Thursday, 6 April 2017

/.. जागो गौरक्षक भक्तों जागो !! ..

गौरक्षा के नाम पर गुंडों ने अलवर राजस्थान में एक मासूम को पीट-पीट कर मौत के घाट उतार दिया  .. ..
और मैं बहुत विचलित हो सोच रहा हूँ कि ये ह्रदय विदारक कुकृत्य जिन गौरक्षक गुंडों ने किया होगा कहीं ये गुंडे उन्हीं गौरक्षक टोलों में से ८०% गुंडों में से ही तो नहीं जिनके 'डोज़ियर' राजस्थान के मुख्यमंत्री ने देश के प्रधानमंत्री के दिशानिर्देशों के परिपालन में बनाए ही होंगे ?? .. ..
या फिर ये कोई नई प्रजाति के गुंडे तो नहीं जो गौरक्षा के नाम पर हत्याएं भी कर रहे हैं और शायद 'मोदी मोदी मोदी' भी .. और ऐसा करके कहीं ये हमारे यशस्वी लोकप्रिय प्रधानमंत्री की इज़्ज़त की वाट लगाने और उन्हें शर्मिंदा करने का सफल प्रयास तो नहीं कर रहे ?? .. ..
जागो गौरक्षक भक्तों जागो !! .. गौरक्षा के नाम पर ना सही - 'मोदी मोदी मोदी' की रक्षा के नाम पर ही सही .. .. है ना !! ..../

मेरे दिमाग की बातें - दिल से .. ब्रह्म प्रकाश दुआ

// '१३२' और '३७' पर '५' बहुत भारी .. आखिर क्यों ?? ....//


आज बीजेपी का ३७ वां स्थापना दिवस है .. ..

कांग्रेस सन १८८५ में स्थापित हुई थी - यानि १३२ वर्ष पूर्व - और १३२ में से ६२ वर्षों तक देश को आज़ाद कराने के लिए खपने के बाद लगभग ७० साल से स्वतन्त्र भारत की सत्ता में काबिज़ रही - और मजे में रही .. .. और बकौल भाजपा कांग्रेस ने देश का बेड़ा गर्क किया और बहुत भ्रष्टाचार किया .. ..

और भाजपा को आज वाली पप्पू की कांग्रेस को उखाड़ने में - और सत्ता में स्वयं मजे करने की स्थिति में आने में - लगभग ३४ साल खपाने पड़े .. जी हाँ ३४ साल !! .. ..

और 'आप' २०१२ में स्थापित हुई - यानि मात्र ५ वर्ष पूर्व .. ..

उपरोक्त तथ्यों से स्थापित होता है कि .. ..

७० साल से देश का बेडा गर्क कर रही कांग्रेस पार्टी को उखाड़ने में सूरमाओं से पटी भरी ठुंसी लदी भाजपा ३४ साल तो नाकाम रही - यकीनन क्योंकि भाजपा स्वयं भी तो कांग्रेस जैसी ही है .. और अब तो ठप्पे-ठपके के साथ कांग्रेस-युक्त भी .. है ना !! .. ..

और 'आप' पार्टी के उदय के साथ ही उसने कांग्रेस और भाजपा दोनों को ही तगड़े झटके दे मारे .. इतने तगड़े झटके कि कांग्रेस का तो अस्त शुरू हो गया - और भाजपा को स्वयं को बचाने हेतु एड़ी - चोटी का दम लगाना पड़ गया .. और 'केजरीवाल' नाम की नंगी खनकती तलवार उसके ऊपर शुरू से ही लटकी हुई है - और उसे आज भी भयभीत आतंकित और भेरू किये हुए है .. ..

और ऐसा यकीनन इसलिये ही हो पाया है क्योंकि 'आप' निश्चित रूप से कांग्रेस-भाजपा से आमूलचूल रूप से भिन्न है .. और 'आप' का तो स्वरूप ही क्रांतिकारी है - जो इसे इतने कम समय में कुछ अद्भुत और अलग करने की शक्ति प्रदान कर पाया है .. और साथ ही संपूर्ण विरोधी सत्ता तंत्र को 'आप' के विरुद्ध अनैतिक निम्नस्तरीय हरकतें और सत्ता का दुरूपयोग करने के लिए मजबूर कर पाया है .. और भक्तों को कलपने कुढ़ने डरने और गालियां देने पर भी मजबूर कर पाया है .. ..

और यही वो कारण हैं कि क्यों - '१३२' और '३७' पर '५' बहुत भारी है .. .. !! जय हिन्द !!

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Wednesday, 5 April 2017

// जेठमलानी को भुगतान करें या नहीं - भक्त और उपराज्यपाल कन्फ्यूज्ड क्यों ? ..//


ये कौन 'फड़तूस भक्त' हैं जो कह रहे हैं कि केजरीवाल सरकार ने जनता के पैसे से वकील राम जेठमलानी को केजरीवाल जेटली मानहानि मुकद्दमें में कोई भुगतान कर दिया है .. और जनहित देशहित के नाम पर केजरीवाल और केजरीवाल सरकार को गालियां बक रहे हैं .. जबकि वस्तुस्थिति तो यह है कि अभी कोई भुगतान हुआ नहीं है .. राम जेठमलानी ने एक शानदार कानूनी पैंतरा भर फेंका है जो भक्तों की छोटी सी समझ के बाहर है .. और भक्तों के जैसे ही उपराज्यपाल कन्फ्यूज्ड हैं - इसलिए उन्होंने प्रकरण में कानूनी राय मांगी है .. ..
तो यदि भुगतान नहीं होता है तो फिर ये स्थापित हो जाएगा कि मुकद्दमा जेटली और केजरीवाल के बीच है .. और यदि भुगतान हो जाता है तो तय हो जाएगा कि मुक़द्दमा जेटली और दिल्ली सरकार के माननीय मुख्यमंत्री श्री अरविन्द केजरीवाल के बीच है .. ..
और यदि भुगतान हो जाता है तो समस्त 'फड़तूस भक्त' यदि चाहें तो उपराज्यपाल और जेटली को चाहे जितनी गालियाँ निकाल सकते हैं .. .. 
और यदि भुगतान नहीं होता है तो फिर तो प्रकरण की दिशा भी बदल सकती है - और बदल तो क्या उलट सलट भी हो सकती है .. और ऐसी स्थिति में 'फड़तूस भक्त' यदि चाहें तो राम जेठमलानी और केजरीवाल को चाहे जितनी गालियां निकाल सकते हैं .. ..
तो इसलिए गालियां देने वाले 'फड़तूस भक्तों' को मेरी समझाइश .. राम जेठमलानी एक काबिल वकील हैं .. केजरीवाल एक अक्लमंद क्रांतिकारी निडर नेता हैं .. इसलिए गालियों की लिस्ट तैयार रखो और इंतज़ार करो इंतज़ार !! .. समझे 'फड़तूस भक्तो' !!

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Tuesday, 4 April 2017

/.. योगी !! योगी !! योगी !! .. यूपी की योगी सरकार ने किसान कर्ज माफ़ी के वायदे को पूरा कर दिया ..

/.. योगी !! योगी !! योगी !! .. यूपी की योगी सरकार ने मोदी द्वारा किसान कर्ज माफ़ी के बड़े वायदे को तमाम शंकाओं और अटकलों के बावजूद पूरा कर दिया .. फैसले के गुण-दोष पर सार्थक या व्यर्थ चर्चा तो होती रहेगी - पर योगी जी को मोदी का वायदा पूर्ण करने हेतु बधाई !! .. ..
केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद भले ही मोदी का खुद का रिकॉर्ड दयनीय ही बना हुआ है - पर किसी भी भाजपा प्रदेश सरकार द्वारा ये पहला चुनावी वायदा है जो पूरा किया गया है .. और इसलिए योगी सरकार का इक़बाल निश्चित ही बढ़ेगा .. ..
और अब अपेक्षा की जा सकती है कि इस बहुत बड़ी कर्ज माफ़ी के साथ भाजपा द्वारा सब्सिडी आदि के विरुद्ध दिए जाते रहे और दिए जा रहे वक्तव्यों के लिए थोड़ा शर्म का इज़हार भी कर देना उचित होगा .. और हाँ ये दिल्ली में बिजली पानी बिलों में माफ़ी के बाद १००% हाउस टैक्स माफ़ी की भी दिल पर पत्थर रख सराहना की जानी होगी .. पर ऐसा होगा लगता नहीं .. क्योंकि केंद्र में तो मोदी हैं - योगी नहीं .. और दिल्ली में केजरीवाल हैं - कोई ऐरे गैरे भाजपाई नहीं .. .. समझे कंफ्यूज़ड भक्तो !!

मेरे दिमाग की बातें - दिल से .. ब्रह्म प्रकाश दुआ
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// केजरीवाल के इर्द-गिर्द वकीलों की फीस का मामला जनहित में एक और नज़ीर बनेगा ..//


केजरीवाल ने अरुण जेटली की मानहानि करी तो जेटली ने क्या करा .. न्याय के प्रावधानों अनुसार केजरीवाल के ऊपर मुक़द्दमा कर दिया ना !! .. अब केजरीवाल की तरफ से वकील राम जेठमलानी न्यायलय में पैरवी कर रहे हैं .. और जेठमलानी ने दिल्ली सरकार को अपना बिल भेज दिया .. और केजरीवाल सरकार ने बिल भुगतान हेतु प्रकरण उपराज्यपाल को भेज दिया .. अब उपराज्यपाल को यदि भुगतान नियमानुसार लगेगा तो भुगतान कर दिया जाएगा .. अन्यथा नहीं .. ठीक वैसे ही जैसे उपराज्यपाल ने लोकपाल बिल या विधायकों के वेतन संबंधित बिल में अपने अधिकारों और विवेक या अविवेक से निर्णय किया .. .. है ना ?? .. ..

तो अब बताएँ कि मुद्दे पर इतनी हायतौबा क्यों ?? .. जनता के पैसे के दुरूपयोग पर छातियों की दे कुटाई पे कुटाई क्यों ?? .. क्या उपराज्यपाल ये बिल जनता के पैसे से पास कर देंगे ?? .. क्या केंद्र द्वारा नियुक्त उपराज्पाल इतने बेवकूफ या बेकार हैं ?? .. या फिर एमसीडी चुनाव पूर्व ये मुद्दा उछाल कर अपने-अपने हित साधने हैं ?? .. .. या फिर क्या डर इसलिए है कि पूर्व में ऐसा ही होता आया है ?? ?? ?? ?? .. ..

हाँ !! जी हाँ !! .. ऐसा तो होता ही आया है .. जनता के खजाने से सरकारी वकीलों को करोड़ों के भुगतान का ये पहला मामला तो है नहीं .. पर क्योंकि ये मामला केजरीवाल के इर्द गिर्द चल रहा है तो मान के चलिएगा - ये जनहित में अभी बहुत कुछ उगलेगा .. ये बहुत लोगों और टुच्चों को सालेगा .. ये फिर से एक नज़ीर बनेगा .. ये निश्चित ही मील का पत्थर साबित होगा !! .. ..

इसलिए भक्तो देशहित में उछल कूद जारी रखें और दिल्ली के उपराज्पाल को मजबूर करें कि जनता के धन की बर्बादी की ज़ुर्रत नहीं करें .. .. और आगे क्या होगा इसके लिए सीमित अक्ल की फ़िज़ूलख़र्ची ना करें तो ही बेहतर .. अन्यथा फ़ोकट टेंशन पाल लोगे .. हा !! हा !! हा !!  .. ..

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// 'तलाक तलाक तलाक' के अन्य बेहतर विकल्प .. बस सन्यास ले निकल लो गुरु !! ....//


ऐसे ही दिमाग में आया कि 'तलाक तलाक तलाक' के बजाय 'मोदी मोदी मोदी' बोलो और निकल लो .. कोई क्या उखाड़ लेगा ?? .. तलाक लेना-देना तो दूर की कौड़ी - गुजारा भत्ता तक नहीं देना पड़ेगा .. ..

पर अब तक ये नहीं समझ पड़ी कि भक्तों द्वारा 'तलाक तलाक तलाक' का इतना उचित विरोध क्यों और ये 'मोदी मोदी मोदी' का इतना अनुचित समर्थन क्यों ?? .. ..

क्या हुआ उन  श्लोकतुल्य परउपदेशी  पेलमपेल डायलॉग्स का .. "जिनके मकान शीशे के .." - "१ उंगल दिखाओगे तो ३ अपनी तरफ .." ?? .. ..

और अब तो एक और बात दिमाग में आ रही है कि - आत्मा परमात्मा की उधेड़बुन में फंसते हुए जीव कल्याण का ठेका ले सहूलियत अनुसार अघोषित भोगों से सन्यास ले सन्यासी साधू योगी बनकर भी निकल लो तो कोई क्या उखाड़ लेगा ?? .. और कोई उखाड़े भी तो फिर कौन सन्यास या संसार या सांसारिक वस्तुएं ही छोड़नी पड़ती हैं जो समस्त उखाड़ने वालों को गाड़ा ना जा सके ?? .. ..

बल्कि यदि संत गुरु सन्यासी साधू योगी का ठप्पा लग गया तो फिर तो किसी न्यायालय की भी क्या मजाल कि कहे कि नहीं आपको ग्रहस्थ जीवन का पूर्ण निष्ठा से क्रियान्वयन एवं निर्वहन करना ही पड़ेगा ?? .. ..

तो भक्तों आज दिन भर घर बैठ के योग साधना ध्यान कर विचार मंथन करें .. पर सावधान !! .. ध्यान रहे - कहीं सन्यास ले निकल मत लेना .. क्योंकि ये आपके परिवार समाज राष्ट्र के लिए हानिकारक भी हो सकता है .. समझे !! .. .. धन्यवाद !!

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Monday, 3 April 2017

/.. चुनाव 'जीतना' या 'हराना' - क्या आसान क्या मुश्किल ?? .. ..


मित्रो एक और शुद्ध मर्म की बात .. ..
देश में चुनाव 'जीतना' बहुत आसान हो गया है .. बाहुबल धनबल से सत्ताबल अर्जित करने की विधा - और - सत्ताबल के मार्फ़त धनबल बाहुबल से चुनाव जीतने की विधा - अभेद्य अजेय हो चली है .. बड़े आराम से .. ..
इसलिए चुनाव में 'हराना' बहुत मुश्किल हो गया है .. पर हाँ !! अब भी नामुमकिन नहीं .. विशेषकर किसी क्रांतिकारी के लिए बहुत मुश्किल भी नहीं .. ..
पर क्योंकि इधर चुनाव आयोग पंगु होते जा रहा है .. ..
और चुनाव जीतने वाला खुदा होते जा रहा है .. ..
इसलिए ये भी लगता है कि अब तो खुदा ही खैर करे तो करे .. ../

मेरे दिमाग की बातें - दिल से .. ब्रह्म प्रकाश दुआ