Thursday, 4 August 2016

// यदि मुबारक हों तो .. मोदी गुजरात को ही मुबारक हों ....//


नरेंद्र मोदी थे गुजरात के मुख्यमंत्री - और भक्त बताते हैं तब वहां कोई चूं चपड़ नहीं कर सकता था - वाइब्रेंट गुजरात अजब शांत था - तमाम समस्याओं के पसरे रहते गुजरात में गजब विकास था .. और ये सब मोदी का कमाल था जिनका गुजरात पर एकछत्र राज था .... और गुजरात में विकास था ऐसा पूरे देश को गुमान था ....

और इसलिए पूरे देश ने मोदी को प्रधानमंत्री चुन लिया था - गुजरात से मोदी को छीन लिया था ....

और मोदी ने देश झपट - आनंदीबेन पटेल को गुजरात टिका दिया था ....

फिर आनंदीबेन ने भी वाइब्रेंट गुजरात को और हिला के रख दिया - हिलाया भी क्या - वाइब्रेट ही कर दिया  .... पाटीदारों को दबा दिया हार्दिक को जेल पहुंचा दिया - दलितों को भी निपटा दिया - यानि मोदी जैसे ही किसी को कोई चूं चपड़ नहीं करने दिया .... बेन ने तो मोदी से भी अच्छा काम किया - और गुजरात को और आगे बढा दिया .... इतना आगे कि लोग मोदी को भी भूल गए और बेन भाई से भी आगे निकल गई .... 

पर इधर भाई बुड्ढों से परेशान था .. सो ७५ का फार्मूला फिट कर दिया .. और कह दिया अब कोई चूं चपड़ नहीं .... पर इस चक्कर में बैठे बिठाए ७५ की होने वाली बेन की चूं निकल गई .... और बेन ने इस्तीफ़ा दे दिया ....

अब आगे क्या ?? ....

मुझे लगता है मोदी अच्छे थे - और आनंदीबेन उनसे अच्छी थीं - और गुजरात के दिन अच्छे से लद गए थे .... और अगला आने वाला भी उनसे अच्छा मिलेगा - क्योंकि भाजपा में ऐसे अच्छे लोगों की कोई कमी तो है नहीं - एक ढूंढो हज़ार मिलते हैं .... पर यदि नहीं मिले तो भी निराश होने की आवश्यकता नहीं है - क्योंकि फिर मोदी तो हैं ही .... वो वापस गुजरात चले जाएंगे .. क्योंकि ना उन्हें देश समझ आ रहा है ना देश को मोदी ....

तो गुजरात को इसी शुभकामनाओं के साथ कि उनको उनके मोदी वापस मिल जाएं .. और मोदी ना भी सही तो कम से कम अमित शाह ही वापस मिल जाएं तो भी देश का भला होगा .... क्योंकि शाह भी गुजरात के लिए कोई मोदी से कम अच्छे नहीं .. और देश के लिए कम बुरे नहीं .. है ना !!!!

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// बहुत हुआ !! .. केजरीवाल को दिल्ली सरकार त्याग कर आगे बढ़ना ही होगा ....//


केंद्र और दिल्ली सरकार के अधिकारों से संबंधित दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला आ गया है .. मेरी त्वरित प्रतिक्रिया ....

फैसले में दिल्ली सरकार को एक बहुत बड़ा झटका लगा है .. क्योंकि फैसले के मुताबिक़ दिल्ली के बॉस तो एलजी ही होंगे - और दिल्ली में केंद्र सरकार की ही चलेगी - लगभग सारे अधिकार एलजी के पास ही होंगे .... यहां तक कि दिल्ली सरकार के पास कोई आयोग बनाने के या कोई कानून बनाने के अधिकार भी नहीं होंगे ....

और एलजी केंद्र के द्वारा नियुक्त एक एजेंट के रूप में काम करते रहे हैं - और केंद्र मोदी के अधीन है - और मोदी और केजरीवाल के बीच ३६ का आंकड़ा जगजाहिर है ....

मैं फैसले से स्तब्ध हूँ - पर शायद संविधान में ही ऐसा कुछ प्रावधान होना परिलक्षित होता है जो भले ही न्यायसंगत या व्यवहारिक या अपेक्षित ना होते हुए भी संवैधानिक होने के कारण न्यायसंगत मानना अपरिहार्य हो जाता है .. मसलन एक १७ साल के नाबालिग को बलात्कार की सजा होना न्यायसंगत या व्यावहारिक या अपेक्षित होते हुए भी असंवैधानिक होने के कारण नहीं दिया जा सकना भी न्यायसंगत ही हो जाता है .... और यही विडम्बना भी है !!!!

और इसलिए मुझे लगता है कि अब दिल्ली सरकार भले ही सुप्रीम कोर्ट में जाएगी - पर वहां भी यही संविधान आड़े आएगा और इसलिए अपेक्षित निर्णय की बहुत आशा रखना उचित नहीं होगा .... और दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाए - ऐसा भी अब होने नहीं दिया जाएगा .... 

इसलिए आज बहुत सोच विचार के मैं केजरीवाल को ये सुझाव देता हूँ कि अब उचित समय दिल्ली सरकार का त्याग कर दिया जाए - और आगे किसी अधूरी सरकार के लिए चुनाव ना लड़ा जाए ....

मेरे सुझाव के पीछे तर्क यह है कि .. क्योंकि एलजी केजरीवाल को काम नहीं करने देंगे - और तमाम मशक्कत के बाद भी दिल्ली में वैसे जनहित के कार्य नहीं किये जा सकेंगे जैसा कि केजरीवाल चाहते और प्रयास करते रहे हैं .... और अंततः दिल्ली की जनता का भला नहीं हो पाएगा और इसका दोष केजरीवाल पर मढ़ा जाएगा और गुनहगार बच जाएंगे .... 

और इस संवैधानिक व्यवस्था से केजरीवाल को बिलकुल भी हताश होने की आवश्यकता नहीं हैं - और ना ही वो हताश होने वाले हैं - बल्कि उन्हें इस स्थिति को एक चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए संविधान को दुरुस्त करने के महा-लक्ष्य की ओर आगे बढ़ना चाहिए ....

और ऐसे महा-लक्ष्य की पूर्ती के प्रयास में फिलहाल पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त पंजाब और गोवा चुनाव पर १००% ध्यान लगा जीत सुनिश्चित करनी चाहिए - और उसके बाद गुजरात मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ हेतु प्रयास करना चाहिए .... और उसके बाद २०१९ में केंद्र सरकार में अपना वर्चस्व कायम करने के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ना चाहिए ....

और मेरा विश्वास है कि - ऐसा ही होगा .... !!!! जय हिन्द !!!!

पुनश्च : मेरा सुझाव अपनी जगह - पर मुझे लगता है कि केजरीवाल उपरोक्त परिस्थिति को भी राजनितिक रूप से धाँसू तरीके से भुनाएंगे .. क्योंकि अबसे हर समस्या के लिए एलजी को ही दोषी ठहराया जाएगा .... सड़क पे गड्ढा हो - डेंगू हो - सर्दी लगे - हवा खराब हो - गाय मरे - सूअर जिए - यानि अब हर समस्या के लिए एलजी / मोदी दोषी होंगे - होंगे ही - होने भी चाहिए - है ना - हा ! हा !! हा !!! .... और इसलिए अब मुझे भी भक्तों का उपयुक्त उपहास करने में और आसानी होगी .... इसलिए भक्तों को भी चेतावनी .. !!!! सावधान !!!!

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Wednesday, 3 August 2016

// ये लो !! पाक में राजनाथ का विरोध हो गया - और पाक 'एक्सपोज़' हो गया ?? ..//


सार्क सम्मलेन में भारत का प्रतिनिधित्व करने हमारे गृह मंत्री राजनाथ सिंह पाकिस्तान पहुँचा दिए गए ....

और उनके वहां पहुँचते ही उनका विरोध हो गया .. उनके विरुद्ध नारे लग गए .. और विरोध का नेतृत्व होना पाया गया हिजबुल सरगना आतंकी सैय्यद सलाउद्दीन के द्वारा .. और भारत को कुछ स्पष्ट हुआ और तथ्यात्मक आरोप लगा दिया गया कि इस विरोध को पाकिस्तान की सरकार का भी समर्थन रहा ही होगा ....

पर सारे टुच्चे मिलकर भी हमारे साहसिक राजनाथ जी का बाल भी बांका करने की हिम्मत नहीं कर पाए .... और अंततः केवल चिल्लाचोट कर रुखसत हो लिए .... 

और इसलिए भारत अपने किये पर संतुष्ट होता दिख रहा है .. क्योंकि भारत का ऐसा मानना भी सार्वजनिक हो रहा है कि ऐसी वारदातों से पाकिस्तान विश्व पटल पर और 'एक्सपोज़' हो रहा है ....

और शायद हमें बच्चों जैसे समझाया जा रहा है कि जैसे ही पाकिस्तान 'एक्सपोज़' होगा तो सारे भक्त मिलकर पाकिस्तान को धर दबोचेंगे - और इस तरह पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दे दिया जाएगा ?? ....

पर इस बीच - मुझे पता चला कि बांग्लादेश ने अपने गृहमंत्री को पाकिस्तान नहीं भेजकर उसके एवज में जूनियर मंत्री को भेजा .... और नवाज शरीफ ने आज एक बयान जारी कर कहा है कि आज़ाद कश्मीर में ८ जुलाई से एक नए आंदोलन की शुरुआत हो गई है ....

और इसलिए मैं एक बार फिर बहुत भारी दिल से अपने दिमाग की बात कहने पर मजबूर हूँ कि - हद्द हो गई - बांग्लादेश तक हम से आगे निकल गया .... और मोदी सामान्य कूटनीति तक में दिव्यांग साबित हो गए और संयमित उपयुक्त वांछित निर्णय लेने में अक्षम साबित हो गए .... स्थितियां विकट हैं - और विकट ही नहीं दयनीय भी हैं - और शर्मनाक भी .... और वो इसलिए भी कि पाक-नापाक तो बहुत पहले से एक्सपोज़ हुआ पड़ा है - अब तो मोदी एक्सपोज़ हो रहे हैं - भारत एक्सपोज़ हो रहा है .. इसलिए ..
!!!! पुनः सावधान !!!!

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// मोदी जी को १० दिनी केजरी विपश्यना का पूरा लाभ प्राप्त करने की मुफ्त सलाह ..//


भक्तों को बहुत तकलीफ रहती आई है - केजरीवाल से .. और तकलीफ ये कि केजरीवाल हर सुबह उठ कर मोदी को बुरा भला कहते रहते हैं .... अब ये बात तो ठीक है पर पूरी नहीं - क्योंकि मैंने केजरीवाल को हर सुबह मोदी को बुरा ही कहते सुना है - भला कुछ कहा हो याद तो आ नहीं रहा .... 

पर केजरीवाल कभी भी मोदी को कोसते नज़र नहीं आए - इनके सामने रोते नज़र नहीं आए - या कभी गिड़गिड़ाते नज़र नहीं आए .... जब भी मौक़ा लगा हमेशा ललकारते चेताते डपटते गुस्साते या झल्लाते ही दिखे - और डरते तो कभी नहीं - और झुकते तो कदापि नहीं ....

और इसके उलट स्वयं मोदी कोसने के माहिर निकले .. जब देखो वो कांग्रेस और ६० साल और राहुल सोनिया को ही कोसते रहे हैं - यहां तक कि नेहरू के नाम पर तो इस शिद्दत से रोते हैं जैसे कि नेहरू ने कभी इनको बचपन में कान पकड़ चपतिया दिया हो - या कड़ी धूप में उकडू करा मुर्गा बनवाया हो ....

और अब तो मोदी जी जब तब देखो जनता के सामने कुछ डरे सहमे हुए से गिड़गिड़ाते ही नज़र आए कि - मुझे तो अभी २ साल ही हुए हैं - मुझे इतनी जल्दी मत नकारो .... मुझे अभी थोड़ा वक्त और दो .. मेरा हनीमून पीरियड चल रहा है .. मैनें प्रयास बहुत किया है - मैं सुबह शाम लगा हूँ - मैंने अभी तक तो कोई भ्रष्टाचार भी नहीं किया है .. मैनें तो गैस दे दी - खाते खुलवा दिए .. मित्रो भाइयों बहनो - मैं मैनें मेरा मुझे .. आदि ..

और इस गिड़गिड़ाहट के दौरान वो कभी भी केजरीवाल का नाम लेते नहीं पाए गए .... केजरीवाल का नाम वो सालों पहले लिए थे जब उन्होंने उन्हें एके-४९ कहा था - बदनसीब कहा था - नक्सली कहा था - पाकिस्तानी एजेंट कहा था - रात के अँधेरे में २ करोड़ का काला धन डकारने वाला कहा था - फोर्ड फाउंडेशन से चंदा लेने वाला कहा था - भगोड़ा कहा था .... पर तब मोदी नादान थे - अब थोड़ा सहम गए हैं - थोड़े बड़े हो गए हैं .... अब वो 'साहेब' हो गए हैं .... 

खैर अब केजरीवाल मोदी को बहुत ही बुरा बुरा कहकर १० दिन के विपश्यना करने चले गए हैं .... यानि अगले १० दिन शांति की गारंटी .. और इसलिए मुझे लगता है - मोदी के पास ये स्वर्णिम समय है कि वो केजरीवाल से कैसे निपटें इस बारे में आँखें बंद कर सांस रोक पूरा ध्यान केंद्रित कर योग के सारे आसन आजमा कोई तोड़ निकालने की कोशिश कर लें .... क्योंकि इसके बाद शायद मौका नहीं मिले .... क्योंकि विपश्यना से आते ही केजरीवाल मोदी को पंजाब और पंजाबी में बहुत बुरा कहने वाले हैं .. और यकीनन दिल्ली से भी बुरा हाल करने वाले हैं ....

इसलिए मोदी जी को मैं बहती गंगा में हाथ धो लेने और अगले १० दिनी केजरी विपश्यना का पूरा लाभ लेने की मुफ्त सलाह देता हूँ .... और हाँ - मेरे ब्लॉग को भी १० दिन तक ना ही पढ़ें तो स्वास्थ्य के लिए और बेहतर होगा .... धन्यवाद !!!!

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Tuesday, 2 August 2016

// गर्भवतियों की जांच मुफ्त में ९ तारीख को .. पर सरकार भी गर्भवती हुई या नहीं ?? ..//


इतिहास गवाह है और मैंने खुद सुना था - रेडियो पर सुना था - और टीवी पर कई सुनते हुओं को देखा था जो भेरू होकर सामूहिक रूप से गौर से सुनने का प्रदर्शन कर रहे थे .. मोदीजी ने इतवार ३१/०७/१६ को 'मंकी बात' में कहा था - "गर्भवतियों की हर माह ९ तारीख को मुफ्त जांच" .... बिल्कुल नई नायाब लगने वाली सरकारी योजना - शुरूआती तालियों की हक़दार ....

पर मेरे दिमाग में एक प्रश्न कौंध रहा है कि - कोई गर्भवती है या नहीं इसकी जांच कब होगी ?? ....

मसलन ये मोदी सरकार का हनीमून पीरियड खल्लास हुए तो ज़माना बीत गया पर ये गर्भवती हुई कि नहीं ?? .. हुई तो कब कैसे ?? .. AK-49 ने तो कुछ गलत नहीं किया ?? .. और नहीं तो होगी भी कि नहीं ?? .. इन सब बातों का कब और कैसे पता चलेगा ?? .... इसकी जांच कौन सी तारीख को होगी ?? ....

और क्या गर्भवतियों की जांच से ये भी पता चलेगा कि 'ही' है या 'शी' या 'हीशी'' ?? .. और क्या जच्चा बच्चा दोनों ठीक हैं या नहीं ?? .. और क्या दोनों की जान बच जाएगी ?? ....

मसलन मोदी सरकार के गर्भ में 'विकास' है या 'दुर्दशा' - या कोई 'नक्सली' तो नहीं - और क्या प्रसव उपरांत दुर्दशा टिक पाएगी और मोदी सरकार बच जाएगी ?? ....

और मान लो यदि मोदी सरकार गर्भवती है तो क्या इसकी जांच भी ९ तारीख को होगी ?? ....

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Monday, 1 August 2016

// आमिर का नाम भले ही ना लिया हो - पर इस मंत्री का नाम मोहन पर्रिकर है ....//


एक है हमारे ऐसे मंत्री जो पहले गोवा के मुख्यमंत्री थे ....

और एक हैं आमिर खान .... जिन्होंने कभी असहिष्णुता की बहस के बीच खुल्लमखुल्ला नाम लेकर कहा था कि उनकी बीवी किरण राव अपना भारत देश यानि इंडिया छोड़ने पर विचार कर रही हैं .... और मंत्री के विपरीत आमिर खान किसी परिचय के मोहताज नहीं ....

तो गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री जो अभी ५६ इंची सरकार के रक्षा मंत्री भी हैं - उन्होंने भाजपाई स्तर का बयान दिया जिसका साफ़ मतलब था कि आमिर खान को सबक सिखा दिया गया था - और आगे भी जो आमिर कहाँ जैसा व्यवहार करेगा उसे भी सबक सिखा दिया जाएगा ....

इस पर संसद में मुद्दा उठाया गया और विपक्ष ने सीधा सवाल पूछ लिया कि भाई - कैसा सबक सिखाया था ?? .. और किसे और कैसा सबक सिखाया जाएगा ?? .... और हंगामा हो गया .. और फूंक निकल गई .... 

इसलिए इस पर उस बड़बोले मंत्री ने संभलते हुए कहा - मैंने किसी का नाम तो लिया ही नहीं था ....

मेरी प्रतिक्रिया ....

लगता है ये मंत्री नामर्द है जिसमें इतनी हिम्मत भी नहीं कि बोल सके कि हाँ मैंने आमिर के बारे में ही हेकड़ी भरी बातें बकी थीं .... बात यहाँ ख़त्म !!!!

और मालूम हो कि -  जो कभी गोवा के मुख्यमंत्री हुआ करते थे और अभी रक्षा मंत्री हैं - उनका नाम है मोहन पर्रिकर  - और वो बहुत बकवास करते रहते हैं ....

अब भक्त सोचें कि मैंने भी किसी का नाम लिया या नहीं लिया ?? .. हा ! हा !! हा !!! ....

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// मृत पशु और कचरा मैला अब कौन उठाएगा ?? .. सेवक चौकीदार या पोस्टमैन ?? ..//


बहुमुखी सर्वजन अनुपयोगी प्रतिभा के धनी हमारे नमो जी हमेशा बघारते रहते हैं .... हमेशा हरकतें करते रहते हैं .... मसलन गलियों में झाड़ू लगा चुके हैं - घाटों की सफाई कर चुके हैं - योग कर चुके हैं - झूला झूल चुके हैं - ड्रम बजा चुके हैं - शादी कर चुके हैं - घर से भाग चुके हैं - स्कूली पढ़ाई पूरी कर चुके हैं - दुनिया घूम चुके हैं - बिना छुट्टी वर्षों लगातार काम कर चुके हैं - एक दिन में कई चुनावी रैलियां कर चुके हैं - कई चुनाव जीत चुके हैं - कई चुनाव हरवा चुके हैं - नाना प्रकार के महँगे वस्त्र और टोपे धारण कर चुके हैं - हारे हुए टुच्चों को मंत्री बनवा चुके हैं - और जीते हुए काबिलों की छुट्टी कर चुके हैं - अपनी छाती ५६ इंच फुला चुके हैं - अपने कई विरोधियो को चित्त कर चुके हैं - और केजरीवाल से कई बार मात खा चुके हैं ....

और नमो जी कइयों के मित्र - भाई - सेवक - चौकीदार और रीसेंट में पोस्टमैन होने का दावा कर चुके हैं ....

पर वो इतना सब कुछ कर भी कभी प्रधानमंत्री हो जाने की दुर्घटना होने के कारण उनसे अपेक्षित कार्य करते नहीं दिखे .. गोया कि चुनांचे - वो स्वयं या भाजपा के लिए सब कुछ कर सकते हैं - पर प्रधानमंत्री का काम नहीं कर सकते .. क्योंकि उन्हें ये काम करते आता ही नहीं है ....

पर इस सत्य के कारण पूर्ण निराश होने की भी आवश्यकता नहीं है .. क्योंकि उनकी ये अद्भुत काबलियत भी देश के लिए लाभकारी हो सकती है ....

अब देखिये दलितों ने एक शानदार ऐतिहासिक स्वागतयोग्य बहुअपेक्षित निर्णय करा है कि वो आइंदा मृत पशुओं को और कचरा मैला उठाने का कार्य नहीं करेंगे .... 

मैं उपरोक्त निर्णय से बेहद खुश और आशान्वित हूँ और दलितों को बधाई देता हूँ .... क्योंकि मेरे हिसाब से ये एकमात्र संकल्प दलितों के उत्थान में सहायक होगा और कई बद-दिमाग लोगों के दिमाग ठिकाने लगाने में कारगर होगा ....

यह एक ऐसा निर्णय है जो देश की दशा और दिशा तय करेगा - और मोदी जी को धता बताते हुए मोदी जी के द्वारा दिए नारे 'सबका साथ सबका विकास' को सार्थक कर देगा .... क्योंकि वर्षों बाद दलित उनके द्वारा पीढ़ियों और सदियों से किये जाने वाले अत्यंत कठिन कार्य की अहम् महत्ता को समझेंगे - और समझेंगे कि सुनार जैसा कार्य तो फिर भी कोई कर लेगा पर मृत पशु और मैला उठाने का कार्य हर किसी के बस का नहीं .... उन्हें ये बात समझ पड़ेगी कि एक कार्यालय में सामान्य कार्य करने वाले के वेतन से भी अधिक वेतन या मेहनताना ऐसे कठिन कार्य करने वाले का होना चाहिए .... और उन्हें अपनी सर्वोच्च उपयोगिता का एहसास होगा ....

और इसलिए प्रश्न उठता है कि मृत पशु और कचरा मैला अब कौन उठाएगा ?? ....

और मेरा उत्तर है .. भक्त हैं ना - देशभक्त भी हैं ना - गौरक्षक तो हैं ही ना .. वो तमाम उपदेशक और प्रचारक और गुरु हैं ना जो बताते आए हैं - अपना कार्य स्वयं करो .. और कई हज़ारों विधायक और सांसद है ना जिनके दिल दिमाग में जनसेवा करने का जुनून ही समाया रहता है .... और फिर नमो जी तो हैं ही ना ?? .... इसलिए इस विषयक चिंता की कोई बात नहीं ....

पर मुझे चिंता एक बात की जरूर है - कि दलितों के निर्णय को कहीं बहला फुसला या दमन कर वापस लेने को मजबूर ना कर दिया जाए .... और कहीं ये ऐतिहासिक स्वर्णिम करवट बेकार ना चली जाए ....

इसलिए मैं आज दलितों से आह्वाहन करता हूँ कि अपने निर्णय पर अडिग रहें - अपने आत्मसम्मान को समझें - वो कठिन कार्य अब बाकी सब लोगों को भी करने के लिए मजबूर करें - और यदि वो कठिन कार्य करना ही चाहें तो उसकी भरपूर रकम वसूल कर अपनी और अपने परिवार की सामाजिक स्थिति को बेहतर और अन्य के समकक्ष लाएं .... और इस प्रकार मुख्यधारा में आकर पूरे देश के समग्र विकास को मूर्त रूप देने की कृपा करें .. यह देश आपका ऋणी रहेगा .. धन्यवाद !!!! जय हिन्द !!!!

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