Wednesday, 13 July 2016

// 'उत्तराखंड के बाद अरुणाचल' - 'थप्पड़ के बाद एक लात' ....//


मोदी का ही कमाल था कि पिछले दिसंबर में अरुणाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार को गिराने की साज़िश क्रियान्वित करी थी .... और साज़िश तब सफल हो गई थी .. अरुणाचल की कांग्रेस सरकार गिरा दी गई थी ....

और उस साज़िश से प्रोत्साहन प्राप्त कर उत्तराखंड में भी कांग्रेस की सरकार गिरा दी गई थी .... लेकिन उसके बाद उत्तराखंड में भाजपा और मोदी की इज़्ज़त के कैसे पंचनामे हुए थे सबको मालूम है .... क्योंकि अंततः वहां कांग्रेस की विधिवत सरकार बहाल कर दी गई थी जो आज तक काबिज़ है ....

और अभी-अभी अरुणाचल के विषयक भी उच्चतम न्यायलय का फैसला आ गया है - और ऐतिहासिक फैसले के अनुसार अरुणाचल में १५ दिसंबर २०१५ की स्थिति कायम करते हुए तब की कांग्रेस की नबाम तुकी सरकार को संवैधानिक रूप से बहाल कर दिया गया है ....

मेरी प्रतिक्रिया ....

'उत्तराखंड के बाद अरुणाचल' .... मुझे लगता है जैसे .... 'थप्पड़ के बाद लात' .. वो भी बिल्कुल सही ठिकाने ....

और इसलिए मेरा ऐसा मानना है कि - यदि मोदी जी में शर्म बची हो तो नैतिकता नहीं कुकृत्यों और शर्मनाक हरकतों के कारण इस्तीफ़ा दे देना चाहिए .... क्योंकि मर्यादित लोकतंत्र का तो यही तकाज़ा है !!

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Tuesday, 12 July 2016

// आइये !! भले ही सब मिलकर अपना-अपना माथा कूटें .. पर बिल्कुल शांतिपूर्वक ....//


कुछ दिन पहले जवाबदार जिम्मेदार द्वारा ईद का चाँद दिखने की घोषणा हो गई थी - सबने मिलकर ईद मना ली थी ....

आज जवाबदार जिम्मेदार मोदी जी ने अभी-अभी २ घंटे की माथपच्ची के बाद जम्मू-कश्मीर में शांति बनाए रखने की अपील कर दी है ....

तो आइये सब मिल कर शांत हो जाएँ .. खामोश हो जाएँ .. सब अपने-अपने काम में लग जाएँ .. अपने-अपने घरों में घुस जाएँ .... भले ही सब मिलकर अपना-अपना माथा कूटें !! पर बिल्कुल शांतिपूर्वक - समझे !!

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// प्रधानमंत्री पधार गए हैं .. आइये सब मिलकर अब इंतज़ार करते हैं ....//


हमारे वीर प्रधानमंत्री अफ्रीका से लौट आए हैं - और ये तय हुआ कि उन्हें जम्मू-कश्मीर में बेकाबू हुए हालात की गम्भीरता का एहसास है - क्योंकि आते ही बिना वक्त गवाएं उन्होंने एक उच्च्स्तरीय बैठक बुला ली है - जो अभी चल रही है ....

और मैं कल्पना कर सकता हूँ कि काफी मंत्री संजीदा हो बैठे बैठे बातें कर रहे होंगे - माथपच्ची कर रहे होंगे .... और कुछ देर बाद वे उठेंगे और चल देंगे - और फिर पुराने टाइप के बयान आज की तारीख में दर्ज हो जाएंगे ....

और मैं इंतज़ार कर रहा हूँ बयानों का .. और आस लगाए बैठा हूँ 'एक्शन' का .. जी हाँ !! कल्पना लोक में गोते खाते हुए 'एक्शन' का .... मसलन मोदी जी इस बार दिल्ली सरकार का कोई पुख्ता इलाज कर ही देंगे .. बहुत दिन हुए ये 'आप' वालों ने बहुत परेशान जो कर रखा है ....

अब आपको यदि कुछ भिन्न या भिन्न-भिन्न का इंतज़ार है तो आप भी इंतज़ार करते रहें - यहाँ तो सबको अपनी बुद्धि अनुसार इंतज़ार करने का हक़ जो है .... जैसे यदि आप ८% की जीडीपी का इंतज़ार करना चाहे तो आपको कौन रोक सकता है .... है ना ??

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Monday, 11 July 2016

// मोदी जी !! कांग्रेस मुक्त भारत की हवस - या - आतंक मुक्त जम्मू-कश्मीर की चाह ?? ..//


जम्मू-कश्मीर एक बेहद जटिल संवेदनशील नाज़ुक बहुआयामी महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है .... और मानना होगा कि एक समस्या भी .... और पाकिस्तान की कारगुजारियों के कारण ये समस्या उलझन भरी भी रही है ....

जब पलट कर देखता हूँ तो मुझे एहसास होता है कि कांग्रेस ने उपरोक्त समस्या का बखूबी सामना किया  .... और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर वो सब कुछ किया जिसके परिणाम स्वरुप ही मोदी और उनके भक्त और आप और हम गर्व और संतोष से यह कहने के सक्षम बने रहे कि .... कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था है और रहेगा .... और अब तक पाकिस्तान को भी मुहंतोड़ जवाब दिए जाकर उसे भी उलझाए रखा गया ....

पर कांग्रेस से पूरा देश एकमत हो संतुष्ट भी नहीं हुआ - और सबको यदा-कदा लगता रहा कि इस पेचीदा मामले को सुलझाने के तौर तरीकों में कुछ कमियां रहीं - और शायद कांग्रेस पर तुष्टिकरण के आरोप और शंकाएं भी चिपकती रहीं .... और मादरे वतन पर मर मिटने जैसी लफ़्फ़ाज़ी करने वालों की गालियां भी पड़ती रहीं ....

और इन सबके बीच उदय हुआ मोदी जी का .... जो पाकिस्तान को ललकारते थे और चिल्ला चिल्ला हमें आतंक मुक्त जम्मू-कश्मीर का विश्वास दिलाते थे .... लोगों ने विश्वास किया और मोदी को मौका दिया ....

पर मोदी ने सब कुछ गुड़-गोबर कर दिया लगता है .... जम्मू-कश्मीर समस्या विकराल हो नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है .... और मोदी आतंक मुक्त जम्मू-कश्मीर पर कार्य करने के बजाय कांग्रेस मुक्त भारत बनाने में और केजरीवाल को निपटाने में अपनी सीमित योग्यता खपाते हुए दिख रहे हैं .... उधर पाकिस्तान उन्मुक्त होता जा रहा है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हमें नीचा दिखा रहा है ....

इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर पर भी गंगा जमुनी तहजीब नष्ट हो रही है .. आपसी विश्वास और भाईचारे का लगातार क्षरण होता जा रहा है .... माहौल असहज होता जा रहा है - असहिष्णु होता जा रहा है ....

और इसलिए मैं सोच रहा हूँ कि कल्पना करें कि यदि मोदी भारत को कांग्रेस मुक्त करने में सफल हो गए - और जम्मू-कश्मीर को आतंक मुक्त करने में असफल - तो स्थितियां कितनी भयावह हो जाएंगी ....

वैसे स्थितियां तो अभी हाल में भी भयावह ही दिख रही हैं .. बस विवेचना और आंकलन के साथ पूर्वानुमान लगाने की क्षमता चाहिए ....

ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ कि मैनें पहले कभी भी ना तो ज़ाकिर नाईक या ही बुरहान वानी का नाम सुना था  .... पर एक दम से ये दोनों समस्या पटल पर उभरे और स्थितियों को बेहद बेकार और बेकाबू बना गए .. और अभी और नाईक या बुरहान उचक कर समस्या पटल पर दस्तक नहीं देंगे ऐसा मानना भी मुंह बाएं खड़ी समस्याओं से आँखे मोड़ना होगा .... और तब क्या हो सकेगा - क्या हम इसके लिए तैयार हैं ?? ....इसका समाधानकारक जवाब मुझे अभी दूर दूर तक दिख नहीं रहा है ....

अतः मोदी जी से अपेक्षा है और समझाइश भी और प्रार्थना भी कि - भारत को कांग्रेस मुक्त बनाने जैसी हसरत और हवस पूरी करने के बजाय कम से कम जम्मू-कश्मीर को आतंक मुक्त करने के त्वरित प्रयास करते दिखें .... और इसके लिए शायद बेहतर होगा टकराव का रास्ता छोड़ें और सबका सहयोग और समझाइश ले आगे बढ़ें .... और पीडीपी वाली बुआ से सजग और सावधान रहें .... 

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Sunday, 10 July 2016

// ज़ाकिर नाईक को खंगाला जा रहा है - घेरने का प्रयास पूरा है .. मकसद ?? ..//


मैं देख रहा हूँ कि ज़ाकिर नाईक को अब खंगाला जा रहा है .. बकौल मीडिया और सरकारी बयानों के - काफी लोग और एजेंसियां इस काम में लगाईं गई हैं कि देखो ज़ाकिर नाईक के पिछले कई वर्षों में दिए गए सैकड़ों हज़ारों तकरीरों में कुछ तो ऐसा ढूँढो जो आपत्तिजनक हो या फिर ठहराया जा सके .... और बिल्कुल स्पष्ट कर दूँ कि - मुझे इसमें कोई भी आपत्ति नहीं और ना किसी को भी होनी चाहिए .... क्योंकि कानून और देश से बड़ा कोई नहीं ....

पर समय बहुत निकल गया .... अब तक सामने तो कुछ आया नहीं .. और ना ही ज़ाकिर नाईक के विरुद्ध कोई कार्यवाही ही हुई .. और कार्यवाही तो दूर - यहाँ तक कि अब तक उनके विरुद्ध कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज होने की बात भी सामने नहीं आई ....

इस परिप्रेक्ष्य में मुझे एक बात तो समझ आती है कि ज़ाकिर नाईक निश्चित ही अभिजीत या योगी या तोगड़िया या ओवैसी या आजम खान या खेर या रामदेव जैसे बयानवीरों या अन्य बड़े बड़बोले नेताओं जैसे दोयम दर्जे के नहीं है .... और निश्चित ही वो एक स्कॉलर ही हैं - जिन्हें लाखों लोग लगातार सुनते आ रहे हैं .... तथा हो सकता है कि १०-१२ वर्षों तक हज़्ज़ारों घंटे बोलते हुए कभी कभार उनसे गलत बात भी कहने में आई हो - या उनके कुछ विचार भी गलत ही हों - क्योंकि आखिर तो वो भी कोई खुदा नहीं .... पर वो गलत बातें भी कानूनी रूप से सजा योग्य ही हों ऐसा भी लगता तो नहीं ....

और हाँ यदि ज़ाकिर नाईक के अपराध वित्तीय संबंधित हों तो भी मैं उसे इस वृहद परिप्रेक्ष्य के बाहर ही देखूँगा - क्योंकि तब तो मुझे उनकी तुलना विजय माल्या या शीला या खड़से या अमिताभ या आसाराम से भी करनी होगी .... 

और निश्चित रूप से ये बात भी दीगर ही है कि उनकी बातें किस को सही लगीं या किसको गलत .. क्योंकि सुनने वाले भी कोई खुदा नहीं .. और सभी समझदार भी नहीं - और सभी बेवकूफ भी नहीं ....

अस्तु अब प्रथम दृष्टया तो मुझे यही समझ आता है कि .. इस सरकार की कार्यप्रणाली नीयत मंशा और मकसद पर भरोसा ना करने का एक और कारण सामने है - और वो है बांग्लादेश के मार्फ़त सामने आया मुंबई निवासी ज़ाकिर नाईक प्रकरण .... क्योंकि यदि ज़ाकिर नाईक साहब एक स्कॉलर हैं तो भी - और यदि ज़ाकिर नाईक में कुछ अपराधिक तत्व हो तो भी ....

और हो सकता है आपके विचार मुझ से भिन्न हों - जो आपको मुबारक हो मुझे स्वीकार्य - धन्यवाद !!

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Saturday, 9 July 2016

// हे ऊपरवाले !! नाप तोल के छोड़ - यहां नीचे बहुत बड़ी बड़ी छोड़ने वाले बैठे हैं ....//


पानी नहीं गिरे तो सूखा और सूखा राहत में भ्रष्टाचार के मजे ....
पानी कम गिरे - या ओले गिरे - या मउठा गिरे - गर्मी ज्यादा पड़ जाए - या ठण्ड ज्यादा पड़ जाए .. तो भी सरकारी स्याप्पे के नाटक के बाद भ्रष्टाचार के मजे ....

और अब बहुत सूखे के बाद - ना-ना करते मध्यप्रदेश में बारिश की शुरुआत हुई .... और मेरे हिसाब से देर से हुई सामान्य हुई या सामान्य से थोड़ी अधिक हो गई .... और सरकारी भ्रष्टाचार के रहते बने निम्न गुणवत्ता के महंगे बांध पुल सड़कें वगैरह टूट-फूट गए - और फिर नदी नालों पर अतिक्रमण के रहते कुछ शहरों में पानी निकासी प्रभावित हो वहां बाढ़ की स्थिति बन गई ....

और बस अब घिसे पिटे बेशर्म बयान आने लगे कि ये प्राकृतिक विपदा आई है - नुकसान हो गया है - सरकार पूरी तरह से तैयार है - हर संभव मदद की जाएगी - इफरात में राहत जारी की जाएगी .. सारे गुणा भाग लगा लिए गए हैं .. १०० में कहाँ कितने - हमारे कितने - तुम्हारे कितने .. बस उसके कितने की बात मत करना ....

इसलिए हे उपरवाले अब तो तुझ को ही समझाइश है कि थोड़ा तराज़ू लेकर बैठ - नाप तोल के छोड़ .... यहां नीचे बहुत बड़ी बड़ी छोड़ने वाले बैठे हैं - तुझे बदनाम कर देंगे .... तेरा ही नाम ले ले कर तुझे ही शर्मसार कर देंगे - और तेरा ही नाम ले तेरे ही मत्थे - 'राहत' राशि से 'ऐश' कर लेंगे ....

हे ऊपरवाले तेरी कस्सम !! यदि तूने ३-४ साल नाप तोल के छोड़ दी ना - तो ये सारे सरकारी भ्रष्ट स्वतः ही नप जाएंगे .... कटोरा ले भीख मांगेंगे .... तेरे दर पर आकर मन्नत मांगेंगे कि हे भगवान् या तो सूखा दे या बाढ़ दे .... कुछ तो कर - रहम कर ....

अस्तु हे ईश्वर !! .. तू कुछ भी कर पर रहम सरकारी भ्रष्टों पर मत कर .... और १००% नाप तोल के छोड़ !! ....
बाक़ी तेरी मर्ज़ी .... 

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// सावधान !! अब कानून के हाथ छोटे पड़ गए हैं और मुजरिमों के लम्बे हो चले हैं ....//


इंग्लैंड में जेटली जैसी यूनिफार्म पहन अपनी इज़्ज़त बढ़ाते हाई प्रोफाइल उड़ते धन्धेबाज विजय माल्या ने अपनी सार्वजनिक उपस्थिति के दौरान बड़ी शान के साथ घोषणा करी कि - वो भारत नहीं लौट रहा है ....

और भारत में बैठे बैठाए उनके दोस्तों और हमदर्दों और साथियों और मददगारों से कोई वांछित प्रतिक्रिया नहीं आई ....

पर चूँकि ना मैं कभी टाई सूट पहनता हूँ और ना ही मैं माल्या मोदी और उनके संगी साथियों का पक्षधर हूँ - इसलिए मेरी प्रतिक्रिया ....

जब आपका क़ानून अपना काम तमाम करते हुए एक मुजरिम को बचाने में मददगार हो जाए ....
और जब मुजरिम ही कानून बनाने या बनवाने के काम में लग जाएँ ....
तो समझ लीजिएगा कि कानून के हाथ छोटे पड़ गए हैं और मुजरिमों के हाथ बहुत लम्बे हो आपकी गर्दन तक पहुँचने ही वाले हैं ....

और याद दिला दूँ - आपके कानून के हाथ अब तक ललित मोदी की गर्दन तक ना पहुंचे हैं ना पहुँचते दिख रहे हैं .... 

अतः सावधान .... कानून बदलने होंगे - और उसके पहले कानून बनाने वाले बदलने होंगे ....

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