Monday, 4 July 2016

// बात बस इतनी सी है .. केजरीवाल पंजाब जीत चुके हैं - मोदी सब कुछ हार चुके हैं ..//


और केजरीवाल को घेरने और परेशान करने के मोदी के लगातार सफल / असफल प्रयास होते रहे हैं .... कल 'आप' के एक विधायक पर कुछ तो भी आरोप लगे और एफआईआर दायर हो ढिंढोरा पीटा गया था .. आज केजरीवाल के प्रधान सचिव और एक अन्य सचिव गिरफ्तार - एक अन्य सचिव सहित ९-१० अधिकारियों का स्थानांतरण .... और प्रकरण बहुत पुराना - जिसमें मुख्यमंत्री कार्यालय पर सीबीआई का छापा तक डलवाया गया था .... 

और केजरीवाल के विरुद्ध तमाम दुनियावी ताकतें - तोते मैना कौए और कुछ ज़मीनी चौपाए आदि आदि .... पर फिर भी केजरीवाल का व्यवहार और विश्वास चट्टान जैसा कायम .... तेवर और निश्चय में कोई कमी नहीं .... और लगातार सफलता भी जारी .... राजनैतिक सफलता - नैतिक सफलता - लोकतान्त्रिक सफलता - और वर्चस्व की भी सफलता ....

इसलिए यदि कोई सोच रहा है कि केजरीवाल हार जाएंगे तो वह मुगालते में है .. क्योंकि अव्वल तो वो हारने वाली चीज़ ही नहीं है .... और यदि वो हरा भी दिए जाते हैं तो ये हार तो हमारी और आपकी होगी - केजरीवाल की नहीं - क्योंकि क्रांतिकारी जब तक जीत ना जाए या मिट ना जाए वो अपनी हार मानता भी नहीं है और इसलिए हार कभी स्वीकारता भी नहीं है ....

इसलिए इस तमाम उठापटक को मैं बस इतनी सी बात ही निरुपित करना चाहूंगा ....
यशस्वी केजरीवाल जनता जनार्दन के मन के साथ पंजाब भी जीत ही चुके हैं .... यानि जीत का एक और सफल कदम ....
और हताश तिकडमी मोदी सब कुछ हार चुके हैं .... अपनी गिरती साख के साथ सब कुछ !!!!

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// तो क्या हम भी तो नहीं 'नायाब मुजरिम' ?? ....//


आज मैं सबको आगाह कर रहा हूँ .... हम सब जुर्म कर रहे हैं .... हम सब मुजरिम हैं ....

और वो इसलिए कि .. जब इस मोदी सरकार को मालूम पड़ गया था कि ये केजरीवाल एक नक्सली - करोड़ों का चंदा ले चुनाव जीता - दिल्लीवासियों को धोखा दिया .. वाड्रा घपलेबाज़ .. ललित माल्या भी अपराधी .. शीला दीक्षित भी भ्रष्टाचारी जिसे बचा रहा केजरी .. कलमाड़ी मनमोहन सोनिया राहुल बंसल अश्विनी राजा जिंदल चव्हाण कनिमोई आदि ना जाने कितने ढेर सारे भी सब रहे अपराधी या भ्रष्टाचारी .. और मोदी सरकार के सभी संगी साथी ईमानदार कर्मठ चौकीदार सेवक .. फिर भी कुछ किया नहीं - कुछ हुआ नहीं .... यानि मोदी बैठे रहे निठल्ले या ठल्ले ....

और हमें ये सब मालूम है २५ महीने से .... और हम भी बैठे हैं निठल्ले ....

और इधर आज दिल्ली के 'आप' मंत्री कपिल मिश्रा को मोदी के अधीन एसीबी ने तलब कर लिया है - कारण कम पर आरोप यह कि - उन्होंने ही टैंकर घोटाले की पड़ताल की थी और शिकायत भी - फिर ११ महीने कोई कार्यवाही क्यों नहीं की - क्यों बैठे रहे निठल्ले ?? ....

यानि कपिल मिश्रा ठहराए गए हैं 'नायाब मुजरिम' .... नायाब इसलिए कि वो शिकायतकर्ता भी थे - पर बैठे रहे निठल्ले .... 

इसलिए ही कह रहा हूँ कि यदि हमको भी मोदी सरकार से शिकायत है .. २५ महीने से है .. तो हम भी मुजरिम हैं .... क्योंकि हम भी तो बैठे हैं निठल्ले .... नहीं क्या ????

सोचियेगा .... इस जुर्म अपराध की दुनिया के ये बदलते मापदंड क्यों ?? .. और राजनीति इस कदर सब पर हावी क्यों ?? .. और शिकायतकर्ता पर हावी क्यों ?? .. और निठल्ले और अपराधी मजे में क्यों ?? .. और ये ऐसे खतरनाक बदलाव क्यों ?? ....

कहीं मात्र इसलिए तो नहीं कि केजरीवाल दिल्ली जीते थे - और यदि पंजाब जीतेंगे - गोवा जीतेंगे - गुजरात जीतेंगे तब इन निठल्लों का क्या होगा ?? .... 

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// 'इनके अच्छे दिनों' का विस्तार ....//


सब कुछ अच्छा चल रहा है ....
किसी को हटाया नहीं जाएगा ....
नए चेहरे लिए जाएंगे ....
कइयों की होगी तरक्की ....

मतलब पूरे मंत्रिमंडल के अच्छे दिन बरकरार ....
कल होगा मंत्रिमंडल का विस्तार ....

मेरी प्रतिक्रिया ....

तो क्या वाकई सब कुछ अच्छा चल रहा था ?? ....
या कुछ भी अच्छा चल रहा था ?? ....

अब तो रोना भी है बेकार ....
यदि आपको 'अपने अच्छे दिनों' की है दरकार ....
तो बस किसी तरह रोकना होगा .. 'इनके अच्छे दिनों' का विस्तार ....

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Sunday, 3 July 2016

// बेगूसराय में कहीं कन्हैया ने ...................//


समाचारों के अनुसार - गुरुवार को कन्हैया ने बेगूसराय में जिस मैदान में सभा की थी उस मैदान में शुक्रवार को ABVP और बजरंग दल के लोगों ने हवन किया और गंगाजल का छिड़काव किया .... उनका कहना था कि कन्हैया देशद्रोही है और उसकी सभा होने से यह धरती अपवित्र हो गई थी .. इसलिए उन्होंने हवन और गंगाजल से इसे फिर से पवित्र कर दिया है .... कन्हैया ने जिन महापुरुषों की प्रतिमाओं पर माल्यापर्ण किया था उसे भी उन्होंने गंगा जल से धो पुनः पवित्र कर दिया है ....

मुझे ये नाटक नौटंकी उचित नहीं लगी - और शनिवार को मैं सोच रहा था कि बेगूसराय में कहीं कन्हैया ने नित्यक्रिया तो नहीं की होगी ?? .... और भविष्य में यदि कन्हैया ने किसी बड़े भाजपा नेता के माल्यार्पण कर दिया तो ?? ....

वैसे मुझे लगता है कन्हैया भी एक इंसान है - उसने नित्यक्रिया अवश्य ही की होगी .. पर वो कभी भी भविष्य में भाजपा के किसी नेता का माल्यार्पण करे ऐसा लगता तो नहीं है .... अतः आज रविवार को पवित्रता के पक्षधरों को नाटक नौटंकी ना करने की नेक सलाह और मुफ्त मार्गदर्शन सहित सूचनार्थ प्रेषित !! .... आगे उनकी मर्ज़ी ....

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Saturday, 2 July 2016

// 'कॉमन सिविल कोड' लागू होगा ?? .. नहीं नहीं नहीं .. होगा होगा होगा ....//


वर्षों से 'कॉमन सिविल कोड' के बारे में सुनते आ रहे हैं .. लगातार सुनते आ रहे हैं .. जोर शोर से सुनते आ रहे हैं .... पर सुनते ही आ रहे हैं ....

कारण ?? .... कांग्रेस सत्ता में रही है .. और वो मस्त रही है .. और वो पचड़े में पड़ना नहीं चाहती थी .. क्योंकि पचड़े में पड़ने की आवश्यकता नहीं थी - क्योंकि वो सत्ता में वैसे ही मस्त थी ....

और इसलिए भाजपा 'कॉमन सिविल कोड' के बारे में चिल्लाचोट करती रही थी .. क्योंकि शोर मचाने के सिवा वो कुछ कर भी नहीं सकती थी .... और शायद कुछ करना चाहती भी नहीं थी .. सिवाय चिल्लाचोट के .. और विपक्ष का धर्म निभाने के - वो भी अपने स्वार्थ में ....

और जनता भी क्या कर सकती थी .... क्योंकि जनता भी इस मुद्दे पर काफ़ी एक राय होते हुए भी सर्वसम्मत नहीं थी .... और इसके कारण हैं कि भारतीयता से ऊपर भी इस देश में कुछ कुछ है .. और वो है हिन्दू होना या मुसलमान होना .... यानि धर्म !!

पर समस्त वस्तुस्थिति के अलावा एक वस्तुस्थिति ये भी है कि भाजपा ने सदैव 'कॉमन सिविल कोड' 'धारा-३७०' और 'राम मंदिर' के लॉलीपॉप बेच-बेच कर ही अपनी दुकानदारी जमाई है .. और अच्छी जमाई है .... दुकान चल रही है ....

अब 'राम मंदिर' तो स्वामी सुब्रमण्यम की कृपा पर छोड़ दिया गया है .. जब उनकी राम जी पर कृपा हो जाएगी - शायद मंदिर बनाने की घोषणा हो जाएगी .... पर मंदिर शीघ्र बनेगा कि नहीं इस बात की गारंटी तो राम जी के अलावा स्वंय स्वामी भी नहीं दे सकेंगे .... पर मैं गारंटी दे सकता हूँ कि मंदिर नहीं बनेगा - और इसका कारण भी बताता हूँ .... राम का मुझे नहीं पता पर राम मंदिर इस देश में राजनैतिक मुद्दा बनाया गया है - और मोदी-शाह जैसे नेता ऐसे राजनीतिक मुद्दे का यूँ ही पटाक्षेप कर हाथ में आए मुद्दे को जाया नहीं कर सकते .... ना करेंगे .... 

और जहां तक बात 'धारा-३७०' की है तो कश्मीरी बुआ के रहते तो ये मुद्दा ज्वलंत मुद्दा बने रहकर ठंडे बस्ते में ही पड़ा सुलगता रहेगा .... और तब तक सुलगता रहेगा जब तक ठंडा नहीं हो जाता - और ठंडा जब तक नहीं होगा जब तक ये सुलगाया जाता रहेगा .... और ये तब तक सुलगाया जाता रहेगा जब तक बुआ और बबुआ की सरकार कायम है .... आगे क्या होगा ?? .. आप ही अंदाजा लगाएं - क्योंकि माफ़ करें - मैंने ही सारे विकट प्रश्न सुलझाने का ठेका नहीं लिया है ....

तो क्या 'कॉमन सिविल कोड' लागू होगा ?? .... हाँ ये हुई ना बात !! .. इस सरल प्रश्न को मैं चुटकियों में समझा देता हूँ .... बिल्कुल संगम फिल्म के गाने की तर्ज़ पर ....

नहीं नहीं नहीं !!!! .... इस सरकार के रहते कभी नहीं होगा  .... पर ....
होगा होगा होगा !!!! .... इस सरकार के जाने के बाद लागू होगा ....
और वो इसलिए होगा कि हिन्दू और मुसलमान दोनों समाज में बहुत जागरूकता जो आ रही है ....
भारत माता की जय !!!!

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Friday, 1 July 2016

// क्या दूध घी के बजाय स्वर्णयुक्त पवित्र गौमूत्र का उपयोग ज्यादा पुण्य नहीं देगा ?? ..//


अब फ़िल्मी कलाकार इरफ़ान भाई ने कुछ यूँ यूँ कह दिया है ....

"कुर्बानी का मतलब अपनी कोई अजीज चीज कुर्बान करना होता है .. ये नहीं कि बाजार से आप कोई दो बकरे खरीद लाए और उनको कुर्बान कर दिया" ....
"आपको उन बकरों से कोई लेना-देना नहीं है तो वो कुर्बानी कहां से हुई ?? .. इससे कौन-सी दुआ कुबूल होती है?? .. हर आदमी अपने दिल से पूछे कि किसी और की जान लेने से उसको कैसे पुण्य मिल जाएगा ??" ....
"हमारे जो भी त्योहार हैं उनका मतलब हमें वापस से समझना चाहिए कि वे किसलिए बनाए गए हैं" ....
"सौभाग्य है कि एेसे देश में रह रहा हूं जहां हर धर्म का सम्मान होता है" ....
"जिस तरह मदारी डमरू बजाकर वादा करता था कि सांप और नेवले की लड़ाई दिखाएगा पर कभी दिखाता नही था - ऐसे ही वादे नेता करते है जो कभी पूरे नही कर पाते है" ....

और बहस छिडनी थी - छिड़ी - और इसलिए मेरी प्रतिक्रिया ....

मुझे संतोष है कि तर्कसंगत सोचने वालों ने भी अब काफी कुछ कहना शुरू कर दिया है ....
और अतार्किक सोचने वाले कपडे फाड़ने के अलवा कुछ ज्यादा कर नहीं पा रहे हैं ....

इसलिए मेरा मूड हो आया कि जब इरफ़ान भाई खुल के कुछ कह सकते हैं तो मैं भी क्यूँ चुप रहूँ ....
अतः मेरे भी तर्क पर गौर हो जाए ....

क्या कुर्बानी और दान में कुछ ज़्यादा ही अंतर है ?? .. क्या दोनों के मूल में त्याग नहीं है ?? ..
यदि है भी तो क्या हिन्दुओं को खाद्य पदार्थ की 'परसादी' कर उसे खाने के बजाय व्यर्थ कर देना भी क्या पुण्य हो सकता है .... मसलन दूध से मूर्तियों को नहलाना - तेल चढ़ाना - हवन में घी चावल आदि फूंकने से क्या पुण्य मिल सकता है .... आदि !! ....

क्या दूध तेल के बजाय स्वर्णयुक्त पवित्र गौमूत्र का उपयोग ज्यादा पुण्य नहीं देगा ?? .... यदि नहीं - तो क्यों ?? ....

और सबसे महत्वपूर्ण - वो नेता जो मदारी माफिक डमरू बजाकर कई वादे किये थे और पूरे नहीं किये हम उनकी कुर्बानी क्यूँ ना दे दें ?? .... क्या ऐसी कुर्बानी से पुण्य नहीं मिलेगा ?? .. नहीं भी मिलेगा तो भी क्या पाप चढ़ जाएगा ?? .. नहीं चढ़ेगा तो फिर हिचक क्यों ?? .. अरे चलो मदारी ना सही - क्यों ना उसके बंदर को ही गौमूत्र से नहला धुला बली का बकरा बना दिया जाए ?? .. और मदारी को खिलवाड़ करने से रोका जाए ?? ....

और क्यों ना हम सभी अपने अपने धर्मों के बंधनों से ऊपर उठकर तर्कसंगत सोचते हुए उस ऊपर वाले से बिना डरे इंसानियत के हक़ में ही कुछ करने की ठानें ?? ....

सोचियेगा !! बिना डमरू बजाए और सुने .. शांत और एकाग्र चित्त हो सोचियेगा .... धन्यवाद !!!!

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// ढींगरा जी !! .. मामला दस्त का हो या दस्तावेज़ का - क्या किया जा सकता है ?? ..//


वाड्रा प्रकरण में २ साल व्यतीत होने पर भी अब तक मोदिया कार्यवाही निरंक ही रही ....

पर कल जब ढींगरा आयोग की रपट आने वाली थी तो लगा शायद काली दाल में कुछ पीला सा भी दिखे ....

मन मयूरा सा हो खुश हो रहा था कि - आज रपट आए तो फिर तो लपट जइयो ....

पर रपट आते आते रह गई .. क्योंकि ढींगरा साहब को ऐन वक्त कोई दस्तावेज़ दे गया ....

और मुझे याद आया मेरे कार्यालय का वो बाबू जो अति आवश्यक कार्य के होते हुए भी कार्यालय देर से पहुंचा और कारण पूछने पर बोला .... साहब ऐन वक्त दस्त लग गए थे .....

तो मामला दस्त का हो या दस्तावेज़ का क्या किया जा सकता है ?? ....

पर हाँ एक बात तो स्पष्ट हो रही है कि वाड्रा और मोदी में - तथा कांग्रेस और भाजपा में - यकीनन सांठगांठ तो पक्की है .... और गाँठ इतनी पक्की कि जिस दिन खुल गई - बिना दस्तावेज़ों के भी दोनों को दस्त लगना तय है ....

बस इंतज़ार है केजरीवाल के प्रयासों के सफल होने का - सुब्र्मण्यम स्वामी के मोदिमोह के छलकने का - भगवत झा आज़ाद के बेटे कीर्ति आज़ाद के होश में आने का - खड़से जी को उलटी दस्त लगने का .... ललित मोदी के यशस्वी होने का - और माल्या के देश में आने की संभावनाओं के ख़त्म होने का .... आमीन !!!!

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