Tuesday, 10 April 2018

// भक्त भी मोदी के विरोध में सड़कों पर उतरे.. तौबा !! तौबा !! तौबा !!.. ..//


आज फिर भारत बंद..

और आज का बंद २ अप्रैल के दलितों के बंद के जवाब में.. और दलित आरक्षण के विरोध में..

पर सरकारी घोषणावीरों द्वारा घोषित किया जा चुका है कि ना तो आरक्षण समाप्त किया जाएगा ना किसी और को समाप्त करने दिया जाएगा..

यानि आज का बंद सरकार के खिलाफ !!..

पर बंद के समर्थन में तो मेरा भक्तु और अनेक भक्त शामिल.. यानि भक्त सरकार के विरोध में..
यानि भक्त भी मोदी के विरोध में सड़कों पर उतरे.. तौबा !! तौबा !! तौबा !!

और इसके मायने ये हुए कि या तो मोदी के दिन लद गए..
या फिर मोदी की चाल सफल हुई.. यानि सबको लड़ा भिड़ा के रखो और अपना भक्त सीधा करते रहो..
या फिर उससे भी शर्मनाक बात ये कि चोर उचक्कों टुच्चों के मार्फ़त सब गुनाह होते रहने दो और जनता के सामने खुद बगुला भगत बने रहो.. बस 'मित्रों-मित्रों' - 'चाइए-चाइए' करते रहो.. 

और ये बात तो मुझे समझ आ गई है पर भक्तों का क्या करें जिन्हें भीड़ के रूप में इस्तेमाल कर अब दंगाई भी बनाया जा रहा है.. ऐसे भक्त जो परोक्ष अपरोक्ष रूप से २ अप्रैल के बंद में भी शामिल थे और आज १० अप्रैल के बंद में भी शामिल होंगे.. वो भी एक दंगाई के रूप में..
शुद्ध नापाक भगवा दंगाई !!.. हे राम !!.. हे रवीश !! - अब तो तुम ही कुछ करो !!..

ब्रह्म प्रकाश दुआ
'मेरे दिमाग की बातें - दिल से':- https://www.facebook.com/bpdua2016/?ref=hl

Monday, 9 April 2018

// मुसलमानों के बाद अब निशाने पर दलित क्यों ?? ..//


हिन्दू-मुसलमान श्रीदेवी सलमान और आईपीएल जैसे बकवास हॉट वायरल विषयों के बीच भी "दलित मुद्दा" चल निकला और छाया रहा.. यहाँ तक कि ये मुद्दा अविश्वास प्रस्ताव की लटकी तलवार के नीचे ठप्प नकारा संसद जैसे अभूतपूर्व शर्मनाक मुद्दे को भी पीछे छोड़ ज्वलंत हो गया..

और ये दलित मुद्दा ऐसा ज्वलंत हुआ कि हिंदुत्व के नाम पर साम्प्रदायिकता की राजनीति करने वाली सत्तासीन भाजपा और संघ को बहुत भारी पड़ गया.. इतना भारी कि साज़िशें तक भी रचनी पड़ीं - बचाव की मुद्रा में भी आना पड़ा - और तो और पार्टी में ही मौके की घात लगाए घातकों की ओर से घोर अंतर्विरोध तक का सामना करना पड़ गया..

और ये सब इसलिए कि भाजपा स्पष्ट रूप से दलित राजनीति की आग से खेलती दिखी.. जिसकी चिंगारी लगी आरक्षण संबंधी दिए गए सोचे समझे बयानों से और दलितों पर नियोजित हमलों से - और फिर आग लगी "रामजी" प्रकरण से.. और हवा लगी सुप्रीम कोर्ट से निकलवाए दलित एक्ट में एक संशोधन के निर्णय से..

पर उपरोक्त कारणों के अतरिक्त भी मैं जो सबसे प्रबल कारण मानता हूँ वो ये है कि..

शायद पहली बार अप्रत्याशित रूप से सांप्रदायिक तत्वों को हिन्दू मुसलमान विषय से सफलता नहीं मिली .. और उसका कारण रहा मुसलमानों द्वारा लाख उकसावे के बावजूद गज़ब की सूझबूझ सभ्यता सहजता संवेदनशीलता साहस सहनशीलता और सब्र का परिचय देना और आम हिंदुओं के साथ विश्वास को कायम रखना.. और साथ ही आम हिन्दुओं द्वारा भी अपने आपको भाजपाई बजरंगी विहिप वाले भगवा पट्टेधारी हिन्दुओं से अलग रख मुसलमानों के साथ भाईचारे को और पुख्ता करने के प्रयासों में आगे आकर साम्प्रदायिक शक्तियों का खुलकर विरोध करना..

और इस प्रकार आम हिन्दुओं और मुसलमानों की समझदारी के कारण - भगवा पट्टेधारी हिन्दुओं तथा मुसलमानों को भड़का कर अपनी राजनीति करने वाले अनेक मुस्लिम नेताओं के सारे अरमान पुनः परवान ना चढ़ सके..

और नतीजा ये है कि अब उन्हीं सांप्रदायिक स्वार्थी तत्वों के बीच कुछ दरारें पड़ गई हैं - और भाजपाई बजरंगी विहिप वाले भगवा पट्टेधारी हिन्दुओं ने अब अपना निशाना मुसलामानों से हटाकर दलितों पर साध लिया है..

पर बदलते हुए परिवेश में मुझे लगता है कि ये उनकी एक और बड़ी भूल है क्योंकि अब देश के आम हिन्दू-मुसलमान ही नहीं - पर आम दलित भी और सभी अन्य आम नागरिक भी परिपक़्व हो रहे हैं..

क्योंकि देश का आम नागरिक अब मोदी का रास्ता छोड़ रवीश कुमार के रास्ते चल पड़ा है.. उसे मोदी के मन की बकवास के बजाय रवीश के दिल दिमाग की बेहतरीन बातें समझ पड़ने लगी हैं..

बल्कि सही कहूँ तो रवीश की सारगर्भित बातें अब आम नागरिकों के दिमाग में पैवस्त होने लगी हैं - और भक्तों के दिमाग वाले सर के खाली खांचे में चुभने लगी हैं.. है ना !!..

ब्रह्म प्रकाश दुआ
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Saturday, 7 April 2018

// सांप नेवला कुत्ती कुत्ता बिल्ली आदि की एंट्री के बाद तो स्तर अब "नीच" हो चुका है.. //


संसदीय लोकतंत्र निचले स्तर पर : मोदी

सही कहा.. पर इसके आगे की भी सुन लो मोदी जी..

सांप नेवला कुत्ती कुत्ता बिल्ली आदि की संसदीय लोकतंत्र में एंट्री के बाद तो हमारे कुछ तथाकथित लोकतांत्रिक सांसद अब "नीच" स्तर पर पहुँच चुके हैं..

इसलिए मोदी जी आपको एक बार पुनः धिक्कार के साथ कहना चाहूंगा कि क्या गलत हो रहा है और क्या सही होना 'चाइए' अब मत बोलते रहा करो.. क्योंकि ये काम तो हमारा है.. हम आपको बता देते हैं कि संसदीय लोकतंत्र का स्तर निचले ही नहीं "नीच" स्तर तक पहुंचा दिया गया है.. और इसमें हमारा तो कोई सीधे-सीधे योगदान नहीं है सिवाय इसके कि ३१% जनता ने आपको शीर्ष कर्ता के पद पर नियुक्त कर दिया था जबकि आप कर्ता तो हैं ही नहीं - आप तो बस जुबानी जमाखर्च करने वाले बड़बोले नाकाबिल ही निकले.. और इसलिए आप ही गिरे और गिरते हुए स्तरों के लिए गुनहगार साबित हो चुके हो..

और इसलिए कृपया विदित हो कि आज तो आप की बची खुची साख भी अपने निचले स्तर पर पहुँच चुकी है.. और इसके पहले कि जनता धिक्कार के धक्के मार के आपको अपदस्थ करे उससे पहले ही जनता से माफ़ी मांगकर इस्तीफ़ा दे दो.. थोड़ी आपकी साख भी लौट आएगी और प्रधानमंत्री पद की गिरती हुई गरिमा भी संभल जाएगी.. 

पर आप ऐसा करोगे लगता नहीं क्योंकि ये "माफ़ी" भी बड़ी ही अद्वितीय चीज़ है - और तो और 'माफ़ी मांगने' और 'थूक के चाटने' में भी उतना ही फर्क होता है जितना केजरी और विश्वास में.. और ये उच्च स्तर की बातें भी निम्न स्तर के समझ में पड़ी जाए - संभव ही नहीं.. 

ब्रह्म प्रकाश दुआ
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Friday, 6 April 2018

// हानिकारक उपयोगी प्लास्टिक .. बनाम .. हानिकारक नकारा मोदी .. ..//


प्लास्टिक का भी अपना ज़माना रहा और खूब चलन चला.. पर देर से ही सही लोगों को समझ पड़ ही गई कि प्लास्टिक भले ही उपयोगी हो पर अंततः हमारे लिए हानिकारक है.. और इसलिए इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना उपयुक्त एवं आवश्यक हो तय हो चुका है.. पर जो लोग प्लास्टिक के आदी हो गए थे वो अभी भी रोना रो रहे हैं कि पलास्टिक का विकल्प क्या ??.. मसलन अब दूध तेल पानी आदि किसमें पैक करें.. पापड़ दही घी अचार आदि कैसे पैक करें कि ये सब ख़राब ना हों.. और प्लास्टिक इंडस्ट्री के लाखों करोड़ों के रोजगार और निवेश आदि का क्या होगा ??..

इसी प्रकार..

मोदी का भी अपना ज़माना रहा और खूब चलन चला.. पर देर से ही सही लोगों को समझ पड़ ही गई कि मोदी तो नकारा है और हमारे लिए अंततः हानिकारक है.. और इसलिए मोदी का अपदस्थ होना उपयुक्त एवं आवश्यक हो तय हो चुका है.. पर जो भक्त मोदी के मुरीद हो गए थे वो अभी भी रोना रो रहे हैं कि मोदी का विकल्प क्या ??.. मसलन अब प्रधानमंत्री बनने लायक और कौन.. एक सुलझा समझदार ईमानदार नेता कैसे चुनें जिससे देश के हालात और ख़राब ना हों.. और फिर भाजपा संघ और हिंदुत्व और राम मंदिर आदि का क्या होगा ??.. 

मेरी उपयुक्त उपयोगी आवश्यक प्रतिक्रिया..

जो चीज़ हानिकारक हो उसका तत्काल त्याग आवश्यक है - लाभ तो स्वतः ही प्राप्त होने लगता है.. मसलन कोई भी व्यसन भले ही कितना भी मज़ा क्यों ना देता हो पर उसके उपयोग से नहीं उसके त्याग से ही असल लाभ प्राप्त हो सकेगा..  

इसलिए प्लास्टिक और मोदी दोनों ही हानिकारकों को प्रतिबंधित करना उपयुक्त और आवश्यक ही है..

इसलिए आइए अपने पर्यावरण की रक्षा और देश के हितों के संरक्षण हेतु आज ही तय करें कि भविष्य में कभी भी प्लास्टिक का उपयोग नहीं करेंगे और नकारा मोदी को सत्ता का दुरपयोग नहीं करने देंगे..

धन्यवाद !!.. जय हिन्द !!..

ब्रह्म प्रकाश दुआ
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Tuesday, 3 April 2018

// गरीब संतप्त असंतुष्टों की भीड़ सड़कों पर है तो क्या सड़कों की 'रौनक' बढ़ी है ??..//


कह सकते हैं कि गरीब के अलावा भी काफी संतप्त और असंतुष्ट लोग आज सड़कों पर उतरे हैं..

पर भक्त अब भी मान कर चल रहे हैं कि मोदी राज में सड़कों पर रौनक बढ़ी है..

और कुछ टुच्चे लोग भक्तों की सोच को सकारात्मक ठहराने के भरपूर प्रयास कर रहे हैं..

और मैं सोच रहा हूँ कि काश सड़कों पर उतरी भीड़ ये समझ सके कि जब बेकाबू हो वो गुस्से में अपने निशाने गलत साधकर अपना या अपनेवालों का ही नुक्सान कर बैठती है तो वो उन टुच्चों की ही मदद कर देती है जिनकी वजह से ही भीड़ सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हुई है..

इसलिए मेरा सड़कों पर मजबूरन उतरे लोगों से निवेदन है कि क्यों वो ही हमेशा रोते रहें गुस्से में रहें ??.. और क्यों ना वो भी थोड़ा रौनकी हो टुच्चों के ठिकानों की भी तो रौनक बढ़ाएं.. सब कुछ सड़क पर ही क्यों.. सब कुछ खुल्लमखुल्ला क्यों.. सब कुछ आत्मघाती ही क्यों ??..

वो क्या है ना कि ये ज़माना बदल रहा है.. यहां मातम पर भी रौनक लगाने वालों का बोलबाला हो चला है.. इसलिए अब कम से कम रोना तो बंद करना ही होगा.. अब तो काम रुलाने से ही होगा.. समझे !! इन टुच्चों के सड़कछाप रौनकियों (यानि मेरे ही प्रिय मित्रों) ??..

ब्रह्म प्रकाश दुआ
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Monday, 2 April 2018

// भक्तों !!.. केजरीवाल के बारे में टेंशन मत लो.. नहीं तो नसें भी लीक हो जाएंगी !!.. //


मंदबुद्धी भक्तों को २-३ बातें बिलकुल समझ नहीं पड़ रही हैं..

पहली : दलित भी तो हिन्दू होते हैं या नहीं ??..
दूसरी : हिन्दू धर्म शास्त्रों पर टिका है या शस्त्रों पर ??..
तीसरी : केजरीवाल ने गलत माफ़ी मांग कर सही काम क्यों किया ??..

भक्तों को मेरी राय..
अपनी औकात में रहो.. भले ही शास्त्रों का अध्ययन करो या फिर शस्त्र उठा लो - या फिर पकौड़े तलना शुरू करो - या फिर हिन्दू को हिन्दू से लड़ा मारो..

पर केजरीवाल के बारे में टेंशन मत लो.. नहीं तो नसें भी लीक हो जाएंगी !!..

ब्रह्म प्रकाश दुआ
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// हालात बेकाबू !!.. भुगतना तो भक्तों को भी पड़ेगा.. बच्चू बच के कहाँ जाएंगे ??.. ..//


धार्मिक कारणों से रामनवमी के बाद से ही दंगे फसाद जारी थे..
आज जाति कारणों से भी हिंसा की नई शुरुआत हो गई है..
और तो और वर्गीय कारणों से दलितों और करणी सेना में हिंसक टकराव भी भयावह है..
और आर्थिक कारणों से पूरा देश स्तब्ध है - पेट्रोल डीज़ल के भाव रिकॉर्ड उच्चस्तर पर बहुत कुशलता के साथ पहुंचा दिए गए हैं..
सुरक्षा कारणों से भी देश उद्वेलित है - सीमा पर जवान भी मारे जा रहे हैं..
और शिक्षा या स्वास्थ या रोज़गार के क्षेत्र में देश में मज़ाक चल रहा है..
और राजनीति के क्षेत्र में भी मदमस्त उथल पुथल जारी है..

और इस सबके बीच आज भारत बंद है.. और चालू संसद भी बंद है - ठप्प है.. और भ्रष्टाचार अपने चरम पर !!..

पर भारत के स्वयंभू ५६ इंची छाती वाले नकारा चौकीदार-प्रधानसेवक और चुने हुए प्रधानमंत्री का मुँह बंद है - क्योंकि उसकी नीयत ही बद है..

और इस सब के बीच रवीश कुमार पूरे देश को समझदारी से भरे संदेश दे देकर हम सबको आगाह कर रहे हैं.. मानों कह रहे हों कि बेवकूफों संभल जाओ सुधर जाओ चेत जाओ जाग जाओ.. और ये भी बता रहे हैं कि अब तक भी भक्त बने हुए बेवकूफ आज की भयावह स्थितियों के लिए परोक्ष अपरोक्ष रूप से मुख्य जिम्मेदार हैं..

और मैं सोच रहा हूँ कि क्या भक्तों का भी कोई धर्म है - या फिर कोई जाति या फिर कोई विशेष वर्ग ??.. क्या भक्तों को शिक्षा स्वास्थ रोजगार की दरकार नहीं है ??.. क्या जो भारत आज बंद है वो भक्तों का नहीं है ??.. क्या भक्तों की गाड़ियां पानी से चलती हैं ??.. क्या ये सांसद विधायक मंत्री जो हराम की तनख्वाह ले रहे हैं वे भक्तों के नहीं हैं ??.. क्या भक्त भी टैक्स नहीं देते हैं ??.. या फिर भक्त हद दर्जे  के बेवकूफ तो नहीं ??.. या भक्त कहीं बिके हुए तो नहीं ??..

खैर भक्त जो भी हों - जैसे भी हों जहां भी हों और जितने भी बचे हों - एक बात तय है कि यदि उन्हें इसी देश में रहना है तो भुगतना तो उन्हें भी पड़ेगा .. बच्चू अब बच के कहाँ जाएंगे ??..

ब्रह्म प्रकाश दुआ
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