Saturday, 12 March 2016

// तो क्या हमारी सेना छुईमुई .. और मोदी का मनोबल सेना से भी ज्यादा ?? ..//


ललित मोदी भाग गया था - वापस  नहीं आया - फिर हुआ क्या ?? .. ज्यादा पता भी नहीं चला - बताया भी नहीं गया - शायद मानवीय आधार पर सब कुछ भुला सा दिया गया था ....

पर नास पिटे माल्या का - वो भी भाग गया - और सब कुछ फिर ताज़ा हो गया .... फिर वैसे ही प्रश्न हवा में और वैसे ही आरोप - और वैसा ही बेशर्म सा बचाव ....

यानि एक बार फिर सभी सरकारी एजेंसियों पर प्रश्न पूछे जा रहे हैं - ईडी - आईटी - सीबीआई - आदि सब से .... और वही मीडिया वही मोडिया और वही पत्रकार और वैसी ही किटर-पिटर जारी है .... और लोग आरोप लगा रहे हैं छोटे मोटे अधिकारीयों और मंत्रियों और कारोबारियों और बैंकरों से लेकर प्रधानमंत्री तक पर ....

यानि आज फिर से लोग उद्वेलित हो प्रश्न पूछ रहे हैं .. जी हाँ हमारे देश की पूरी व्यवस्था पर - पूरे तामझाम पर - पूरी सरकार पर - पूरी संवैधानिक व्यवस्था पर .... यानि लोग देश की पूरी व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं .. धिक्कार भी रहे हैं .... 

लेकिन अफ़सोस कि इतने खुल्लमखुल्ला व्यापक प्रतिरोध और आरोपों को कोई भी "देशद्रोह" की संज्ञा नहीं दे रहा है !!!! आश्चर्य ना ?? 

जबकि एक अदने से कन्हैया ने हमारी सेना को सम्मान देते हुए उस सेना के चंद आरोपित जवानों पर एक प्रतिक्रिया क्या दे दी - सब मिर्ची में लपट तेल के कड़ाहे में कूद उछल कूद करने लगे .... जल भुन तल गए .. पक गए ....

और दलील क्या ?? .. कि ऐसे वक्तव्यों से सेना के मनोबल पर असर पड़ता है .... वाह रे हमारी छुईमुई सेना - कन्हैया ने कुछ आरोप लगा दिया तो मनोबल गिर जाएगा ?? .... और माल्या भाग लिया और पूरा देश आरोप लगा रहा है तो हमारे मोदी जी का मनोबल नहीं गिर रहा क्या ?? .. क्या मोदी जी सेना से भी ज्यादा मनोबल वाले ?? .. तो फिर क्यों नहीं मोदी जी को सियाचिन भेजा जाए ??

और मैं सोच रहा हूँ कि क्या सेना हमारी व्यवस्था का अभिन्न अंग नहीं ?? .... और क्या हमें हमारी सभी व्यवस्थाओं पर कुछ टीका-टिप्पणी करने का अधिकार भी नहीं ?? .. बल्कि क्या ऐसा करना हमारा दायित्व नहीं ??

सोचियेगा - जरूर सोचियेगा - और शायद तब जान पाइएगा कि यदि आज हर कोई माल्या पर बोल रहा है या देशहित में इस देश की व्यवस्था पर बोल रहा है - तो हो सकता है कन्हैया भी कुछ ऐसा ही कर रहा होगा ....

और यदि कन्हैया कुछ झूठ या अपुष्ट या मनगढंत बोल रहा है तो सावधान !! .... माल्या बेचारा तो अभी नया नया है - ललित मोदी ही कहाँ दोषी सिद्ध हो पाया है ?? .. और हमारे सत्ताधीशों की भी पूरी पोल अभी कहाँ खुली है .... अभी तो कन्हैया ने जनम ही लिया है - पूरी रास लीला तो बाकी बची है !!

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Thursday, 10 March 2016

// सिद्ध होता है कि भाजपा की 'धरपकड़ नीति' बहुत ही दयनीय है ....//


ललित मोदी पकड़ाए नहीं .... माल्या भाग लिए या भगा दिए गए .... ओ पी शर्मा दिखे नहीं .... गुंडे वकील भी पकड़मपकड़ी खेल के बाद दिखे नहीं .... पठानकोट के सलविंदर भी किसी मज़ार पर दिखे नहीं .... राज ठाकरे को पकड़ने की हिम्मत नहीं .... शत्रु आज़ाद पकड़ाई में आते नहीं .... योगी साध्वी पकड़ने लायक नहीं .... आसाराम छूटते नहीं .... जाट आरक्षण दंगों के दोषियों को पकड़ने की आवश्यकता नहीं .... हमारे मित्र देश बेचारे पाकिस्तान ने कुछ आतंकी भेजने की सूचना दी पर यहाँ कोई पकड़ाया नहीं .... देश की जानी दुश्मन संस्था 'जेएनयू' में नारे लगाने वाले भी पकड़ में आए नहीं या पकड़ में लिए गए ही नहीं ....

और अकेले कन्हैया जो 'धरपकड़' लिए गए थे छूट गए - और छूट के छुट्टे हो गए .... कह रहे आरएसएस और भाजपा और मोदी की धरपकड़ जरूरी - और सेना में बलात्कारियों को तो पकड़ना ही पड़ेगा ....

और मोदी जी बिना कुछ पकडे बस धर-धर के दिए जा रहे हैं .... कह रहे हैं कांग्रेस 'मृत्यु' माफिक - बदनाम ही नहीं होती .... और तो और कह दिए कि गरीबी की जड़ें तो बहुत बहुत गहरी हैं इसलिए गरीबी को पकड़ पाना असंभव .... पर जनाब मोदी जी पकड़मपकड़ी के उपरोक्त हर धरपकड़ प्रकरण में मौन हैं ....

मेरी प्रतिक्रिया ....

सिद्ध होता है कि भाजपा की 'धरपकड़ नीति' बहुत ही दयनीय है ....
इन्हें ये ही संपट नहीं पड़ रही है कि क्या पकड़ना है क्या छोड़ना है - किसे पकड़ना है किसे छोड़ना है - कब पकड़ना है कब धरना है - क्यों पकड़ना है और क्यों नहीं छोड़ना है - और पकड़ने में क्या धरा है जब किसी को भी धरने में ही ये ऐसे बदनाम हो जाते हैं जैसे कि मुजरिम यही हों .... और सामान्यतः धरपकड़ के हर मामले में पकड़ने या ना पकड़ने में मुजरिम तो होते भी यही हैं - यानि सबसे पहले धराते तो ये खुद ही हैं ....

इसलिए मेरा भाजपा को सुझाव भी है ....
किसी अच्छे समझदार नेता को पकड़ो और ये मोदी को छोडो .. नहीं तो जनता आपको गरीबी की जड़ों के भी नीचे तक गाड़ देगी .... और बदनाम ये हारी हुई कांग्रेस होनी नहीं है - बदनामी तो आप की ही होगी - पूरी सत्तासीन पार्टी की ही होगी - पूरी भाजपा की ही होगी ....

फिर कभी 'केजरी' और कभी 'कन्हैया' के नाम पर रोते रहना .. "छिप गया कोई कोई रे चार जूते मार के - दर्द अभी तक होए - क्या करूँ राम रे" ....

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Monday, 7 March 2016

// जेटली जी .. असल में तो जनता जीत गई है और आप हार गए हैं ..समझे !! ..//


'जेएनयू' विवाद पर 'कन्हैया' पर कटाक्ष करते जेटली जी ने कह दिया ....
" हम जीत गए हैं - जो देश तोड़ने के नारे लगा रहे थे, जब जेल से बाहर आए हैं तो जय हिन्द और देश के झंडे के साथ नारे लगा रहे हैं " ....

मेरी प्रतिक्रियाएं ....

बैलगाड़ी के नीचे चलते कुत्ते को जिस प्रकार गुमान हो जाता है कि बैलगाड़ी वो ही खींच रहा है - ऐसे ही कुछ निहायत भ्रष्ट निकम्मे फ़ड़तूस लोगों को गुमान हो जाता है कि इस महान परम्परओां के महान देश में जो भी तिरंगा लहराते जय हिन्द का नारा लगा रहा है उसका श्रेय उसी घटिया इंसान को ही है ....

मुझे ऐसा भी लगता है कि पिछले दिनों में असल में तो इस देश की जनता ने भी कई बड़ी जीतें हासिल की हैं .... 

और जीत का कारण है कि जिनके दिल दिमाग में अति हिन्दू और केवल हिन्दू और शुद्ध हिन्दू जैसे ख्यालात ही उगते रहते थे और जुबां पर हमेशा हिन्दू शब्द ही आता था - आज बेचारे हिन्दू शब्द का पृथक उच्चारण तक नहीं कर पाते हैं - यानि जब भी बोलते हैं बेचारे "हिन्दू-मुस्लिम-सिक्ख-ईसाई" एक सांस में बोलने के लिए मजबूर होते हैं .... और ऐसा ही हश्र 'मुस्लिम' का जाप करने वालों का भी हुआ है .... 

मेरा इशारा ऐसे कई नेताओं की तरफ है जो धर्म और जाति विशेष की ठप्पे वाली राजनीतिक पार्टियों से सम्बद्ध हो अपनी राजनीति करते आए हैं .... मसलन मोदी जी .. जो लाख सांप्रदायिक ख्यालात के होते हुए भी प्रधानमंत्री बनने के बाद हमेशा मजबूरी में सेक्युलर-सेक्युलर बोलते दिखते हैं - सबका साथ लेने की बात कहते दिखते हैं .... और कहते हैं कि देश का विकास तब ही होगा जब हर जाति समुदाय का विकास होगा .... जो रोहित वेमुला के लिए बोलते हैं कि देश ने एक लाल खोया है ....  

और मैं इन वक्तव्यों का श्रेय इस देश की अधिकाँश धर्मनिरपेक्ष जनता को देता हूँ - जो "लव-जिहाद" "घर-वापसी" "गौमांस" "असहिष्णुता" और "देशविरोधी नारों की साज़िश" को नकारते हुए सत्य और समझदारी के मार्ग पर आगे बढ़ रही है ....

देश की जनता को अब समझ पड़ गई है कि 'देशभक्त' वो नहीं जो केवल झंडे को लहरा देशभक्ति के नारे लगा देशभक्त होने की डींग मारता है .. देशभक्त तो वो है जो साम्प्रदायिकता से नफरत करता है .. जो भ्रष्टाचारियों से नफरत करता है .. जो पूरे देश की भलाई के बारे में ही सोचता है .. जिसे इस देश के उद्योगपतियों से ज्यादा उद्योगों की चिंता है .. जिसे बड़े आदमी के छोटे घोटाले भी उतने ही अखरते हैं जितने छोटे आदमियों के बड़े घोटाले .. जो ओछी राजनीति और गोरख धंधा नहीं करता है .. और जो लाखों रुपये के खेल संगठनों पर करोड़ों के डाके डालने का घिनौना कृत्य नहीं करता है ....

इसलिए जेटली जी को सूचित करना चाहूँगा कि - श्रीमान ! असल में तो जनता जीत गई है - और आप हार गए हैं .... समझे !!
और अब लोग "कन्हैया" को सुन रहे हैं - समझ भी रहे हैं .... सावधान !!

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Sunday, 6 March 2016

// आखिर स्मृति खेर मोदी और "कन्हैया" में क्या फर्क है ....//


आज दो प्रमुख भाषण हुए ....

पहला भाषण था नरेंद्र मोदी का महिला सशक्तिकरण पर .... बड़े तामझाम के साथ संसद भवन के सेंट्रल हॉल में - एक विशेष कर्यक्रम में .... भाषण हुआ - टीवी पर लाइव प्रसारण हुआ - और बस हो गया - यानि उसके बाद कुछ न हुआ - होना भी नहीं था - क्योंकि भाषण में बखान जैसा कुछ था भी नहीं - शायद जसोदाबेन को भी कुछ अधिक भाया ना होगा ....

और दूसरा भाषण था अनुपम खेर का - असहिष्णुता पर ....  कलकत्ता के एक अखबार द टेलीग्राफ के मंच से - बड़े तमतमाये से हंसी-ठट्ठे के माहौल में - यानि खेर तमतमाये थे जैसे कि स्मृति संसद में - और बैठी पब्लिक हंसती हुई .... और वो भाषण हुआ - और सोशल मीडिया पर वायरल हो अभी तक चल रहा है .... और उस भाषण में मोदी का सुपर-डुपर बखान है .... यानि ऐसा बखान कि स्मृति भी याद हो आई - यानि वही हाव भाव और भद्दी अदा .... और बैठी जनता हंसी ठट्ठे के लिए मजबूर ....

यानि आज सिद्ध हो गया कि अब इस देश में मोदी की कोई हैसियत नहीं बची - उनका भाषण कोई नहीं सुन रहा - उनकी वो चमक और खनक कुंद पड़ गयी .... और उस रिक्त स्थान को भर दिया है स्मृति और खेर के नाटकीय भाषणों ने - जो त्वरित वाइरल हो स्वतः क्षीण हो जाते हैं ....

पर कुल मिलकर देश में ऐसा माहौल बहुत अच्छा बना है - और ये माहौल देश के हित में है .... क्योंकि अब लोग सुनकर ये जान पाएंगे कि आखिर स्मृति खेर मोदी और "कन्हैया" में क्या फर्क है - और कितना फर्क है .... नहीं तो अब तक ना जाने कितने "कन्हैया" अपनी काबलियत का प्रदर्शन करने से वंचित होते हुए इस देश के "ऐरे-गैरे-नत्थू-खैरों" के कारण अनसुने रह गए होंगे ....

इसलिए - छी टीवी स्मृति खेर और मोदी सहित अनन्य भक्तों को धन्यवाद .... बेहतर होगा वो अपना भोंडा प्रदर्शन इसी तरह जारी रखें ताकि हम हमारे यशस्वी "कन्हैय्याओं" को और गंभीरता से सुनने के लिए प्रेरित हों और उसके महत्त्व को भी समझ सकें .... और समझ सकें की देशद्रोही कौन होते हैं - देशभक्त कौन - मूरख कौन और जोकर कौन ....

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Saturday, 5 March 2016

// मुझे लगता है उम्र सबकी बढ़ रही है पर कुछ लोगों की समझ घट रही है ....//


कुछ दिन पहले नरेंद्र मोदी ने संसद में कुछ ऐसा कह दिया जो अव्वल तो सत्य नहीं - अपितु उपयुक्त भी नहीं ....

ना मालूम कहाँ की खुन्नस दिमाग में घुसेड़े कह दिए जिसका आशय था कि - "कुछ लोगों की उम्र बढ़ती है - समझ नहीं" ....

अब आप इनकी अक्ल देखें और तरस खाएं जो अव्वल तो कह रहे हैं कि "कुछ लोगों की उम्र बढ़ती है" - जबकि सत्य तो ये है कि उम्र तो सबकी बढ़ती है - और वो भी एक समान .... मसलम यदि मोदी जी पिछले ४० साल में ४० साल वृद्ध हुए तो शत्रुघ्न या कीर्ति आज़ाद या आडवाणी जी भी तो ४० साल ही वृद्ध हुए ....

और दुसरे ऐसा कुछ कहना जिसका ये अभिप्राय निकल सके कि शत्रुघ्न या कीर्ति आज़ाद या आडवाणी जी की समझदारी बढ़ी ही नहीं तो ये तो उपयुक्त भी नहीं .... क्योंकि मान भी लो कि मोदी जी अनुसार जितनी समझदारी स्मृति ईरानी की बढ़ी हो उतनी शत्रुघ्न या कीर्ति आज़ाद या आडवाणी जी की नहीं भी बढ़ी हो तो भी क्या ऐसा संसद में कह देना क्या शोभा देता है ??

और वो भी जब - जबकि संसद में कई युवा सांसद भी बैठे थे - जिनकी समझदारी से भरे वक्तव्यों के आगे मोदी जी स्वयं उनुत्तरित से दिखे .... मसलन अब मोदी से ज्यादा समझदार राहुल गांधी ने मात्र ३ शब्दों में मोदी जी को उद्वेलित और अनुत्तरित कर दिया .... जैसे कि "फेयर एंड लवली" .... बस ३ शब्द .... और मोदीजी ९० मिनिट बोल के भी कुछ ना बोल सके .... ना कुछ 'फेयर' ना ही 'लवली' .... और राहुल के सामने ही घुटने टेक अपने पूर्वजों को भुला ससम्मान याद करते रहे राजीव इंदिरा नेहरू जी को ....

और संसद के अंदर ही नहीं - संसद के बाहर भी अब एक और नायक ने दस्तक दे दी है - और वो नायक है एक युवा "कन्हैया" जो यकीनन अपने आपको मोदी से अधिक समझदार साबित करता है .... ये वो कन्हैया है जिसने जेल से रिहा होने के २४ घंटे में ही मोदीजी की चूलें हिला दी हैं - क्योंकि इनकी मातृपितर संस्था के बुजुर्गों ने जिनकी भी समझदारी उनकी उम्र के साथ बढ़ी ही होगी - उनमें से एक ने कन्हैया को "चूहा" कहा - और दुसरे ने इस लड़ाई को "सुर-असुर" की लड़ाई बता डाला .... यानि इनके तो आकाओं के दिमाग तक झंझोड़ डाले गए हैं जो यह तक तय नहीं कर पा रहे हैं कि ये कन्हैया चूहा है या सुर या असुर .... और ये है वही कन्हैया जिसे मोदी सरकार ने देशद्रोही सिद्ध करने का कुत्सित प्रयास किया था - पर हुआ क्या ? - "सत्यमेव जयते" .... स्मृति और मोदी वाल सत्यमेव जयते नहीं - अपितु इस देश के सच्चे दिलों वाला "सत्यमेव जयते" .... कन्हैया वाला "सत्यमेव जयते" .... मेरा "सत्यमेव जयते" .... 

इसलिए मेरा मोदी जी को एक बार फिर मुफ्त का सुझाव है कि - शत्रुघ्न या कीर्ति आज़ाद या आडवाणी जी जैसे वरिष्ठ लोगों की समझदारी पर प्रश्नचिन्ह लगाकर फ़ोकट में राहुल गांधी को अपनी ऐसी तगड़ी खिल्ली उड़ाने का मौका ना दें .... और अपनी सीमित समझदारी का उपयोग करते हुए अपने पद की मर्यादा का ध्यान रखें ....

और हाँ ३ विशेष सुझाव ....
१) छात्रों से पंगा ना लें ....
२) "कन्हैया" से तो सपने में भी पंगा ना लें - अन्यथा वो आपकी नींद ही हर लेगा ....
३) "कन्हैया" की जुबान काटने कटवाने का ख्याल भी दिमाग में मत लाना .... अन्यथा अभी तो तुम केवल बहरे हो - फिर शायद बोलने से भी वंचित हो जाओगे - गूंगे हो जाओगे .... दिव्यांग में कोई दम नहीं शुद्ध विकलांग हो जाओगे .... समझे ??

सारांश : मुझे लगता है उम्र सबकी बढ़ रही है पर कुछ लोगों की समझ घट रही है ....

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Thursday, 3 March 2016

// 'फेयर एंड लवली' .. और .. 'जालिम लोशन' ....//


वाह क्या बात है .. मैं राहुल गांधी का आज मुरीद हो गया .. क्योंकि उन्होंने इतने नपेतुले ३ शब्दों में ही मोदी और जेटली की धज्जियां बिखेर दीं .... 'फेयर एंड लवली' ....

वाकई जिस बेशर्मी के साथ मोदी सरकार द्वारा 'अनर्थ' स्कीम को लागू करने की ज़ुर्रत पहले भी हुई थी और अभी फिर हुई है वह अक्षम्य है .... ऐसी टुच्ची स्कीम कि कोई भी अपनेवाला चोर छातीठोंक निडर अपने कालेधन का खुलासा कर और उस धन पर टैक्स और कुछ पेनल्टी दे उसे सफ़ेद धन कर ले - और बस हो गया - बड़े आराम से - ना कोई पूछताछ ना कोई केस ना कोई सज़ा .... ऐसी बदनीयती से भरपूर चोट्टों की स्कीम के लिए 'फेयर एंड लवली' से बढ़िया कोमल मखमली संसदीय शब्द हो नहीं सकते थे .... हाँ असंसदीय शब्द वाक्य और और लेख तो बहुत से हो सकते हैं पर उनका यहाँ लेख करना उचित और संभव नहीं होगा .... और शायद असहिष्णुता युक्त देशद्रोह के दायरे में होगा ....

कुल मिलाकर मुझे लगता है कि नरेंद्र मोदी और अरुण जेटली की ऐसी 'फेयर एंड लवली' स्कीम का सटीक नामकरण तो राहुल गांधी ने कर दिया - पर इसका तोड़ नहीं बताया ....

तोड़ मैं बताता हूँ .... मोदी की 'फेयर एंड लवली' स्कीम का तोड़ है .. केजरीवाल का "जालिम लोशन" जो इनके समस्त प्रकार की 'दाद' 'खाज' 'खुजली' का इलाज कर रहे हैं ....

मुझे लगता है - 'सूट-बूट' पहन चेहरे पर 'फेयर एंड लवली' चुपड़ कर शायद मोदी जी अपने भक्तों के बीच अपनी छवि तो चमका लेंगे .... पर अपनी गिरती सेहत सुधारने के लिए तो उन्हें अंदर 'केजरी प्रायोजित जालिम लोशन' का उपयोग करना ही पड़ेगा .... हा !! हा !! हा !!

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Tuesday, 1 March 2016

// कन्हैया बनाम कठेरिया .... सच्चाई बनाम धूर्तता ....//


देशभक्तों ने तड़ातड़ झूठे मनगढंत अपुष्ट आरोप लगा देश के एक होनहार छात्र नेता कन्हैया को देशद्रोही नारे लगाने के जुर्म में रगड़ दिया प्रताड़ित कर दिया और उसे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया .... पर आज तक उसके विरुद्ध वो नारे लगाने का कोई सबूत पेश नहीं किया जा सका .... यहां तक कि वो जाहिल बस्सी भी लाख चाहकर भी कुछ सिद्ध किये बगैर बेशर्मी से सेवानिवृत्त हो गए - या सेवानिवृत्त होने दिए गए - बिना किसी वांछित कार्यवाही के - जैसे कि कम से कम दादागिरी करने और धूर्तता बरतने का मुकद्दमा तो बस्सी पर चलना ही चाहिए था ....

लेकिन दोहरेपन की पराकाष्ठा देखें .... देशभक्तों के चहेते और उनके नेता केंद्र में मंत्री कठेरिया का वीडियो पूरी सृष्टि और ब्रह्माण्ड में वायरल हो चुका है - जिसमें वो आपत्तिजनक भाषण दे रहे हैं - देते सुनाई दे रहे हैं - देते दिखाई दे रहे हैं .... पर उनपर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है .... बल्कि वो तो अभी भी अपनी सफाई देने के लिए सहज सार्वजनिक रूप से खुल्ले उपलब्ध हैं - और वो झूठ बोल रहे हैं कि उन्होंने ऐसा वैसा कुछ नहीं कहा था ....

और तो और मज़े के बात देखें कि कठेरिया के समर्थन में एक और यशस्वी भाजपा सांसद बाबूलाल ने बयान दे दिया है कि क्या हत्यारों से बदला नहीं लेंगे तो क्या उनकी आरती उतारेंगे ....

कितना स्पष्ट खुल्लमखुल्ला विरोधाभास .... शायद सिर्फ इसलिए कि कन्हैया एक गरीब का बेटा और भाजपा की विचारधारा के विपरीत - और कठेरिया रसूखदार भाजपाई पट्ठा - शायद मोदी का खास !!

इसलिए मुझे लगता है ये विवेचना मात्र कन्हैया बनाम कठेरिया की नहीं है - अपितु ये विवेचना है सच्चाई बनाम धूर्तता की ....

और थोड़े संतोष की बात यह है कि आज पूरे जेएनयू के छात्रों और शिक्षकों ने उस तमाम धूर्तता को ठेंगा बताते हुए और उस तमाम दादागिरी का प्रतिकार करते हुए भाजपाई पट्ठों को पीछे धकेलने में कामयाबी हासिल कर ली है - जिसके कारण कन्हैया अब जल्द बाइज़्ज़त रिहा हो जाएगा ....

पर प्रश्न खड़ा होता है कि कन्हैया तो जल्द बाइज़्ज़त रिहा हो जाएगा पर क्या कठेरिया बेइज़्ज़त हो अंदर जाएगा ???? ....

मुझे लगता है कि अब लोगों में मूड माहौल तो बनने लगा है और लोग समझने लगे हैं कि ये "देशद्रोह" क्या होता है - और देशद्रोह कन्हैया ने नहीं कठेरिया ने किया है - इस कारण कठेरिया अंदर जा भी सकता है .... वो भी बाबूलाल सहित !! .... !! आमीन !!

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