Friday, 6 January 2017

//.. तेल देखो तेल की धार देखो - रूपए और मोदी के गिरते स्तर का हाल देखो ..//


आंकड़ों में अकड़े जकड़े भक्त जरा अकड़ छोड़ गौर फरमाएं : -

जुलाई   २०१३ - पेट्रोल ७०.४४ रूपए प्रति लीटर - कच्चा तेल ६१७० रूपए प्रति बैरल .. ..
जनवरी २०१७ - पेट्रोल ७०.६० रूपए प्रति लीटर - कच्चा तेल ३५९९ रूपए प्रति बैरल .. ..

और तब जो बड़बोले मोदी सौम्य मनमोहन सिंह को "मौनमोहन" बोले थे - वो बड़बोले हर विषय पर तो बड़-बड़बड़-बड़बड़ाते ही रहे - पर शर्म बेच खाने वाले काफी विषयों पर अब मौन हो चुके हैं .. ..

मसलन एक विषय और .. .. 

तब बड़बोले मोदी रूपए की गिरती कीमत पर उठते हुए उठ-उठ उचक-उचक बोले थे - "दिल्ली में बैठी सरकार और रूपए में होड़ लगी है कौन कितना गिरेगा" .. .. और कहा तो यहाँ तक भी गया था कि - "जैसे जैसे रुपया गिरता है वैसे वैसे देश की गरिमा गिरती है" .. .. 

और आज रुपया मोदीमय हो अपने सबसे निचले स्तर ६८.८० पर गिर चुका है .. .. और गिरे रूपए और गिरे मोदी का गिरना बिना किसी होड़ के जारी है .. ..

और नोटबंदी की शर्मनाक विफलता के बाद भी यदि लुटी पिटी जनता उद्वेलित ना हो मौन है - और भक्त स्तब्ध हो उचक रहे हैं - और बड़बोले बड़बड़ा ही रहे हैं - तो मेरे मन में भी एक प्रश्न तो खड़ा होता है कि - क्या लुटी पिटी जनता को बड़बोले मोदी अब भी पसंद हैं ?? .. ..

लेकिन विवेचना से मुझे एक बात तो स्पष्ट होती है कि .. या तो मैं बेवकूफ हूँ .. या फिर लुटी पिटी सहमी जनता बेवकूफ है .. या फिर ये बात सिरे से गलत है कि लुटी पिटी जनता बड़बोले मोदी को अब तक भी पसंद करती है .. ..

भक्तगण अपनी प्रतिक्रिया खुल कर दे सकते हैं ताकि इस बात का भी आंकलन कर पाऊं कि आखिर भक्तों का गिरता स्तर भी कहाँ तक गिरा - रूपए जितना ?? .. या फिर उनका गिरता मनोबल कहाँ तक फिसला - कच्चे तेल जितना ?? .. ..

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Wednesday, 4 January 2017

/.. ५ राज्यों में होने वाले चुनावों और फिर आगे के कई चुनावों के मद्देनज़र - 'मोदी कहाँ के ?? - इस विषयक मेरा एक आंकलन .. .. मोदी अब कभी भी 'गोवा वाले' या 'उत्तराखंड वाले' नहीं रहेंगे .. .. और उनके 'पंजाबी' होने का तो प्रश्न ही नहीं उठता .. .. मोदी अब से ८ मार्च तक 'यूपी वाले भैयन' रहेंगे .. .. और ८ मार्च के बाद गुजरात चुनाव तक मोदी 'ठेठ मूल गुजराती' हो जाएंगे .. .. और गुजरात चुनाव के बाद तो मोदी - कहीं के नहीं रहेंगे जनाब - कहीं के नहीं - समझ गए ना !!..../.... मेरे दिमाग की बातें - दिल से .. ब्रह्म प्रकाश दुआ


Tuesday, 3 January 2017

/.. मेरी मर्ज़ी !! .. मर्ज़ी ?? .. जी हाँ आप चाहें तो होटल में सर्विस चार्ज दें या ना दें .. यानि मोदी जी के राज में तो बस सब मर्ज़ी से ही चल रहा है .. लोगों ने मर्ज़ी से गैस की सब्सिडी छोड़ दी - और खुल्ले में शौच करना भी .. .. मोदी ने मर्ज़ी से ५००-१००० के नोट बंद कर दिए .. और कई लोग मर्ज़ी से घंटों बैंकों की लाइनों में खड़े रहे .. .. खैर कुछ बेवकूफ लोग मनमर्ज़ी करते रहते हैं .. मसलन होटल में सर्विस चार्ज मर्ज़ी से देने का प्रावधान कर देना - या अपना पैसा निकालने के लिए घंटों बिना किसी ठोस उचित प्रत्याशा में खड़े रहना - या बस यूं ही शौक के लिए या 'शौक' देने के लिए नोट बंद कर देना - मनमर्ज़ी के ही ताज़ा उदाहरण हैं .. .. पर मैं यह बात समझ नहीं पा रहा हूँ कि - नोटबंदी के ५० दिन पूरे होने उपरांत जो लोग मोदी को बुरा-बुरा कह रहे हैं वो मर्ज़ी से ऐसा कर रहे हैं या मजबूरी में ?? .. और होटल में मर्ज़ी से सर्विस चार्ज देने वाला और भाजपा को मर्ज़ी से वोट देने वाला बेवकूफ क्यों नहीं कहलाएगा ?? ..../.... मेरे दिमाग की बातें - दिल से .. ब्रह्म प्रकाश दुआ


Sunday, 1 January 2017

/.. कल परसों ५० दिन पूरे हुए थे .. और कई घोषणाएं ऐसे की गई थीं जैसे नोटबंदी के फलस्वरूप ही कोई सांता तोहफे बाँट रहा हो .. .. पर आज पेट्रोल डीजल महँगा कर दिया गया है .. तो क्या ये भी नोटबंदी के कारण ?? .. .. नहीं यार !! हर चीज़ को नोटबंदी से जोड़ देना उचित नहीं .. जैसे जो बैंकों की लाइन में खड़े मर गए वे कोई नोटबंदी के कारण थोड़े ही मरे थे - उन्हें तो मरना था सो मर गए .. ऐसे ही ये पेट्रोल डीजल के भाव तो बस यूं ही बढ़ने ही थे सो बढ़ गए - इसका भी मुई नोटबंदी से क्या लेना देना ?? .. .. नोटबंदी का तो सीधा-सादा लेना देना केवल मोदी से है और इसलिए देश के भविष्य से है .. .. नोटबंदी के कारण यदि मोदी परास्त होते हैं तो देश का सौभाग्य - और यदि नोटबंदी के कारण अच्छे परिणाम निकलते हैं तो भी देश का सौभाग्य .. यानि मुझे लगता है कि जबकि नोटबंदी के भयावह परिणाम भले ही स्पष्ट हों - देश के लिए तो ये हर हालत में सौभाग्यशाली ही साबित होगी .. है ना !! ..../.... मेरे दिमाग की बातें - दिल से .. ब्रह्म प्रकाश दुआ


// क्या फर्क पड़ता है - अखिलेश सफल और मोदी असफल क्यों - केजरी जीतेंगे क्यों ??...//


कुछ लोग और काफी भक्त कह रहे हैं कि अखिलेश और मुलायम का झगड़ा एक मिली जुली कुश्ती है - या फिर पुराने घाघ मुलायम की पुत्र अखिलेश को पुख्ता सत्तासीन करने की चाल - आदि !! ....

मेरी प्रतिक्रिया ....

क्या फर्क पड़ता है ?? .. अखिलेश अपने दमखम पर सफल हो रहे हैं या - अपनी या अपने बाप की राजनीतिक चालबाज़ी या दांवपेंच के बल पर .. मुख्य बात तो यही है ना कि अखिलेश सफल हो रहे हैं ....

ठीक वैसे ही जैसे क्या फर्क पड़ता है ?? .. मोदी भी अपने दमखम पर - या फिर अपनी या अपने आकाओं की राजनीतिक या व्यावसायिक चालबाज़ी या दांवपेंच के कारण आज सत्ता के शीर्ष पर बैठे हैं या बैठाए गए हैं .. और मुख्य बात तो बस यही है ना कि देश की ऐसी की तैसी हो रही है ....

और क्या फर्क पड़ता है कि नोटबंदी का फैसला मोदी ने अच्छी नीयत से लिया या बेवकूफी में - फायदा तो कुछ हुआ नहीं ना .. और नुकसान भरपल्ले ही पूरा देश भुगत रहा है कि नहीं ?? ....

और क्या फर्क पड़ता है कि नोटबंदी के ५० दिन बीत जाने के बाद भी मोदी ने अपने आप को किसी चौराहे पर उपलब्ध कराया हो या नहीं .. उनकी आलोचना तो फिर भी हर चौराहे पर हो ही रही है कि नहीं ....

और क्या फर्क पड़ता है कि पंजाब में अकाली भाजपा की नोटबंदी के कारण हारते हैं या भाजपाई नशा-नशाई अकालियों के कारण - या कांग्रेस कप्तान के कारण या खुद के बोझ तले - मुख्य बात तो यही है ना कि पंजाब में केजरीवाल जीत रहे हैं .. और वो भी अपने दमखम पर ....

मेरा निष्कर्ष .. ..

राजनीति में परिणाम बहुत मायने रखते हैं - और परिणाम दमखम से ही मिलते हैं - और यदि दमखम स्वयं का ना हो तो फिर परिणाम बहुत बुरे भी निकलते हैं .. .. समझे !! ....

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/.. और अंततः .. अखिलेश ने अपने आपको समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित करवा अपने पिताश्री आदरणीय माननीय मुलायम सिंह जी को मार्गदर्शक के रूप में सम्मानजनक संरक्षक के पद पर ला पटका .. .. आज मुलायम सिंह यादव भी लालकृष्ण आडवाणी और अन्ना हज़ारे की लाइन में लग गए .. शायद इसलिए कि सही समय सही को सही कहने और सही का साथ देने की हिम्मत ना जुटा पाए .... और गलत को गलत कह गलत का विरोध नहीं कर पाए ..../.... मेरे दिमाग की बातें - दिल से .. ब्रह्म प्रकाश दुआ