाँ इतिहास गवाही दे न दे पर - "ये निगोड़ा इतिहास आपको माफ़ नहीं करेगा" - आप समझ गए ना !!!! धन्यवाद !!!!

Monday, 12 January 2015

//// अरविन्द केजरीवाल दिल्ली का १ वर्ष बर्बाद कर गए ? और बाकी सब जवाबदार उल्लुओं की तरह बैठे रहे ?? ////

कल की दिल्ली की विशाल खर्चीले संसाधन पोषित रिकॉर्ड नेताओं की संख्या वाली फ्लॉप भाजपा रैली में मोदी जी ने अरविन्द केजरीवाल की ओर इशारा और निशाना साधते हुए कहा था - "दिल्ली का एक साल बर्बाद हो गया, किसने किया? जिन्होंने दिल्ली को अस्थिर किया, उनको सजा दीजिए।"
मेरी विवेचना ....
मैं दिल्ली की बात पर बाद में आऊंगा पर पहले ज़रा नज़र डालते हैं जम्मू-कश्मीर पर ....
२३ दिसंबर को चुनाव नतीजे आ गए थे - पर कई दिनों की मशक्कत के बाद भी वहां भाजपा सरकार नहीं बना पायी - यहाँ तक की NC ने भी समर्थन की पेशकश की थी पर तब भी बीजेपी ने सरकार नहीं बनायी - पर पीडीपी से बात जारी .... तो अब क्या होगा ? अब तो जम्मू-कश्मीर का समय बर्बाद होगा कि नहीं ? जम्मू-कश्मीर अस्थिर हो गया कि नहीं ?? तो क्या अब उसके लिए भी अरविन्द केजरीवाल ही जिम्मेदार ????
जी हाँ चौंकिए मत - जम्मू-कश्मीर का जो भी समय बर्बाद हो रहा है उसके लिए अरविन्द केजरीवाल ही जिम्मेदार हैं - क्योंकि अभी दिल्ली के चुनाव जो होने वाले हैं और सत्ता की लोलुप सिद्दांतहीन बीजेपी यदि पीडीपी यानि बाप बेटी वाली मुस्लिम बहुल पार्टी से हाथ मिला लेती है तो उसे कई तीखे प्रश्नों का सामना करने में असहज होना पड़ता .... और क्योंकि दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल मोदी की छाती पर दाल दल रहे हैं इसलिए बीजेपी किसी भी प्रकार का चुनावी नुकसान का जोखिम नहीं ले सकती - पर मेरा दावा है कि दिल्ली चुनाव के तुरंत बाद बीजेपी और पीडीपी जम्मू-कश्मीर में सरकार बना लेंगे !!!!
और अब मैं आता हूँ दिल्ली की १ वर्ष की बर्बादी वाली बात पर ....
मित्रों आज एक बात तो तय हो गयी कि दिल्ली का १ साल बर्बाद हुआ - और इसलिए इस बर्बादी के जिम्मेदार को गाली तो पड़नी ही चाहिए ....
पर मेरी निजी राय में १ और बात तय हो गयी कि मोदी जी निहायत बकवास पटकने वाले इंसान हैं क्योंकि वो इसके लिए भी अरविन्द केजरीवाल को ही जिम्मेदार ठहराने की अनैतिक कोशिश और हिमाकत करते दिख रहे हैं - केवल इस अतिविश्वास आधार और सत्य पर कि उनके बेअकल भक्त इस बात पर विश्वास कर ही लेंगे और यही मान भी लेंगे कि दिल्ली के १ साल की बर्बादी के लिए अरविन्द केजरीवाल ही तो जिम्मेदार हैं - क्योंकि उन्होंने फरवरी २०१४ में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा जो दे दिया था .... है ना !!!!
पर आज मैं उन बेअकल भक्तों को जो मोदी जी की बात का समर्थन करते हों पूछना चाहता हूँ कि क्या इस्तीफ़ा देने के बाद केजरीवाल किसी भी संवैधानिक हैसियत में थे कि वो दिल्ली के संबंध में कोई भी हस्तक्षेप कर सकते थे ? क्या LG और केंद्र सरकार और अन्य संवैधानिक संस्थाएं और व्यवस्थाएं इतनी पंगु हो गयी थीं कि एक अदना सा पद विहीन आम आदमी अरविन्द केजरीवाल दिल्ली का १ वर्ष बर्बाद कर गया और वे सब उल्लुओं की तरह बैठे बैठे जनता के पैसे से ऐशो आराम फरमाते रहे और बड़े बड़े सरकारी भवनों में बैठे खाते हगते रहे ????
क्या ये आज़ाद हिन्दुस्तान में पहला इस्तीफ़ा था ? और क्या पूर्व के इस्तीफ़ा प्रकरणों में संवैधानिक व्यवस्थाएं ऐसे ही चरमरा गयी थीं जैसे दिल्ली में ????
धिक्कार है धिक्कार - ऐसे आरोपों और बयानों पर और ऐसी अकल पर और ऐसे समर्थन पर !!!!
मेरी निजी राय में तो दिल्ली का १ वर्ष बर्बाद करने के मुजरिम केंद्र सरकार में सत्तासीन कांग्रेस और भाजपा ही हैं और जनता ने इन्हे ही सबक सिखाना होगा - अन्यथा .... अन्यथा जो होगा सो होगा .... वैसे भी इस देश की राजनीति में अब तक सब कहाँ अच्छा ही होता आया है .... कुछ बर्बादी और सही !!!!

Sunday, 11 January 2015

//// मोदी जी ने स्वीकारा कि वो HYPE करते हैं - यानी फांकते हैं .... ////

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कल मोदी जी ने कहा था कि - क्या आपने ऐसा कोई नेता देखा है जो अपने आपको "एनार्किस्ट" कहता हो ? उनका इशारा और निशाना अरविन्द केजरीवाल की तरफ था .... और आगे हलकट पटकी थी कि ऐसे व्यक्ति को नक्सलियों के पास जाना चाहिए ..... दिल्ली में उनका कोई स्थान नहीं - दिल्ली में सभ्य समाज रहता है ....
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केवल २४ घंटे बाद आज मुझे भी सटीक प्रतिक्रिया देने का मौका मिला है - मुलाहिज़ा फरमाएं >>>>
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क्या आपने ऐसा कोई नेता देखा है जो स्वयं कहे कि वो हर बात HYPE करता है ? मेरा इशारा और निशाना मोदी जी की तरफ है जिन्होंने अभी अभी अहमदाबाद की वाइब्रैंट गुजरात के शुभारंभ के उपलक्ष्य में अपने संबोधन में कही है ....
यानी आज मोदी जी ने स्वयं स्वीकार कर लिया है कि वो HYPE करते हैं - यानी फांकते हैं - यानी हर चीज़ को बढ़ा चढ़ा कर पेश करते हैं .... और इसलिए मेरा भी सुझाव है कि मोदी जी को किसी ऐड एजेंसी में नौकरी करनी चाहिए - सरकार में उनका कोई स्थान नहीं - सरकार में काम करने वालों की ज़रुरत है - फांकने वालों की नहीं ....
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//// भगवान द्वारा "सीमा-उल्लंघन" को चुनौती कौन देगा ? ////

आजकल कई जगह से ये आवाज़ उठ रही है और मेरे कुछ काबिल दोस्त भी बहुत शालीनता से और अपनी सीमा में रहते इस आशय की बात कह रहे हैं कि - फ्रांस में जो कुछ हुआ वह दुखद तो था ही पर ..... चार्ली एब्दो मैगज़ीन के कार्टूनिस्ट या संपादक "सीमा" पार कर गए थे .... उन्होंने शायद उसका मज़ाक उड़ाया था जो हमारे मत में सबसे ऊपर है - आदि !!!!
मेरी विवेचना ....
जो उपरोक्त "सीमा उल्लंघन" की बात कर रहे हैं - शायद वो हमेशा से कहा और माना जाता रहा यह जुमला भी मानेंगे कि - "आखिर हर चीज़ की एक सीमा होती है" ....
और यदि मैं भी ये मान लूँ कि उपरोक्त बात सत्य है तो फिर तो यह भी प्रतिपादित हो जाता है कि - इस दुनिया की भी सीमा है - इस ब्रह्माण्ड की भी सीमा है - इस सृष्टि कि भी सीमा है - और इसलिए इस सृष्टि बनाने वाले की भी तो सीमा होगी ही .... और यदि सीमा है तो सीमा उल्लंघन भी संभव हुआ ....
और मेरे हिसाब से तो वो ऊपरवाला भी अपनी सीमा का उल्लंघन करता ही है - जैसे बाढ़ भूकम्प में तबाही आप के और मेरे बस में कहाँ ? और विनाश में उसे अच्छे बुरे का ज्ञान संज्ञान भी कहाँ ??
तो मान लीजिये कि एक अदना सा कार्टूनिस्ट उस ऊपरवाले को धिक्कारता है या उससे प्रश्न पूछता है कि तूने अपनी सीमा का उल्लंघन क्यूँ किया ? तो इसे सीमा उल्लंघन कैसे माना जा सकता है ??
क्या शैलेन्द्र के बोल - "दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समायी - काहे को दुनिया बनायी" भी सीमा उल्लंघन माना जाएगा ???? क्या धार्मिक रूढ़ियों को आइना बताना भी सीमा उल्लंघन माना जाएगा ?? क्या राम मोहन राय या मदन मोहन मालवीय या महत्मा फुले या दाभोलकर जैसे लोगों को भी गलत ठहराया जाएगा ????
नहीं कदापि नहीं - बल्कि अब तो मैं ये विश्वास से कह सकता हूँ कि जिस व्यक्ति ने अपनी अभिव्यक्ति को किसी भी सीमा में संकुचित किये बिना निःस्वार्थ एक सर्वमान्य मर्यादित व्यस्वस्था या प्रथा अनुसार प्रदर्शित कर दिया वो ही धन्य और सच्चा - बाकी हम जैसे डरते डराते सकुचाते और ओढ़ी हुई या थोपी गयी मर्यादाओं का ध्यान रखते रखाते क्या खाक़ अभिव्यक्त करेंगे ????
अतः अपने स्वार्थ या सनक या स्वाभाविक बुद्धि या तो फिर तार्किक बुद्धि अनुसार ही संकुचित सीमांकन करने वालों से विनम्र विनती - कृपया पुनर्विचार ज़रूर करें !!!!
और तथाकथित उपरोक्त "सीमा" पार करने वाले चार्ली एब्दो मैगज़ीन के निर्भीक दिवंगत कार्टूनिस्ट और संपादकों को मेरी श्रद्धांजलि और सलाम स्वरुप मेरे दिल दिमाग से लिखा ये लेख सादर समर्पित ....

Saturday, 10 January 2015

//// वाह भाजपा की दिल्ली रैली में अरविन्द केजरीवाल तो छा गए .... ////

आज मोदी जी को केजरीवाल का साल भर पहले दिया "एनार्किस्ट" वाला बयान याद आ गया .... जबकि लेटेस्ट में भाजपाइयों के एक से बढ़कर एक बयान याद नहीं आये .... यहां तक कि मोदी मोहन भागवत के महान वचनों तक को भूल गए ....
और तो और आज अमित शाह ने भी दिल्ली रैली में केजरीवाल पर ही तंज़ कसते हुए कहा कि - जो लोग मेट्रो से आने जाने का नाटक करते थे क्या चुनाव बाद वो मेट्रो में कभी दिखे ?
प्रतिक्रिया में नमूने के रूप में कुछ प्रश्न >>>>
जो भाजपाई टीवी पर झाड़ू लगाते दिखे थे क्या वो कभी किसी को कहीं भी पुनः झाड़ू लगाते दिखे ??
क्या दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय खुद का फेंका कचरा बटोरते नज़र आए ??
बिना हेलमेट स्कूटर चलाते संघ कार्यालय में घुसते गडकरी भी क्या तब से स्कूटर का ही कचूमर निकाल रहे हैं ??
और जिन भाजपाइयों की औकात पैदल चलने की भी नहीं क्या वो चुनाव बाद फ्लाइट से नीचे आवागमन करते दिखे ??
जो भाजपाई ४ बच्चे पैदा करने की बात कर रहे हैं क्या उनके रामज़ादे बच्चे भी उनकी तरह हमेशा फ्लाइट से ही आवागमन करेंगे या मौका पड़ने पर मेट्रो का इस्तेमाल भी कर लेंगे ??
और कुछ अंतिम प्रश्न ....
आज दिल्ली रैली में सारे भाजपाई और मोदी जी "मोदी उवाच" के अनुरूप अरविन्द केजरीवाल की आलोचना कर रहे थे या उन पर आरोप लगा रहे थे ????
और ये मोदी जी इतनी लम्बी लम्बी बातें और उससे भी लम्बी लम्बी साँसे क्यूँ छोड़ रहे थे - लगता है केजरीवाल ने ८-१० महीनें से दौड़ा दौड़ा कर ५६ इंची सीने का दम फुला दिया है !!!!
छा गए केजरीवाल छा गए - आज की भाजपा रैली जिसमे प्रधानमंत्री और ३ मुख्यमंत्री और सैंकड़ों सांसद थे - अकेले केजरीवाल के नाम !!!!

//// चाय बनाने वाले को देश चलाने का काम देकर गलती हो गई .... ////

मोदी जी ने अभी-अभी दिल्ली रैली में कहा कि जैसा व्यक्ति हो उसे वैसा ही काम देना चाहिए - मतलब "जाको काम वाही को साजे" वाली बात ....
मेरी त्वरित प्रतिक्रिया ....
सही कहा - चाय बेचने वाले को प्रधानमंत्री का काम देकर शायद देश ने गलती कर दी ....