My blog is my reaction and analysis of the current Political and Social affairs of our country - India.
Thursday, 6 September 2018
Wednesday, 5 September 2018
// विवेचना !!.. गब्बर के ना बीवी बच्चे थे ना कोई गर्लफ्रेंड.. फिर डकैती किसके लिए ?..//
गब्बर के ना बीवी थी, ना बच्चे थे, ना कोई गर्लफ्रेंड..
फिर साला हरामखोर नालायक नाकारा निरंकुश निर्दयी चोर उचक्का लुटेरा लम्पट सारी लूटपाट डकैती किसके लिए करता था ??..
अब ये प्रश्न तो घुमाफिराकर - कभी इस अंदाज़ में तो कभी उस अंदाज़ में - ३-४ साल से भक्तों और लोगों के बीच चल रहा है.. और इस प्रश्न का उद्देश्य और उत्तर भी सबको मालुम है.. भले ही कोई किसी को बताता ना भी हो तो भी.. है ना ??..
तो प्रश्न उठता है कि आज फिर यही घिसा-पिटा प्रश्न सोशल मीडिया पर क्यों तरोताज़ा हो उठा है ??..
और इसका उत्तर है कि देश में कोई गब्बर जैसी ही डकैती करता पकड़ा गया है.. और जिसने डकैती डाली है वो भी गब्बर जैसा सरगना ही है.. अक्कल शक़्कल नीयत और व्यवहार में भी काफी कुछ गब्बर जैसा.. ..
पर वो क्या है ना कि जैसे शोले में गब्बर से लोग ख़ौफ़ज़दा बताए गए थे.. वैसे ही देश में भी लोग सरगना और उसके चंगुओं से ख़ौफ़ज़दा हैं..
इसलिए अब लोग भली भाँति उत्तर जानते हुए भी और उत्तर में किसी भी प्रकार की दिलचस्पी नहीं रखते हुए भी - प्रश्न सीधे-सीधे दागने के बजाय इधर-उधर कर - फिल्म के किरदार के पीछे छुप कर पूछ रहे हैं..
खैर ठीक भी है.. क्योंकि अभी हर किसी का नंबर भी तो आया नहीं है - और हर कोई ठाकुर जैसा सताया हुआ भी तो नहीं है.. और हर कोई जय-वीरू जैसा भी तो नहीं हो सकता.. है ना !!..
लेकिन एक बात और भी है कि हर कोई गब्बर स्टाइल में ही पूरे गुस्से और आवेश में जानते-बूझते अब एक और प्रश्न भी पूछ रहा है.. बताओ चुनाव कब हैं ??.. कब हैं चुनाव ??..
जबकि जवाब भी सबको मालुम है सरकार.. .. "२०१९ में !!"..
ठाँय !! ठाँय !! ठाँय !!.. समझे भक्तों !!..
ब्रह्म प्रकाश दुआ
'मेरे दिमाग की बातें - दिल से':- https://www.facebook.com/bpdua2016/?ref=hl
Tuesday, 4 September 2018
// अब बैठे-ठाले "दलित" नाम पर ऊँगली ??.. तो क्या "मनुरोधी" ठीक रहेगा ??.. ..//
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मीडिया को 'दलित' शब्द का इस्तेमाल नहीं करने का आदेश या सलाह दी गई है.. और आजकल इस सरकार का आदेश या सलाह तो छोड़िए - छोटा सा इशारा भी यथार्थ धमकी जैसा ही होता है.. और मीडिया के लिए तो पत्थर पर लकीर जैसा..
अब बैठे-ठाले ऐसी सलाह दिमाग के किस कीड़े के कहाँ काटने से उत्पन्न हुई होगी - सलाह देने वाले और हम जैसे कुछ ताड़ू ही बेहतर जानें..
पर मैं सोच रहा था कि यदि दलितों को अब "दलित" नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे ??.. क्या "दलित" का कोई पर्यायवाची शब्द विध्यमान है.. या फिर नया नामकरण होगा ??..
नामकरण में उस्ताद और काम में शून्य कामदार की सरकार मुझे लगता है बिना किसी अन्य काम के नया नामकरण ही करने में सक्षम और तत्पर होगी..
तो फिर नया नाम क्या होगा ??..
अब इस सरकार की अक्कल-शक्कल रूचि और औकात को देखते हुए मुझे लगता है कि "दीन-अधीन या दीनाधीन" अच्छा रहेगा.. क्योंकि हो सकता है इससे एक और नामकरण 'दीनदयाल' के नामे मान लिया जाए और अटल अस्थियों के विसर्जन उपरांत फुर्सती हो रहे भक्तों को आह्लादित होने का एक और सुअवसर प्राप्त हो जाए..
और वैसे भी दलित बेचारे अब तक समाज में दीन अधीन ही तो रहे हैं..
पर फिर सोचता हूँ कि बेचारे जो दलित अब तक शोषित वंचित या दीन अधीन रहे उन्हें अब जब हज़ारों सालों बाद नए नाम का योग-संयोग प्राप्त होने जा रहा हो - तो फिर उन्हें ऐसे ही एक और बेचारगी वाले नाम से क्यों नवाज़ा जाए ??.. और क्यों ना ऐसा नाम दिया जाए जिससे उनका सम्मान और विश्वास बढ़े !!..
और इसलिए मेरा सुझाव है कि यदि दलित नाम प्रतिबंधित किया जाता है तो नया नाम होना चाहिए..
"मनुरोधी" !!..
क्योंकि शायद आजकल इस घृणित सरकार से पीड़ित बेचारे दलित - मनुस्मृति का विरोध करने पर मजबूर भी हैं और आंदोलित भी.. और शायद मनुवादी सरकार के लिए २०१९ में निश्चित हार का एक सबसे बड़ा घातक कारण होने जा रहे हैं..
तो हो जाए.. "मनुरोधी" जिंदाबाद !!..
ब्रह्म प्रकाश दुआ
'मेरे दिमाग की बातें - दिल से':- https://www.facebook.com/bpdua2016/?ref=hl
Monday, 3 September 2018
// अब मिलियन डॉलर (रू.७१ वाला) सवाल.. क्या ठस भक्त भी सोचना शुरू करेंगे ??..//
मान लो..
यदि पाकिस्तान तबाह कर दिया जाए या मोदीनसीब से हो जाए..
राम मंदिर बन जाए.. धारा ३७० समाप्त हो जाए.. और यूसीसी लागू हो जाए..
सारे घुसपैठिये देश बाहर हो जाएं.. देश हिन्दू राष्ट्र घोषित हो जाए..
वंदे मातरम् बोलना अनिवार्य हो जाए.. जेएनयू पर ताला लग जाए..
एससी/एसटी एक्ट कोर्ट के बजाय सरकार और दलितों के हिसाब से हो जाए..
सवर्ण दलित और अन्य सभी पटेल जाट गुर्जर आदि आरक्षण टंटे पर मोदी का जो भी फॉर्मूला हो देशहित में सर्वमान्य हो जाए..
बुलेट ट्रेन चलने लगे.. पटेल की मूर्ती चमकने लगे..
गाय से लोग चमकने लगे.. संघियों से बिदकने लगें..
भाजपाइयों की किस्मत चमकने लगे.. और कांग्रेस नेस्तनाबूद हो जाए.. आदि !!.. ..
पर साथ ही शरीफ लोग भी गुंडों से चमकने लगें.. महिलाएं अपनी किस्मत पर रोने लगें.. रोज़मर्रा की वस्तुओं और सेवाओं के भाव बढे हुए हों.. भ्रष्टाचार चरम पर ही हो.. आपसी भाईचारा समाप्त हो लोग एक दूसरे के खून के प्यासे हों.. शिक्षा स्वास्थ्य कानून व्यवस्थाएं चरमराई हुई हों.. गरीब मर रहा हो.. मध्यमवर्गी उलझा हुआ हो.. उच्चवर्गीय मज़े में हो.. रविश कुमार पुण्य प्रसून अभिसार आदि चाय पकोड़े का ठेला लगाए हुए हों.. और केजरीवाल राजनीति से सन्यास ले घर बैठे आराम फरमा रहे हों..
और लाज़मी तौर पर.. तब इस देश के भक्त भी स्वाभाविक ही समस्याग्रस्त हो हैरान परेशान ही हों.. तब क्या ????..
बस !!.. तब क्या ??.. इसी बात पर रुकें और ज़रा गौर फरमाएं.. ..
गौर फरमाएं कि भक्तों की इतनी धूर्तता और मूर्खता के बावजूद भी हम इन एहसान फरामोश भक्तों के बारे में सोचते हैं और उनके भविष्य के बारे में भी चिंतित ही हैं..
पर क्या भक्त भी कभी ऐसा ही हमारे और देश के बारे में सोचेंगे ??..
और मेरा जवाब है कि जब तक भक्त सोचना शुरू ही नहीं करेंगे तो फिर क्या खाक़ सोचेंगे ??.. और इस बारे में आप भी सोचिएगा.. क्योंकि देश के सामने अब मिलियन डॉलर (रू.७१ वाला) सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि क्या ठस भक्त भी अपनी जन्मपत्री पर लात मारकर सोचना शुरू करेंगे ????..
और यदि भक्त सोचना शुरू नहीं करेंगे तो क्या होगा ??..
कुछ नहीं होगा मित्रों कुछ नहीं होगा !!.. क्योंकि आजकल तो साहेब ही सोच में पड़ गए हैं कि आखिर ये सोशल मीडिया की गन्दगी को कैसे रोका जाए ??..
तो बस आप तो इन तमाम बेवकूफों को नज़रअंदाज़ कर हर मौका ताड़ पेलते रहें..
और जब तक राहुल मानसरोवर से वापस नहीं लौट आते तब तक इन्हें रोने कलपने दें कि - हाय !! राहुल आखिर चले क्यों गए ??.. और जब राहुल वापस आ जाएं तो इन्हें चीं-चीन-चीं करते रहने दें.. हाहाहाहाहा !!..
ब्रह्म प्रकाश दुआ
'मेरे दिमाग की बातें - दिल से':- https://www.facebook.com/bpdua2016/?ref=hl
मेरा ब्लॉग:- http://bpdua.blogspot.in/
Sunday, 2 September 2018
// अपील !! अपील !! अपील.. तेरी भी मेरी भी और कई टुच्ची हस्तियों की अपील !!.. //
जब से "चाइये-चाइये मास्टर" ने ये गजब की अपील जारी की है कि..
सोशल मीडिया पर गंदगी नहीं फैलाने का संकल्प हर नागरिक ले.. ..
और जब से इस अपील की भूरी-भूरी भगवा-भगवा प्रशंसा भी हो गई है.. तब से मेरे सूत्र बता रहे हैं कि कई टुच्ची हस्तियों ने भी अपनी-अपनी अपील जारी करने का मन बना लिया है.. जिनमें से कुछ अपीलें निम्नानुसार आ सकती हैं..
तड़ीपार : अव्वल तो चुनाव आयोग ये सुनिश्चित करे कि चुनावों में धांधली नहीं हो सके..
धोतीपकड़ : नापाक को कड़ी चेतावनी के बजाए कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित हो..
फूफाजी : हर भाजपाई हमेशा अपनी आत्मा की आवाज़ को सबके समक्ष रखता रहे..
अर्बन अर्नब : टीवी चैनलों में बहस के दौरान चिल्लाचोट पर लगाम लगे..
तिहाड़ी : टीवी पर हिन्दू-मुसलमान टॉपिक पर बहस प्रतिबंधित की जाए..
अनजाना ॐ : सभी टीवी एंकर्स बहस के दौरान निष्पक्षता बनाए रखें..
पर्रीबाबा : भारतीय नेताओं के विदेश में जाकर इलाज करवाने पर प्रतिबंध लगे..
निर्मूल निर्मल : रक्षामंत्री की सहमति स्वीकृति बिना कोई छोटा-मोटा रक्षा सौदा ना हो..
सुसमा आंटी : किसी भी विदेशमंत्री को विदेश जाने की खुल्ली छूट हो..
केतली : अब इतने तो अच्छे दिन आ गए हैं जब २००० का नोट भी तत्काल बंद हो..
ईरानी भारती : फर्जी डिग्री बनाने बनवाने वालों को नापाक बॉर्डर पार छोड़ दिया जाए..
बिहारी गिर्री : राजनीती में मृदुभाषी नेता के लिए "अय्यर पुरूस्कार" की घोषणा हो..
अई यार : गाली देने वाले किसी भी निष्कासित नेता की पार्टी में वापसी प्रतिबंधित हो..
बिहारी दोगला : चुनाव उपरांत किसी भी प्रकार की दोगलई बर्दाश्त नहीं हो..
लिलिपुट : पुलिस किसी भी राजनीतिक हस्तक्षेप और धार्मिक भेदभाव के बिना कार्य करे..
मामू : सीबीआई निष्पक्षता से व्यापम की जांच शीघ्र ही पूरी कर दोषियों को सजा दिलाए..
सलवारी बाबा : किसी भी साधु संत योगी के व्यापार करने पर प्रतिबंध लगाया जाए..
शाह-ज़ादा : कोई कितने भी बड़े-बाड़ेवाले बाप की औलाद क्यों ना हो - बख्शा नहीं जाए..
रिवर्स बैंक ऑफ़ इंडिया : बैंको से लोन अब केवल कर्जदार किसानों को ही दिया जाए..
माल या मल : सभी लोग अपने अपने बैंक लोन समय पर चुकता करें..
अपनी सेवा करने वाला संघ : पुरुषों के चड्डी और पटका पहनने पर रोक लगे..
बापूड़ा : भद्र पुरुष महिलाओं बच्चियों की तरफ गन्दी नज़र से नहीं देखें..
भक्त समूह : हर नागरिक अपने विवेक का इस्तेमाल करे..
और अंत में एक अपील मेरी भी.. ..
प्रधानसेवक की किसी भी रूप में निंदा करने पर तत्काल प्रतिबंध लगे..
और प्रधानसेवक के खिलाफ नियमित ब्लॉग लिखने वालों और फेसबुक पर अपनी दिल दिमाग की भड़ास निकालने वालों को - और उन्हें लाइक या शेयर करने वालों को - देशद्रोह का मुक़द्दमा चलाए बगैर और देशद्रोह की परिभाषा तय किए बिना या देशद्रोह की सजा का प्रावधान किए बिना - कड़ी से कड़ी सजा दे दी जाए..
ब्रह्म प्रकाश दुआ
'मेरे दिमाग की बातें - दिल से':- https://www.facebook.com/bpdua2016/?ref=hl
Saturday, 1 September 2018
// सोशल मीडिया में "ठेली" जा रही गंदगी रुकनी नहीं चाहिए.. और सफाई झाड़ू से हो..//
मेरा अनुभव है कि मुर्दा ना बोले तो ना बोले - और बोले तो मुर्दे जैसा ही बोले..
और अब जाकर मोदी ने सोशल मीडिया पर गंदगी नहीं फैलाने की बात कही है !!..
और मैं सोच रहा हूँ कि मोदी और मोदी भक्त और संघी और उचंगी जो पूरे देश में गंदगी फैला रहे हैं उसका क्या ??..
वैसे मोदी का विलाप संग उवाच एक और बात की तरफ इंगित करता है कि..
सोशल मीडिया पर मोदी और भक्तों के द्वारा जो गालियां दी जा रही थीं अब आज की तारिख में उनसे ज्यादा गालियां उलटे मोदी और भक्तों को पड़ रही हैं.. यानि जो गंदगी इनके द्वारा फैलाई जा रही थी उससे भी ज्यादा गंदगी वापस "ठेली" जा रही है..
और मैने तो सदैव ये बात महसूस की है कि जब किसी गली के सबसे बदमाश गुंडे की पिटाई धुलाई किसी दूसरे गुंडे या बहादुर द्वारा हो रही होती है तो गली में एक ख़ुशी और संतुष्टि का माहौल व्याप्त हो जाना स्वाभाविक है.. फिर भले ही गली में रहने वाले लोग गुंडई या हिंसा विरोधी ही क्यों ना हों..
और इसलिए मैं आजकल देश का मूड अब पहले से बेहतर ख़ुशी और संतुष्टि का होते देख रहा हूँ.. ख़ुशी इस बात की कि सबसे अव्वल गुंडे की ठुकाई हो रही है.. और संतुष्टि इस बात की कि अब इस गुंडे से तो निजात मिल ही जाएगी..
इसलिए मेरी ऐसी सोच है कि जब तक देश में फैली और फैलाई जा रही गंदगी का पूर्ण पुख्ता समाधान नहीं हो जाता - तब तक सोशल मीडिया में "ठेली" जा रही गंदगी रुकनी नहीं चाहिए.. अन्यथा देश की सफाई होने में दिक्कतें आ सकती हैं.. वैसे भी श्रेयस्कर है कि गुंडा मरा तब जानिए जब तेरहवीं हो जाए..
वैसे यदि हर प्रकार की गंदगी पर कोई झाड़ू फेर दे तो फिर तो बात ही अलग है..
क्योंकि झाड़ू तो बना ही गंदगी की सफाई करने के लिए है.. है ना !!..
तो आइये समस्त प्रकार की गंदगी की सफाई समग्र रूप में झाड़ू से करें..
और समस्त गंदगी से दूर अपने दायित्वों के निर्वहन में लगे खपे और सफाई के लिए धूल-धूसरित भी हो रहे झाड़ूबरदार केजरीवाल का समर्थन जारी रखें.. धन्यवाद !! जय हिन्द !!..
ब्रह्म प्रकाश दुआ
'मेरे दिमाग की बातें - दिल से':- https://www.facebook.com/bpdua2016/?ref=hl
Subscribe to:
Posts (Atom)

