Monday, 3 August 2015

//// अब देखें मोदी सरकार थोड़ी इज़्ज़त के साथ या बेआबरू होकर जाएगी ??..////


आज मोदी सरकार ने अपने सपनों के बिल 'भूमि अधिग्रहण बिल' को लगभग ९ महीने से अड़े रहने के बाद वापस लेने की घोषणा कर दी है .... अब भाजपा अनुसार इस निर्णय से देश के विकास को बहुत बड़ा धक्का लगना तय है - पर ठीक है - मजबूरी में ऐसा ही सही ....

इसे बोलते हैं समझदारी .... शाब्बाश मोदी जी शाब्बाश !!!! बधाई !!!! देर आयद दुरुस्त आयद !!!!

और मेरा मत है कि भविष्य में भी यदि मोदी सरकार ऐसे ही समझदारी का परिचय देती रहेगी तो मोदी सरकार थोड़ी इज़्ज़त के साथ जाएगी ....
पर यदि भविष्य में मोदी सरकार समझदारी का परिचय ना देते हुए जबरन ही अड़ा-अड़ी करती रही तो मोदी सरकार बहुत बेआबरू होकर जाएगी ....

ईश्वर मोदी सरकार को बहुतायत में आवश्यक सद्बुद्धि की सप्लाई अब आगे से जारी रखे ....ऐसी कामना के साथ सबको बधाई !!!!

//// अब तो वीएचपी ने भी चेता दिया है - "लातों के भूत बातों से नहीं मानते" ..////


वीएचपी संरक्षक अशोक सिंघल ने कहा है कि याकूब मेमन से हमदर्दी जताने वालों को वीएचपी पहले प्यार से समझाएगी - अगर वह समझ जाते हैं तो ठीक - वर्ना उनके साथ ज़बरदस्ती कर देश प्रेम का पाठ पढ़ाया जाएगा - प्यार की भाषा नहीं समझने वाले मार खाने के बाद सही रास्ते पर आ जाएंगे और देशप्रेम सीख जाएंगे....

श्वेत वस्त्रधारी संत स्वरुप वयोवृद्ध माननीय सिंघल जी ने जो फरमाया उसके विषय से पूर्ण सहमत न होते हुए भी उनकी बताई पद्धति से मैं पूर्ण रूप से सहमत हूँ .... और मैं समझता हूँ कि हमारे पूर्वजों के द्वारा जो प्रचलित अकाट्य बातें कहीं जाती रही हैं वही बातों को सिंघल साहब ने अपने शब्दों में रखा है .... और वैसी ही कुछ बातों का तो मैं शुरू से कायल रहा हूँ .... मसलन ....

"लातों के भूत बातों से नहीं मानते" ....

और मैं मानता हूँ कि अब वक्त आ गया है कि भाजपा और मोदी सरकार भी सिंघल जी की बात पर थोड़ा गंभीरता से गौर करे .... और बात केवल बात से बन जाए इसका प्रयास करे .... अन्यथा - सिंघल साहब वाली बात .... समझे !!!!

Sunday, 2 August 2015

//// भाजपा की 'याकूब' विषयक दलीलों पर 'पचेको' ने पलीता चिपका मारा ..////


घटना थी २००६ की - गोवा के पूर्व मंत्री और विधायक फ्रांसिस्को मिकी पचेको ने एक सरकारी अफसर को थप्पड़ जड़ दिया था - पचेको को छह माह कैद की सजा हुई - मामला सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया गया - और सुप्रीम कोर्ट से भी फैसले पर मुहर लग जाने के बाद 1 जून से श्रीमान पचेको जेल की हवा खा रहे हैं ....

सब कुछ न्यायसंगत ठीक चल रहा था पर ना मालूम क्यों गोवा सरकार को पेट में दर्द उठ गया और सरकार ने राज्यपाल को पचेको की सज़ा माफ़ करने का प्रस्ताव प्रेषित कर दिया ....

और पता चला है कि पचेको ने अपनी सजा माफी की अपील में अपनी और बूढ़ी माँ की बीमारी और देखरेख की जरूरत को आधार बनाया है - यानि "मानवीय आधार" .... वही सुषमा जी वाला जैसा ही "मानवीय आधार" ....
और मैं बताता चलूँ कि गोवा सरकार के प्रस्ताव का बचाव करते हुए गोवा के उपमुख्यमंत्री फ्रांसिस डिसूजा ने थप्पड़ मारने को मामूली अपराध करार दिया - और ये भी कह दिया कि ऐसे मामले में सुधार का प्रयास किया जाना चाहिए ना कि सजा का प्रावधान होना चाहिए ....

और ये सबकुछ हुआ ठीक तब - जिस दौरान याकूब कि फांसी पर देश में गर्मागर्म बहस चरम पर थी और जिस बहस में भाजपा के प्रवक्ता टीवी चैनलों पर गर्राते चिल्लाते एक ही बात बार-बार बोल रहे थे कि - बस जब सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आ गया तो कोई अन्य बात करने की गुंजाइश ही नहीं है - इसलिए याकूब की फांसी का कोई विरोध ना करे - उससे कोई हमदर्दी का इज़हार नहीं करे - भाजपा और सरकार से कोई प्रश्न ना करे - और आगे पीछे कि कोई बात ना हो .... क्योंकि याकूब आतंकवादी था - उसने गुनाह किया था - और सुप्रीम कोर्ट ने सजा सुनाई थी - इसलिए अब सब खामोश !!!!

तो मित्रो अब मैं आगे क्या कहूँ - सब कुछ तो कह दिया - बस थोड़ा और जोड़ देता हूँ ....

भाजपा के लिए 'याकूब' और 'पचेको' दो अलग अलग विषय हैं - और वो इसलिए क्योंकि बेशर्मों की कार्यशैली और बात में तर्क हो ऐसा होना कत्तई आवश्यक नहीं हुआ करता .... बेशर्मों की अपनी खुद की सीमित सिकुड़ी संकुचित मर्यादाएं ही होती हैं (यदि होती हों तो) जो जब तब सुविधा और मजबूरी अनुसार लांघी जाती रहती हैं - कभी बड़े आराम से - कभी बड़े यतन से - कभी चुप्पी साध कर - तो कभी चिल्लाते गर्राते हुए - तो कभी कपडे फाड़ते हुए ....

//// धार्मिक उल्लुओं के लिए मेरी समझदारी की सौगात - आज बिलकुल फ्री ..////


आज एक खबर सामने आई है - धर्म और धार्मिक उल्लुओं और धार्मिक ठगों से संबंधित - और ये खबर दिल दहला देने वाली कही जा रही है - मेरे कुछ जानने वाले धर्म-भीरु भी इसे दिल दहला देने वाला वाकया बता रहे हैं ....

पर मेरा दिल इस खबर से तनिक भी दहला नहीं है क्योंकि शायद मेरे पास दिल के अलावा दिमाग भी है और जो वर्चस्व में भी है .... और इसलिए ये खबर हमेशा की तरह मेरे दिमाग को झकझोड़ रही है .... आज फिर धर्म के उल्लुओं का उपहास करने के लिए प्रेरित कर रही है .... और धार्मिक ठगों को धिक्कारने हेतु हिम्मत दे रही है .... और ये बताने की कि ऐसा धर्म क्या बला होता है जो धार्मिक दिखता है और धार्मिक होने की चेष्टा करता है पर काम धोखाधड़ी के करता कराता है ....

अब पहले खबर पर आ जाता हूँ .... ५ महीने का बच्चा - पढ़े लिखे माँ बाप - अपने बच्चे को खंडवा के एक आश्रम में बाबा रामेश्वर दयाल उर्फ़ छोटे सरकार को गोद दे देते हैं - उसको सुपुर्द कर देते हैं .... पर दादा दादी का दिल दहला होगा और निश्चित ही दिमाग भी चला होगा - सो उन्होंने विरोध किया और मामले को कोर्ट तक ले गए - और कोर्ट ने भी अपना दिमाग लगाया - छुट्टी के दिन कोर्ट खुलवा मामले की सुनवाई करी - और निर्णय दे दिया - बच्चे को बाबा को नहीं सौंपा जाए !!!!

और साथ ही जरा बाबा का संक्षिप्त वर्णन भी कर दूँ - बताया जा रहा है बाबा रामेश्वर दयाल उर्फ छोटे सरकार करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं - इनका रहन-सहन शाही है - हमेशा निजी हेलिकॉप्टर से ही सफर करते हैं - नई दिल्ली के आश्रम में रहते हैं - लेकिन साल में दो बार खंडवा के दादाजी धूनीवाले आश्रम में आते हैं .... यकीनन कुछ ऐसे ही दावों के साथ ही पधारते होंगे कि आने का मकसद रहता है - दर्शन देना - सत्संग करना - भजन करना कराना - प्रवचन करना - धर्म और ज्ञान की गंगा बहाना - शिष्यों का दुःख वरण करना - जीवों का दुःख हरण करना - भंडारा कराना - आश्रम की देखरेख करना - आश्रम का विस्तार करना - आश्रम का स्कूल कॉलेज अस्पताल चलाना - संस्था की धार्मिक गतिविधियों का जायजा लेना - आश्रम हित में व्यावसायिक गतिविधियों का जायज़ा लेना - ट्रस्ट बनाना - समितियां बनाना - और नए अनुयायियों को अपने साथ जोड़ना - आदि इत्यादि अनादि ..... अनादि इसलिए कि अंततः अपने अनुयाइयों को मोक्ष दिलवाना .... और मोक्ष डंके की चोट दिलवाना - बशर्ते अनुयायी पूरे विश्वास और आस्था से (बिना दिमाग लगाए) बाबा को समर्पित रहे - और बाबा जी कि जय करता रहे - जयजयकार करता ही रहे !!!!

मैं दावे से कह सकता हूँ कि जिन व्यक्तियों का दिल दहला होगा और शायद जिनका दिमाग भी चला होगा उनमें से अधिकाँश व्यक्तियों का स्वयं कोई धर्म या मत होगा - और वो भी किसी धार्मिक स्थल पर जाते होंगे - उनकी भी किसी ना किसी स्वयंभू या सर्वमान्य 'शक्तिरूप' में कोई आस्था होगी - उनके भी कोई ना कोई बाबा संत साधू मुल्ला मौलवी पादरी होंगे - उनका भी किसी आश्रम मंदिर मस्जिद सत्संग भवन आदि बनाने में योगदान होगा - उनका भी अपनी आस्था अनुसार और औकात से बढ़कर सभी गतिविधियों में आर्थिक योगदान होता होगा - वो भी 'प्रशाद' ग्रहण कर कृतार्थ होते होंगे कराते होंगे बांटते होंगे .... यानि काफी कुछ रामेश्वर दयाल जैसों की ताम-झाम से काफी कुछ मिलता जुलता ....

पर मजाल है कि कोई अपने वाले का दोष देखने का प्रयास करे - और कुछ पूछे कुछ कहे कुछ देखे कुछ सुने कुछ चर्चा करे - कुछ बहस करे - या अपने से ही अपने ही विश्वास पर कुछ प्रश्न खड़े करे और उसे अपने ही बनाये किसी तराजू पर तोलने का प्रयास करे .... कदापि नहीं ....

कदापि इसलिए नहीं कि - शायद जो कम्बल ओढ़ एक बार सोने का नाटक रच चुका है - वो जागते हुए भी सोया ही रहता है - और फिर सोता ही रह जाता है .... और यदि ये कंबल धर्म का हो तो सर्दी गर्मी बरसात में भी उढ़ा ही रहता है - और मृत्यु पर्यन्त उढ़ा ही रह जाता है - और केवल शरीर के साथ ही आपका पिंड छोड़ता है !!!!

इसलिए आज जरूरत है कि आप कुछ ओढ़े हुए कम्बलों को उतार फेंके - और जाग जाएं ....
और अपने वाले बाबा रामेश्वर दयाल को भी जाने पहचाने - और अपनी आने वाली पीढ़ी को नारकीय जीवन व्यतीत करने का शाप देने से बचें .... उल्लू बनने से बचें !!!!

याद रहे न्यायालय का काम किसी प्रकरण में न्याय करना भर है - जो उसने बखूबी कर दिया है .... पर न्यायालय कोई दिमाग में समझदारी भरने का पंप नहीं - समाज में इधर-उधर उड़ रही समझदारी को तो आपको स्वयं अपने दिमाग में भरने का काम करना होगा - नहीं तो खाली रहिएगा !!!! धन्यवाद !!!!

Saturday, 1 August 2015

//// इस्तीफे वाली लिस्ट तो बढ़ती ही जा रही है ...////


कभी भाजपाई रहे - त्रिपुरा के राज्यपाल तथागत जी ने तो संवैधानिक पद पर रहते हुए याकूब के जनाज़े पर ही सड़क छाप बयान दे मारा .... और पूरा देश इसकी एक स्वर में निंदा कर रहा है .... तथा इस्तीफ़ा मांग रहा है ....

पर भाजपा सरकार में ऐसे ही इस्तीफ़ा थोड़े ही दिया जाता है .... 
ना तो भाजपा सरकार में ऐसे ही इस्तीफ़ा लिया जाता है ....
भाजपा तो समाजवादी पार्टी से भी गई बीती हो गई है जिसने अपने सांसद फारूक घोसी को याकूब की बेवा को सांसद बनाने की मांग करने मात्र पर बाहर का रास्ता दिखा दिया ....

और फिर राज्यपाल थोड़े ही इस्तीफ़ा देते हैं ....
और राज्यपाल को ऐसे थोड़े ही हटाया जा सकता है .... संवैधानिक पद है भाई !!!!

इसलिए अभी तो इस्तीफ़ा या निकालना या हटना या हटाने की संभावना दिख नहीं रही है .... इस्तीफे वाली लिस्ट अब काफी लंबी हो चली है - और यदि शुरुआत हो गई तो सरकार का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा .... 

इसलिए साफ़ है ऐसे ही चलाय रखना अब मोदीजी की मजबूरी हो चली है .... पर निश्चित ही ये इस्तीफे वाली लिस्ट लगातार लंबी होती चलेगी - अभी तो मात्र १४ महीने ही निकले हैं .... वो भी शुरूआती .... अंत में क्या होगा कल्पना की जा सकती है .... शायद मोदीजी का ही इस्तीफ़ा ....????

//// मच्छर की मच्छरी > बनाम < मंत्री की मंत्राणी ....////


मित्रो आज 2 समानांतर काल्पनिक वार्तालाप प्रस्तुत कर रहा हूँ ....
काल्पनिक पर शायद वस्तुपरक ....

मच्छरी ........................... 
<> मंत्राणी ........................... 


एक मच्छरी थी ..
<>  एक मंत्राणी थी ..
मच्छरी मतलब ?
<>  मंत्राणी मतलब ?
मच्छर की बीवी - मच्छरी !!
<>  मंत्री की बीवी - मंत्राणी !!
चलो ! फिर क्या हुआ ?
<>  चलो ! फिर क्या हुआ ?
मच्छरी ने गरीब को काटा
<>  मंत्राणी ने रईस को पटाया 
गरीब को मलेरिया दे दिया
<>  रईस से लाखों ले लिया 
गरीब को बुखार आ गया
<>  रईस व्यापम पास हो गया 
गरीब मरणासन्न हो गया
<>  रईस प्रसन्न हो गया
फेल्सीफ़ेरम मलेरिया हो गया
<>  इंसानों का डॉक्टर बन गया
जानलेवा  मलेरिया
<>  जानलेवा डॉक्टर
फिर क्या हुआ ?
<>  फिर क्या हुआ ?
जाँच हुई
<>  जांच बैठ गई
फिर ?
<>  फिर ?
केस रेफर कर दिया
<>  केस रेफर कर दिया 
किसे ?
<>  किसे ?
बड़े डॉक्टर को
<>  सीबीआई को 
कौन सा डॉक्टर ?
<>  कौन सी सीबीआई ?
व्यापम वाला ?
<>  तोते वाली ?
हाँ - वही व्यापम वाला
<>  हाँ - वही तोते वाली
फिर तो गरीब मर जाएगा ..
<>  फिर तो रईस बच जाएगा ..


और मच्छरी का क्या हुआ ?
<> और मंत्राणी का क्या हुआ ?
मच्छर जाने ….
<> मंत्री जाने ….

इस देश में ना मच्छरों की कमी है न मंत्रियों की - और दोनों ही चूसने में माहिर हैं ....
पर इनका इलाज भी है ....

कछुआ छाप अगरबत्ती - और दो चार दुलत्ती !!!! !!!

//// "मानवीय आधार" .... ललित की बीवी - बनाम - याकूब की बेवा ....////


महाराष्ट्र के एसपी नेता फारुख घोसी ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को एक चिट्ठी लिख याकूब की पत्नी राहीन को सांसद बनाने की मांग की है !!!!

ग़दर हो जाएगा !!!! .. जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी झंडे फहराए जाने से भी बड़ा ग़दर ....
अब भक्त चुप नहीं बैठेंगे .... बैठना भी नहीं चाहिए .... आखिर ये तो राष्ट्रविरोधी होगा ....

पर ज़रा एक मिनिट .... चेक कर लें - कहीं इसमें "मानवीय आधार" तो नहीं ????

सुषमा स्वराज ने भगोड़े ललित मोदी की मदद थोड़े ही करी थी .... बल्कि मदद तो एक महिला की करी थी .... "मानवीय आधार" पर .... फिर भले ही वो भगोड़े ललित मोदी की पत्नी हुई तो क्या हुआ ????

तो फिर .... फारुख घोसी ने भी कोई मरहूम आतंकवादी याकूब की मदद की बात नहीं करी है .... बल्कि बात तो एक महिला की मदद करने की कही है .... "मानवीय आधार" पर .... फिर भले ही वो मरहूम याकूब की बेवा हुई तो क्या हुआ ????

और जनाब सुषमा ने तो गुपचुप मदद कर ही दी थी - पर फारूक घोसी ने तो अभी खुल्लमखुल्ला मदद करने की बात भर कही है .... ठीक !!!!  

इसलिए "मानवीय आधार" पर मेरा भक्तों से निवेदन है कि - यार !! अभी ठंडे और ठप्प ही पड़े रहो तो बेहतर - बिल्कुल संसद की ही तरह !!!!
अभी ऐसे अमानवीय हालात में बेवजह उचकोगे तो बावरे से दिखोगे !!!!