Friday, 11 August 2017

// कोई भी "भाई का लाल" भक्त जवाब देगा ?? .. ..//


गुजरात राज्यसभा चुनाव निपट गए .. परिणाम आ गए .. ..
मेरा चैलेंज .. कोई भी "भाई का लाल" भक्त जवाब देगा कि .. ..
तड़ीपार जीता या हारा ?? .. ..

राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति चुनाव भी निपट गए .. भाजपाई चुन लिए गए .. ..
मेरा चैलेंज .. कोई भी "भाई का लाल" भक्त जवाब देगा कि .. ..
जैसे हामिद अंसारी बोले - क्या वैसे कोविंद और वेंकैय्या जी कभी नहीं बोलेंगे ?? .. ..

चीन गर्रा रहा है .. ..
मेरा चैलेंज .. कोई भी "भाई का लाल" भक्त जवाब देगा कि .. ..
जैसे पाकिस्तान का मुहं तोड़ कर रख दिया वैसे ही चीन का भी तोड़ेंगे ?? .. ..

कल रात बारह बजे लडकियां सड़कों पर निकलेंगी .. ..
मेरा चैलेंज .. कोई भी "भाई का लाल" भक्त बाहर निकल आवारगी हरकतें करने की धूर्तता करेगा - और लड़कियों से पिटने की हिम्मत दिखाएगा ?? .. ..

आजकल तो बहुत गालियां पड़ रही हैं .. ..
मेरा चैलेंज .. कोई भी "भाई का लाल" भक्त जवाब देगा कि .. ..
जैसे मैं बकवास कर रहा हूँ - तुम भी करोगे ?? .. .. हा !! हा !! हा !! .. ..

और यदि करोगे तो हम बोलेंगे .. भाई के लालों की जय हो .. .. हा !! हा !! हा !! ..

ब्रह्म प्रकाश दुआ
'मेरे दिमाग की बातें - दिल से':- https://www.facebook.com/bpdua2016/?ref=hl

// हामिद अंसारी साहेब बोले .. और सिद्ध हुआ सही बोले - गज़ब बोले - सटीक बोले ....//


देश के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी साहेब अपने १० वर्ष के कार्यकाल की समाप्ति पर कुछ बोले - जो शायद मोदी भक्तों और भाजपाइयों को रास नहीं आया .. .. और उनपर टीका टिप्पणियां तंज़ और छींटाकशी और भड़ास और उपहास आदि की उच्चस्तर पर पुरजोर शुरुआत हो गई .. और निम्नस्तर पर संस्कारित अपशब्दों की भी .. 

और इसलिए ही मेरा विश्वास और प्रगाढ़ हुआ कि हामिद अंसारी साहेब जो बोले सही बोले - और सिद्ध भी हुआ की वे सही बोले .. ..

इसलिए मोदी भक्तों और भाजपाइयों के अलावा भी सभी लोगों को गौर कर लेना चाहिए कि हामिद अंसारी साहेब क्या-क्या बोले ?? .. ..

और ऐसा मैं इसलिए भी कह रहा हूँ कि मेरे मतानुसार हामिद अंसारी साहेब जो बोले गज़ब बोले - सही बोले - सटीक बोले .. और ससमय बोले .. जो यह भी बोले कि नागरिकों की भारतीयता पर उठाए जाने वाले सवाल परेशान करने वाले विचार हैं .. ..

धन्यवाद हामिद अंसारी साहेब - और अनेक शुभकामनाएं !! जय हिन्द !!

ब्रह्म प्रकाश दुआ
'मेरे दिमाग की बातें - दिल से':- https://www.facebook.com/bpdua2016/?ref=hl

Thursday, 10 August 2017

// १९६२ से सीख कर मज़बूत हुए .. २०१४-१७ से सीख कर हैरान-परेशान हुए .. ..//


"१९६२ से सीख कर मजबूत हुए" : वित्त मामलों में फेल हमारे रक्षा मंत्री जेटली .. ..

ये जानकर बहुत अच्छा लगा .. क्योंकि मुझे तो भरोसा था कि ये केवल सिखाना जानते हैं - सीखना नहीं .. फिर भले ही वो 'सबक' ही क्यों ना हो .. ..
यानि ये बहुत खतरनाक टाइप दादा भैय्या लोग हैं - जो 'सबक' सिखाते हैं - पर 'सबक' सीखते नहीं .. ..!!

पर ठीक है - यदि ये मानते हैं कि १९६२ से कुछ 'सबक' सीखे हैं तो ख़ुशी की बात है .. ..

पर मैं सोच रहा था कि क्या ये २०१४-२०१७ से भी कुछ अच्छा सीखे होंगे .. लगता तो नहीं .. क्योंकि इस दौरान कुछ अच्छा हुआ भी तो नहीं - तो क्या खाक़ अच्छा सीखे होंगे .. ..

तो आज तो यही कहूंगा कि आज की छोडो .. १९६२ की सीख का ही सदुपयोग करो .. और मुद्दा ५६ इंची की नकली छाती से निपटाने की डींग मारने के बजाय - और अपनी डेढ़ अकल लगाए बगैर - बुद्धिमानों वाली दिमागी कसरत कर सलटाने की कोशिश करोगे तो बेहतर .. ..

और ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ कि हम .. २०१४-१७ से सीख कर मजबूत नहीं हैरान-परेशान हुए हैं .. .. !! जय हिन्द !!

ब्रह्म प्रकाश दुआ
'मेरे दिमाग की बातें - दिल से':- https://www.facebook.com/bpdua2016/?ref=hl

// .. 'करेंगे और करके रहेंगे' .. पर क्या ?? .. ..//


'करेंगे या मरेंगे' अब नहीं - अब तो 'करेंगे और करके रहेंगे' : मोदी .. ..

मेरा दावा !! .. भक्त अब शौच शौचालय में करेंगे - और करके रहेंगे !!

इससे ज्यादा कुछ कर देने की इनकी औकात भी नहीं - और मुझे उम्मीद भी नहीं .. ..

ब्रह्म प्रकाश दुआ
'मेरे दिमाग की बातें - दिल से':- https://www.facebook.com/bpdua2016/?ref=hl

Wednesday, 9 August 2017

// नेहरू की जगह पटेल होते तो ?? .. मूर्खों मोदी-शाह ऐसा ना किये होते तो ?? ....//


कुछ संघी भाजपाई भक्त और मेरे अतिरिक्त काबलियत रखने वाले कुछ मित्र हमेशा से अपनी छाती कूटते रहते हैं कि .. महात्मा गाँधी की गलती थी - और देश का दुर्भाग्य - कि नेहरू देश के प्रथम प्रधानमंत्री बनाए गए - अगर नेहरू के बजाय पटेल बने होते तो देश आज कहीं का कहीं होता .. ..

मेरी कहीं की कहीं प्रतिक्रिया .. ..

मूर्खों !! .. मोदी-शाह की गलती थी - और देश का सौभाग्य - कि गुजरात राज्यसभा चुनाव में टुच्चई बता दी - अगर नहीं बताई होती तो बेइज़्ज़त मोदी-शाह की इतनी भी बदनामी नहीं होती .. .. और यदि चीनी प्रधानमंत्री को झूला ना झुलाया होता तो बिरयानी खा रहे होते - और यदि नवाज़ की बिरयानी नहीं डकारे होते तो चीन द्वारा झुलाया झूला नहीं झूल रहे होते .. और यदि भ्रष्टाचार नहीं किया होता तो विकास पैदा हो गया होता - और यदि स्मृति ईरानी को राष्ट्रपति बनाया होता तो कोविंद को कोई नहीं जानता - और यदि वेंकैय्या को उपराष्ट्रपति के बजाय रक्षामंत्री बनाय होता तो जेटली के दिमाग को आराम मिल गया होता - और यदि जुमलों के बजाय मोदी-शाह ने कुछ काम भी किया होता तो आज मैं ऐसा बेतुका लेख लिख इन सबका उपहास नहीं कर रहा होता .. और शायद चिंतित भी नहीं होता .. और विचलित भी नहीं .. ..

जो शायद तब अंडे से बाहर भी ना निकले होंगे - पीछे इतिहास में घुस के पीछे की भविष्यवाणी करने वाले ऐसे मूर्खों !! .. कुछ समझे ?? .. ..

अरे जरा वर्तमान की भी सुध ले लो .. कुछ तो शर्म कर लो बेशर्मों !! .. यदि विकास बराला को पहले जमानत नहीं दिलवाए होते तो इतनी गालियां भी नहीं खा रहे होते .. और यदि गालियां खाने से परहेज़ होता तो मैं तुम्हे बेशर्म भी नहीं कह रहा होता .. ..

समझे पटेल को प्रधानमंत्री बनाने वाले फोकटिया लफ़्फ़ाज़ों !! .. ..

ब्रह्म प्रकाश दुआ
'मेरे दिमाग की बातें - दिल से':- https://www.facebook.com/bpdua2016/?ref=hl

// और अहमद पटेल जीत गए - तो क्या मोदी-शाह हार गए ?? .. और व्यवस्था ?? ....//


चुनाव होने थे - हो गए .. जीतने वाले जीत गए और हारने वाले हार गए .. ..
पर क्या किसी को शर्म आई ?? .. ..

छोड़िये जनाब .. मोटी चमड़ी बेशर्मों के लिए क्या हार और क्या जीत !! .. वो तो केवल कर्म पर भरोसा करते हैं .. कर्म करते जाते हैं - उन्हें परिणाम और फल से कोई फर्क नहीं पड़ता - क्योंकि इनके लिए नैतिकता का खुद का बनाया तराजू जो होता है जो इनके हर कर्म को तोलने के बाद नैतिकता का प्रमाण पत्र दे देता है .. ..

और आपको तो मालुम ही है कि 'नैतिक हार' भी 'अनैतिक जीत' से कितनी महान होती है .. है ना ?? .. .. हुर्रे !! भक्तों को बधाई !! आखिरकार मोदी-शाह ने टुच्ची महानता का परिचय दे ही दिया !! .. ..

और अहमद पटेल तो वाकई जीत गए - सच्ची-मुच्ची जीत गए !! .. टुच्चे और दोगलों की मूर्खता की बदौलत ही जीत गए .. है ना ??

पर इस बीच एक और सवाल के छिलके निकल रहे हैं .. कि निहायत बेवकूफों और अकर्मण्य और ढोरों के जिम्मे व्यवस्था का हश्र देखिए कि कुल जमा १५०-२०० नेताओं के द्वारा एक नेता के चुनाव में मात्र अपना वोट डालने के लिए कैसी व्यवस्था ?? कैसे नियम कायदे ?? और कैसी मशक्कत ?? और वो भी आपके मेरे पैसों पर ?? .. ..

धिक्कार है ऐसी लुच्ची टुच्ची व्यवस्था पर और संचालन पर .. है ना !! .. ..
अब बिना गाली दिए सभ्य शब्दों में इससे अच्छा तो नहीं लिख सकता था ना !! .. ..

ब्रह्म प्रकाश दुआ
'मेरे दिमाग की बातें - दिल से':- https://www.facebook.com/bpdua2016/?ref=hl

Tuesday, 8 August 2017

// 'वर्णिका कुंडू प्रकरण' .. या .. 'चंडीगढ़ पुलिस का बलात्कार प्रकरण' .. ..//


वर्णिका कुंडू प्रकरण आजकल सभ्य समाज के लिए चिंता का विषय हो असभ्य समाज के लाख दबाने की कोशिशों के बावजूद चर्चा में है .. ..

और चर्चा में इसलिए है क्योंकि इसमें वांछित शुरूआती पुलसिया कार्यवाही होने के बाद पुलिस की मिद्द निकल गई .. क्योंकि जब तक प्रारम्भिक कार्यवाही की जा रही थी बेचारे पुलिस वालों को नहीं मालुम था कि अमीर लुच्चा टुच्चा आरोपी वास्तव में संस्कारी भाजपा के नेता का जायज़ पुत्र है - जिसका डीएनए तक बाप और पार्टी से मेल खाता है .. ..

और इसलिए मैं व्यक्तिगत रूप से इस प्रकरण को 'वर्णिका कुंडू प्रकरण' के बजाय 'चंडीगढ़ पुलिस का बलात्कार प्रकरण' कहना पसंद करूंगा .. जिसमें बलात्कारी एक अमीर लुच्चा टुच्चा ना होकर उसका बायलोजिकल बाप है जो संस्कारी भाजपा का नेता है .. ..

तो आइए देखते हैं कि इस बलात्कार प्रकरण में पीड़ित पुलिस और बलात्कारी नेता के बीच की एकतरफा रस्साकशी में पीड़ित पुलिस कब अपना दम तोड़ती है .. कब उसका पोस्टमॉर्टेम होता है - और कब दाह संस्कार !! .. या फिर हाथ में डंडा पकड़े पीड़ित पुलिस कब मुआवज़ा रुपी धन प्राप्त कर या चार लप्पड़ खाकर खाकसार हो जाती है .. ..

और हाँ ये भी देखिएगा कि जो भक्त सोशल मीडिया पर उचक फुदक अपनी भक्ति के साथ मूर्खता और बेशर्मी का नंगा प्रदर्शन करते हैं उन्हें भी अच्छे से जवाब दिया जाए .. और उनसे पूछा जाए कि - ये "सबका साथ सबका विकास" में "विकास" का मतलब "विकास बराला" ही था क्या ?? .. !! धन्यवाद !!

'मेरे दिमाग की बातें - दिल से':- https://www.facebook.com/bpdua2016/?ref=hl