Sunday, 14 May 2017

/.. एक भक्त मित्र से फ़ोन पर हुई दिलचस्प और उसके दिल को चेपने वाली बहस के दौरान मेरे द्वारा उससे पूछे गए एक अनुत्तरित प्रश्न को मैं सार्वजनिक कर रहा हूँ .. ..

प्रश्न था - "यदि केजरीवाल समस्त मीडिया के समक्ष ये कह देते कि - "मोदी जी !! आज शाम तक अपनी डिग्री दिखाओ नहीं तो कॉलर पकड़ कुर्सी से घसीट तिहाड़ जेल में डाल दूंगा" - तो क्या दिल्ली पुलिस हरकत में आती कि नहीं ??" .. ..

प्रश्न सार्वजनिक करने का मेरा मकसद जवाब हासिल करना नहीं है - वरन भक्तों को धिक्कारना है .. कोई आपत्ति ?? .. ../

मेरे दिमाग की बातें - दिल से .. ब्रह्म प्रकाश दुआ
/.. आज कपिल मिश्रा ने सिद्ध कर दिया कि मोदी के सारे 'तोते' 'मैना' 'गधे' 'घोड़े' 'उल्लू' और तमाम न्यायालय और 'ईवीएम मास्टर चुनाव आयोग' और मोदी और मोदी सरकार और कांग्रेस और कोंग्रेसी सभी केजरीवाल के भ्रष्टाचार को पकड़ने या उजागर करने या सिद्ध करने में नाकामयाब रहे हैं .. और अब देश को केवल बेहोश हो गए कपिल मिश्रा से ही आशा है जो केजरीवाल को आज शाम तक कालर पकड़कर कुर्सी से खींच कर तिहाड़ जेल में डालेंगे .. ..
मैं मज़े में हूँ - खुश हूँ - निश्चिन्त हूँ - और प्रार्थना और आशा करता हूँ कि कपिल मिश्रा दीर्घायु हो ऐसे ही कृत्य पूरे विश्वास के साथ करते रहे .. ..
और आज मैं केजरीवाल को सपोर्ट करने के लिए एक बार पुनः संतुष्ट और गौरवान्वित भी हूँ .. ..
वैसे भक्त चाहें तो आज शाम तक का इंतज़ार कर सकते हैं .. जब केजरीवाल तिहाड़ में होंगे और मोदी अकर्मण्य साबित होंगे .. .. हा !! हा !! हा !! .. ../

मेरे दिमाग की बातें - दिल से .. ब्रह्म प्रकाश दुआ

Saturday, 13 May 2017

/.. ईवीएम चकल्लस रुपी मंथन से जो एक अच्छी बात निकल कर आई है वो यह है कि भक्तों को समझ पड़ गई होगी कि - बिना छुए रिमोट से कई काम नहीं भी हो सकते .. मसलन आप हमेशा चुनाव नहीं जीत सकते .. और विकास तो कभी भी पैदा नहीं कर सकते .. .. चैलेंज !! .. ..
और यह भी कि अगर केजरी ने तुम्हारे अधीन माल को छू भर दिया ना तो तुम्हारी तो वॉट लग जाएगी .. .. है ना छुईय्यों-मुईय्यों !! ..../

मेरे दिमाग की बातें - दिल से .. ब्रह्म प्रकाश दुआ

// बूचड़खाने चालू करने के आदेश - अब आजम खान की बात का क्या होगा ?? ..//


इलाहबाद उच्च न्यायलय ने सभी पुराने बूचड़खानों के लाइसेंस रिन्यू करने और नए बूचड़खानों के लिए लाइसेंस जारी करने के आदेश यूपी की योगी सरकार को दे दिए हैं .. ..

और मैं परेशान हूँ कि अब देश के हिंदूवादी जैसे नेता श्रीमान आजम खान साहेब द्वारा पूर्व में दिए गए निम्नलिखित प्रवचनों का क्या होगा ?? .. ..

" पूरे देश में बूचड़खाने बंद होने चाहिए .. आखिर वैध या अवैध क्या होता है ?? .. जानवरों को वैध बूचड़खानों में बलि देना सही है और अगर बूचड़खाना अवैध है तो वहां जानवरों की बलि देना गलत है ?? .. किसी को भी मारना नहीं चाहिए .. गो-हत्या पर बैन केवल एक राज्य में नहीं बल्कि पूरे देश में लगना चाहिए .. किसी एक राज्य के लिए एक नियम दूसरे राज्य के लिए दूसरा नियम नहीं होना चाहिए .. सभी बूचड़खानों को बैन करना चहिए - जिससे किसी भी जानवर की बलि नहीं दी जा सके .. लोगों से अपील है कि उन्हें मीट खाना बंद कर देना चाहिए " .. ..

तो क्या आजम खान या समाजवादी पार्टी न्यायालय के आदेशों के विरोध में कोई आंदोलन करेंगे और बूचड़खाने नहीं खुलने देने की बात कहेंगे ?? .. या योगी जी बूचड़खाने चालू करवा देंगे - बड़े आराम से !! .. .. 

भक्तों मेरी बात आपको कुछ उल्टी-पुल्टी सी लग रही है ना ?? .. .. ॐ शांति ॐ शांति .. ..!!

मेरे दिमाग की बातें - दिल से .. ब्रह्म प्रकाश दुआ

// अब तो देखने वाली बात ये है कि केजरी जवाब देते हैं या भारत जैसे चुप रहते हैं ?? ..//


पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में एक बार फिर युद्ध विराम तोडा - आज शनिवार सुबह ७:१५ बजे से फिर भारी गोलाबारी जारी .. २ नागरिकों की मौत - ३ घायल .. ..
इसके पहले शुक्रवार की सुबह भी जम्मू-कश्मीर के अरनिया सेक्टर में युद्ध विराम का उल्‍लंघन किया गया था .. ..
और इससे पहले भी पाकिस्तान ने गुरुवार को नौशेरा सेक्टर में युद्ध विराम का उल्लंघन कर फायरिंग की थी जिसमें एक महिला की मृत्यु हो गई थी .. ..

पाकिस्तान मई माह के दौरान करीब १० बार युद्ध विराम का उल्लंघन कर चुका है .. यानि पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आ रहा है .. ..

आज शनिवार १३ मई है .. कपिल मिश्रा के सत्याग्रह का चौथा दिन .. और कपिल तथा भक्त तथा मोदिया बहुत दुखी हैं क्योंकि उनके अनुसार केजरीवाल चुप हैं - अब तक कोई जवाब नहीं .. ..

तो अब आगे देखने की महत्वपूर्ण बात ये है कि आज कपिल मिश्रा क्या करते हैं ?? .. और केजरीवाल जवाब देते हैं या भारत जैसे चुप रहते हैं ?? .. है ना भक्तों ?? .. तो बोलो तो .. जय हिन्द !! .. ..

मेरे दिमाग की बातें - दिल से .. ब्रह्म प्रकाश दुआ

Friday, 12 May 2017

// ईवीएम भरोसे अब एक और संस्था की व्यवस्था में सुधार का श्रेय केजरीवाल को ..//


ईवीएम पर अब तक की चकल्लस से मुझे ऐसा विश्वास हो रहा है कि चुनाव आयोग ने बहुत विलंब से ही सही और दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से ही सही देश को ये विश्वास दिलाने का प्रयास किया है कि ईवीएम मशीन में गड़बड़ नहीं की जा सकती है .. और प्रयास सफल भी हुआ है - और व्यक्तिगत रूप से मुझे भी ऐसा विश्वास हो गया है कि .. ..

यदि मशीनों को छुआ ना जाए तो मशीनों में गड़बड़ी नहीं की जा सकती ..
और यह भी कि मशीनों को छूने की छूट हो तो मशीनों में गड़बड़ी की जा सकती है ..
और यह भी कि मशीनों को हर कोई आसानी से छू भी नहीं सकता ..
और यह भी कि मशीनों को इस देश का भ्रष्टाचारी छू भी सकता है और इसलिए मशीनों में गड़बड़ी की संभावनाओं को सिरे से नकारा भी नहीं जा सकता ..
और मशीनों में गड़बड़ी व्यापक स्तर पर होना लगभग असंभव ही है .. पर छुटपुट गड़बड़ी ना की गई हो ऐसा होना भी लगभग असंभव ही है .. ..

और चुनाव आयोग के आज के प्रयासों के लिए मैं केजरीवाल जी को धन्यवाद देता हूँ जिनके प्रयासों के कारण चुनाव आयोग को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने पर मजबूर होना पड़ा .. ..

और आगे यही अपेक्षा करूंगा कि चुनाव आयोग केजरीवाल से बिना चिढ़े-कुढ़े बल्कि उनके प्रति कृतज्ञ हो उन्हें सहजता के साथ मशीनों में गड़बड़ करने की संभावनाओं को परखने हेतु पूरा सहयोग करे और उनसे इस हेतु पूरे प्रयास करने की प्रार्थना करे - ताकि देशहित में गड़बड़ी होने की तनिक संभावनाओं पर १००% विराम लग सके .. ..

यानि चुनाव आयोग का रवैय्या ऐसा होना 'चाइये' कि वो ये विश्वास ना कर ले कि मशीनों से गड़बड़ नहीं हो सकती - बल्कि उस हर संभावनाओं को टटोलने का प्रयास करे जिसमें यदि कोई गड़बड़ी होने की गुंजाइश हो तो वो सामने आ सके .. ..

और मैं केजरीवाल जी को इस बात के लिए भी बधाई और धन्यवाद दूंगा कि आखिरकार उनके प्रयासों से ही अकर्मण्य चुनाव आयोग को उच्चत्तम न्यायालय के निर्देशों का परिपालन करने की आगे से घोषणा करनी पड़ी है - जिसके फलस्वरूप अब अकर्मण्य और घटिया जिम्मेदारों द्वारा आगे से वोटिंग मशीन के साथ पर्ची वाली मशीन भी अनिवार्यतः लगानी होगी जिससे लोगों का निष्पक्ष चुनाव होने पर विश्वास और बढ़ेगा .. यानि अब एक और संस्था की व्यवस्था में सुधार का श्रेय भी केजरीवाल ले सकते हैं .. ..

और भक्तों को सलाह दूंगा कि कोई सा भी बटन दबाना कोई कला नहीं - पर कब और कौनसा बटन दबाना कला भी है और विज्ञान भी .. जिसमें अक्ल लगती है .. समझे !!

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// जी हां !! केजरी का विरोधियों से इस्तीफ़ा माँगना और खुद इस्तीफ़ा नहीं देना सही है ..//


एक तर्क .. जब दूसरों पर केजरीवाल आरोप लगाते थे तो कहते थे अगर बेकसूर हैं तो इस्तीफा दें और खुद को बेकसूर साबित करें .. आज केजरीवाल के खुद के साथी केबिनेट में मंत्री रहे कपिल मिश्रा ने जब उन पर आरोप लगाए हैं तो उन्हें भी इस्तीफ़ा दे देना चाहिए और जाँच होने के बाद अगर बेकसूर साबित होते हैं तभी वापस पद पर लौटना चाहिए .. ..

और तर्क के विरुद्ध मेरी प्रतिक्रिया मेरे तर्कों के साथ .. ..

उस वक़्त भी केजरीवाल द्वारा आरोपित ढेर सारे नेताओं में से किसी भी नेता ने इस्तीफ़ा नहीं दिया था .. और ना ही केजरीवाल द्वारा आरोपित कोई भी नेता आज या कल इस्तीफ़ा देगा .. और आज या कल केजरीवाल भी इस्तीफ़ा नहीं दे रहे हैं .. हिसाब बराबर !! .. ..

लेकिन फिर प्रश्न उठता है कि केजरीवाल और अन्य में अंतर क्या ?? .. और ये प्रश्न भक्तों द्वारा फुदक-फुदक बिना शर्म उठाना स्वाभाविक ही है .. ..

अब यदि किसी को केजरीवाल और अन्य में अंतर होते हुए भी अंतर नहीं लगता हो तो फिर ऐसे भक्तों से तो मेरा भी एक चुभने वाला प्रश्न है कि - फिर राहुल-सोनिया या मोदी ही क्यों - कांग्रेस या भाजपा ही क्यों - केजरीवाल या 'आप' क्यों नहीं ?? .. अरे भाई वर्षों कांग्रेस भाजपा को खाने पीने लूटने दिया है तो फिर कुछ वर्ष 'आप' को भी मौक़ा क्यों ना दिया जाए ?? .. क्या भ्रष्टाचार करना केवल कांग्रेस या भाजपा की बपौती है ?? .. मैं आशा करता हूँ कि ये प्रश्न भक्तों को जरूर चुभेगा और उचकाएगा .. ..

पर यदि किसी को केजरीवाल और अन्य में अंतर लगता है तो फिर तो उसके लिए मुद्दा ही सुलझ जाता है .. मसलन मुझे केजरीवाल और अन्य में एक नहीं बहुत बड़े-बड़े अंतर दिखते हैं .. और सबसे बड़ा अंतर यह है कि केजरीवाल ने उस वक्त जितने भी आरोप लगाए थे वे सभी आरोप विभिन्न जांच या अन्य एजेंसियों के द्वारा उजागर किये गए आधिकारिक आपत्तियों या उद्घोषणाओं या कार्यवाही पर आधारित थे - और सभी आरोप किसी एक व्यक्ति के खिलाफ ना होते हुए अनेक दिग्गज व्यक्तियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक मुहीम के तहत लगाए गए आरोप थे .. लेकिन केजरीवाल के विरुद्ध अब तक जितने भी आरोप लगे हैं वे सभी आरोप अनेक व्यक्तियों के द्वारा एक केजरीवाल के विरुद्ध व्यक्तिगत भड़ास निकालने हेतु और केजरीवाल और उनकी 'आप' पार्टी को बदनाम करने या फंसाने के मकसद से ही लगाए गए सिद्ध होते हैं .. मसलन कपिल मिश्रा के आरोप केवल और केवल केजरीवाल के विरुद्ध हैं जो कपिल की व्यक्तिगत भड़ास निकालने के मकसद से ओतप्रोत दिखते हैं .. और मैं मानता हूँ कि ऐसे आरोपों को भ्रष्टाचार के विरुद्ध मानना अपने आप में भ्रष्टाचार करने से कम नहीं माना जा सकता .. ..

एक बात और - केजरीवाल के तमाम ताकतवर विरोधी ही नहीं बल्कि उनके ढेर सारे मौकापरस्त संगीन संगी साथी भी सब मिलजुल कर उनके ऊपर लगातार ढेर सारे आरोप लगाते रहने के बावजूद उन्हें झुका नहीं सके हैं .. और उनके सारे विरोधी और साथी ऐन-केन-प्रकारेण उन्हें निपटाने के अथक भरपूर असफल प्रयास करते दिख रहे हैं .. और आरोप हैं कि सही निकलने का नाम ही नहीं लेते .. और ऐसी स्थिति में यदि केजरीवाल इस्तीफ़ा दे देते हैं तो ये उनके विरोधियों को बैठे-बैठाए जीत परोसने जैसी बात हो जाएगी .. क्योंकि वो झुकते नज़र आएँगे .. ..

और हाँ एक और मज़े की बात है .. जब केजरीवाल कोंग्रेसियों पर आरोप लगाते है तो भाजपाई भी आरोपों का समर्थन नहीं कर विरोध केजरीवाल का ही करते हैं .. जब केजरीवाल भाजपाइयों पर आरोप लगाते हैं तो कोंग्रेसी भी आरोपों का समर्थन ना कर विरोध केजरीवाल का ही करते हैं .. पर जब कोई भी कोंग्रेसी या भाजपाई या कोई अन्य ही केजरीवाल पर आरोप लगाता है तो सब टनटनाट हो जाते हैं - मानो करंट दौड़ गया हो .. ..

और वैसे कोंग्रेसी और भाजपाई एक दुसरे पर आरोप लगाते ही रहे हैं और लगा रहे हैं - पर उन आरोपों को आरोपों तक ही सीमित रख उन आरोपों पर किसी भी प्रकार की कार्यवाही रोकने की भरपूर पुख्ता जुगाड़ करते भी दिखते हैं .. और स्पष्ट नज़र आता है कि ये दोनों मुख्य पार्टियां आपस में मिली हुई हैं और इनके परस्पर आरोप केवल आरोप ही होते हैं .. और नतीजा यह है कि ना खाऊंगा ना खाने दूंगा वाले के रहते एक भी बड़े से बड़ा या फिर टुच्चा सा ही आरोप अब तक अपने अंजाम तक नहीं पहुंचा है - और जम के खाना पीना निगलना डकारना हगना सब धड़ल्ले और बेशर्मी से चल रहा है .. ..

इसलिए मैं केजरीवाल और अन्य में अंतर को महसूस करते हुए केजरीवाल के द्वारा इस्तीफ़ा मांगने का भी समर्थन करता हूँ और उनके द्वारा इस्तीफ़ा नहीं देने का भी .. कोई आपत्ति ?? .. यदि कोई आपत्ति हो तो फिर कर लो जो करते बने .. मैदान खुल्ला है - और केजरीवाल भी छुट्टा खुल्ला है .. समझे ?? .. हा !! हा !! हा !! .. !! जय हिन्द !!

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