Thursday, 15 September 2016

// आज इंजीनियर्स डे है .. क्षमायाचना के साथ शुभकामनाएं ....//


आज इंजीनियर्स डे है .. और मैं स्वयं एक इंजीनियर होने के नाते अपने दीर्घ अनुभव से कह सकता हूँ कि इंजीनियर्स ने इस देश को बहुत कुछ दिया है .... और हमारे में प्रतिभा और व्यावसायिक योग्यता की कत्तई कोई भी कमी नहीं है ....

पर ना जाने क्यों मुझे लगता है कि हम इंजीनियर्स देश की प्रतिभाओं में उच्च स्थान प्राप्त करते हुए भी सदैव ही भ्रष्ट नेताओं के अधीनस्थ कसमसाते हुए ही कार्य करते रहे हैं .... और भ्रष्टाचार रोकने में विशेष सहयोग तो दूर - शनैः शनैः भ्रष्टाचार में सहभागी होते गए हैं .... भ्रष्टाचारी होते गए हैं ....

मुझे नहीं मालुम की इंजीनियर्स के समतुल्य प्रतिभा के डॉक्टर्स या फिर शिक्षक या लॉयर्स आदि इंजीनियर्स से कम या ज्यादा भ्रष्टाचारी हैं .... पर ये मालुम है कि यदि केवल इंजीनियर्स ही अपनी प्रतिभा और योग्यता के बल पर भ्रष्टाचार विरुद्ध संयमित प्रयास करते तो आज यकीनन देश में कई बुलेट ट्रेनें तो दौड़ ही रही होतीं और मोदी इसका लॉलीपॉप दिखा सत्ता में नहीं होते .... 

और शायद उच्च प्रतिभा के धनी कोई इंजीनियर या डॉक्टर या शिक्षक ही हमारे राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री होते .. और यह देश इंजीनियर्स और अन्य पढ़े लिखे काबिल लोगों के भ्रष्टाचार का रोना भी नहीं रो रहा होता ....

इसलिए समाज के अन्य समुदायों और संगठनों से इंजीनियर्स की तरफ से क्षमा याचना करते हुए .... सभी को इंजीनियर्स डे की शुभकामनाएं .... धन्यवाद !!

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Wednesday, 14 September 2016

// चिकनगुनिया - डेंगू - मलेरिया ... बनाम ... मुलायम - शिवपाल - अखिलेश ....//


पूरे भारत में केवल दिल्ली विषयक आजकल चिकनगुनिया - डेंगू - मलेरिया की चर्चाएं हैं ....
और 'उत्तापदेस' विषयक आज मुलायम - शिवपाल - अखिलेश भन्नाए रहे ....

ये छः की छः बीमारियां बड़ी खतरनाक हैं ....

ये शहाबुद्दीन और मुहम्मद कैफ और तड़ीपार से भी ज्यादा हत्यारी हैं ....
और ये अर्नब गोस्वामी और अंजना ओम कश्यप दीपक चौरसिया से भी ज्यादा विषैली हैं ....

और ये सभी बीमारियां आज सड़े गले बुद्धू बक्से से लगातार फैलती रहीं .... भिन्न भिन्न भिन्नाती रहीं .... और दिन भर मैं मच्छरों के क्लोज-अप के साथ इन नकाब चढ़े डड्डूनुमा चेहरों को भी देखता रहा ....

सावधान !! इनसे सजग और सावधान रहने की आवश्यकता है .. और समझदारी की भी .... हर बीमारी का ठीकरा बेचारे मच्छर पर फोड़ने से काम नहीं चलेगा .... ये नकाब चढ़े चेहरों का फॉगिंग भी अति आवश्यक है .... समझे !!

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// जिओ गडकरी जिओ .... अच्छे दिन आ गए .... गले की हड्डी निकल गई ....//


कल रात गडकरी ने कहा था .. अच्छे दिन कभी नहीं आते - मोदी का "अच्छे दिन" का नारा 'गले की हड्डी' बन गया है ....
सुबह तक लगता है 'गले की हड्डी' निकल गई है ....



Tuesday, 13 September 2016

// पहचान कौन ?? .. बॉस कौन ?? ....//


दिल्ली के परखूँजीवी गन्दी नाली की गन्दगी पसंद इधर उधर उड़ने वाले भुन्न भुन्न करने वाले काले सफ़ेद छोटे मोटे डेंगू मलेरिया चिकनगुनिया के नाम से दहशत फैलाने वाले पत्रकारों से यदि एक थप्पड़ लगा कर कोई आमजन ये पूछे कि बता तो रे - ये दिल्ली का बॉस कौन ?? .. तो वो बोलेगा .. "मच्छर" ....

वो इसलिए कि असली बॉस ने पत्रकारों के बॉस की ऐसी तैसी कर दी है - जवाबदारों को बुखार आ गया है .. अब संपट ही नहीं बैठ रही है कि बॉस कौन ?? .... 

जो बॉस है उसे बॉस मान नहीं सकते ....
जो बॉस नहीं है वो घोषित बॉस है ....
और जो घोषित बॉस है वो बॉस है ही नहीं ....
और जो बॉस है ही नहीं वो नदारद भी है ....

और मच्छर हैं जो बिना भेदभाव - बिना पहचाने कि बॉस कौन - ऐश कर रहे हैं ....

और पत्रकार बौराए बौराए अपने अपने स्टूडियो में बैठकर भन्न-भन्नाने लगे हैं - डेंगू - मलेरिया - चिकनगुनिया - केजरीवाल - दिल्ली सरकार - मंत्री बाहर - मंत्री गायब - हाय रे केजरीवाल - हाय रे केजरीवाल .... 

और इस बीच बॉस बेंगलुरु में स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं .... क्योंकि वो अब बॉस नहीं माने जा रहे हैं .... और पूछ रहे हैं .. पहचान कौन ?? - बॉस कौन ?? - ये पत्रकार कौन ?? ....

इसलिए मेरा भी दिल्ली के समस्त पत्रकारों को समझाइश है कि पहचान कौन ?? - बॉस कौन ?? ....

और जब तक पहचान नहीं लो तब तक रोते रहो - कलपते रहो - भन्न भन्नाते रहो - कीटनाशक छिडकवाते रहो - अस्पताल में अपना इलाज कराते रहो .... बास ! बॉस !! बॉस !!! करते रहो .. और काटते रहो .... जनता ससमय जिसको भी समझाना होगा समझा देगी और समझ भी जाएगी कि बॉस कौन ?? .. और यदि नहीं समझी तो नहीं समझी .. बॉस समझा ही देंगे .. सबकुछ समझा देंगे ....

और बॉस यह भी समझा देंगे कि समस्या केवल दिल्ली में ही क्यों ?? .. और ये राष्ट्रीय पत्रकार केवल दिल्ली तक ही सीमित क्यों ?? .... और ये मच्छरी पत्रकार आजकल काटते क्यों ?? 

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// राज्यपाल बेइज़्ज़त - उपराज्पाल की फजीहत .. अन्ना को सलाह ....//


प्रारम्भिक उद्घोषणा : -  मैं दिल का साफ़ व्यक्ति - इसलिए शुरू में ही काँच माफ़िक़ साफ़ करना चाहूँगा कि मेरे इस लेख का माननीय भक्तों के साहब से - माननीय अरुणाचल के भूतपूर्व राज्यपाल राजखोवा से - और माननीय दिल्ली के अभूतपूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग से  - अप्रत्यक्ष रूप से कोई लेना देना नहीं है - एवं मेरा ये लेख काल्पनिक है .. पर हाँ लेख में ठूंसे गए अंतिम दो पात्र काल्पनिक नहीं हैं .... इसलिए बिंदास पढ़ें और लेख के सार की कल्पना ज़रूर करें ....

माननीय राजखाउ इधर आ .... आया साहब .... उठ .. उठ गया .... बैठ जा .. बैठ गया .... जैसा कहा है वैसा करते जाना .. जी साहब !! .... 

सुन बे - जैसा बोला वैसा लिख ला .. ओके .... ठीक - गुड - साइन कर दे .. ये लो साहब !! ....
अरे माननीय इधर आ तो .. यहाँ अंगूठा लगा तो .. ये लो साहब !! ....

सब ठीक हो गया .. बढ़िया हो गया .. धन्यवाद माननीय !! .... अरे साहब - आप भी ना !! .....

पर अन्य माननीय ने आदेश दे दिया .... माननीय आपने ये जो किया सब गलत - सब असंवैधानिक - सब गुड़गोबर - इसलिए आपके किये पर पानी फेरा जाता है ....

साहब कुंठित !! .... माननीय सन्न !! ....

अबे माननीय - इधर आ तो .. क्यों रे - ये क्या किया ?? .... साहब जो आपने कहा वो किया .... जबान लड़ाता है .. चल निकल तो यहाँ से .... कहाँ से ?? .... अबे पतली गली से निकल ले बे .... 

नहीं निकलता जा .... तो धक्के मार कर बेइज़्ज़त करके निकाल दूंगा .... निकाल दे जा !! ....

और उसे निकाल दिया गया  .... इस तरह एक माननीय माने जा रहे राज्यपाल को बेइज़्ज़त कर दिया गया .... 

और साहब के राज्य में एक अजीब उपराज्यपाल भी तो है ....

इधर आ - उठ - बैठ जा - जैसा कहा है वैसा करता जा - सुन जैसा बोला वैसा लिख ला - साइन कर - इधर अंगूठा लगा .. यहां तक तो सब ठीक था .... पर .......... अबे इधर आ - उस शरीफ को कौन पकड़वाएगा - और उस गुंडे को कौन छुड़वाएगा ?? .... ये सड़कों पर से कचरा कौन उठवाएगा ?? .... ये जल भराव क्यों हुआ ?? .. कुछ करता क्यूँ नहीं ?? .. ये नालियां कौन साफ़ कराएगा ?? ....

जी साहब मैं सब कुछ करवाता हूँ ....

और इस तरह एक उपराज्यपाल की फजीहत जारी है ....

अपरोक्त काल्पनिक यथास्थिति के परिप्रेक्ष्य में मेरी एक और माननीय बुज़ुर्ग अन्ना जी को नेक मुफ्त सलाह ....

अन्ना जी !! .. आपने कहा था कि अपमान सहने की क्षमता बहुत जरूरी है .. और मैंने देखा भी है कि आपकी कितनी ही बेइज़्ज़ती की जाए - आप विचलित नहीं होते हो .... इसलिए मेरा सुझाव है कि आपको जब भी साहब का ऑफर आए तो आप कहीं के भी राज्यपाल का पद तो स्वीकार्य कर लेना - पर उपराज्यपाल का नहीं .... क्योंकि आपको बेइज़्ज़ती तो रास आ जाएगी .. पर आपसे इस बुढ़ापे में फ़ज़ीहत सहन करते नहीं बनेगी - और मुझे भी अच्छा- बुरा नहीं लगेगा .... इस फ़ज़ीहत के लिए तो आपकी पुड्डुचेरी भेजी गई अनुशासित शिष्या किरण ही उपयुक्त थी ....

अन्ना !! आशा करता हूँ आप मेरी सलाह को अन्यथा नहीं लेंगे - और राज्यपाल बनने के बाद किसी भी स्थिति में किसी भी "पक्ष-पार्टी" से दूर रहकर राज्यपाल के पद की गरिमा को बनाए रखेंगे .... आपका धन्यवाद स्वीकारते हुए - !! जय हिन्द !!

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Monday, 12 September 2016

// कर्नाटक-तमिलनाडु कावेरी जल विवाद के बीच में भी केजरीवाल ?? ....//


पंजाब - हरयाणा पानी बंटवारा विवाद भी काफी पुराना है ... सतलज-यमुना लिंक योजना इसके केंद्र में रही है .. और कुछ माह पहले यह तरोताज़ा तब हो गया था जब इसमें केजरीवाल पंजाब का पक्ष ले कूद पड़े थे .... और जैसे ही केजरीवाल कूदे थे टपक तपाक सब ने छलांग लगा विवाद में डुबकी दे देकर नहाने धोने की अपनी नैतिक क्रिया पूर्ण कर ली थी .... पर जब तक विरोधियों को गुमान होता कि केजरीवाल घिराने वाले हैं - इलाके सूबे में पानी ही पानी भरा गया .. और विरोधियों की अटेंशन डाइवर्ट हो गई .. वो पिल पड़े केजरी को दिल्ली पानी भराव के चक्कर में घेरने ....

पर तब तक केजरीवाल की जिम्मेदारी भी डाइवर्ट हो गई .... और जिम्मेदारी ठप्प से पड़ गई एलजी के परकंधो पर .... और चपल केजरीवाल फिर से बिना घिरे निकल लिए .... और इस प्रकार पंजाब - हरयाणा पानी बंटवारा विवाद टल गया - आने वाले वर्षों में उग्र रूप लेने तक ....

तो क्या ये जल विवाद फिर से उठेगा ?? .. जी हाँ शर्तिया उठेगा .... क्यों ?? .. क्योंकि अगली गर्मियों तक तो पंजाब में केजरीवाल की सरकार होगी - और 'हरयाणा के केंद्र में' और केंद्र में मिर्ची लगी होगी - आग लग रही होगी - खट्टर-पट्टर हो रही होगी .... इसलिए ये विवाद उठ कर रहेगा ....

तो क्या इस विवाद के केंद्र बिंदु भी केजरीवाल होंगे ?? ....

जी हाँ आंशिक रूप से तो ऐसा मानना ही पड़ेगा .... और इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है कि कर्नाटक तमिलनाडु के बीच कावेरी पानी बंटवारा विवाद भी तो कितना पुराना है .. है ना ?? .... पर विवाद इतना तो कभी उग्र नहीं हुआ होगा जितना आज हो गया .... बेंगलुरु में उग्र प्रदर्शन और आगजनी शुरू हो गई है .... स्थिति नियंत्रण में बताई जाकर नियंत्रण के बाहर दिख रही है ....

पर इसमें केजरीवाल कहाँ से बीच में आ गए ??

आ गए - बिलकुल आ गए जी !! .. वो आज ही तो बेंगलुरु पहुँच रहे हैं .. बस अपना गला साफ़ करने .. और परिणाम आपके सामने हैं ....

तो क्या अब देश में नदियों के जल बंटवारे संबंधित सभी विवादों में केजरीवाल संलिप्त पाए जाएंगे ??

जी हाँ तय है - ऐसा ही होगा - क्योंकि मोदी कुछ करेंगे या कर पाएंगे लगता नहीं .... इनकी छाती यकीनन ५६ इंची नहीं - और दम-गुर्दे तो बिल्कुल भी नहीं .... ये विवाद उत्पन्न करने में तो माहिर हैं पर विवाद सुलझाने लायक नहीं .. और इसलिए ये २०१९ के बाद पीएम भी नहीं .... 

इसलिए देश के सभी जल बंटवारे का निपटारा लगता है केजरीवाल को ही तो करना होगा .. है ना !!

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// भक्तों के बारे में मेरी सुस्पष्ट उधेड़बुन ....//


साधू शैतान हो जाए .. या शैतान साधू के वेश में आ जाए .... दोनों में फर्क है .... और फर्क दिखता झीना सा है - पर है बहुत बड़ा ....

और फर्क समझने के लिए आप सोचें रामदेव बाबा के बारे में आपके क्या विचार हैं .. क्या वो साधू शैतान है ?? .. या वो शैतान साधू है ?? ....

मित्रो अब आप तो ठहरे समझदार . मनन करेंगे और समझ जाएंगे - पर ये भक्त इतनी आसानी से नहीं समझेंगे .... तो इसलिए भक्तों के लिए अतिरिक्त सहायक उद्धरण देता हूँ ....

भक्तों सोचो कि .... नेता फेंके - या फेंकू नेता बन जाए .. देश को ज्यादा नुक्सान कब होगा ??....

या फिर ....

कोई नेता क्रांतिकारी हो जाए - या क्रांतिकारी नेता बन जाए .. देश का ज्यादा फायदा कब होगा ?? ....

नहीं समझ आया ना ???? .... ठीक है तो मैं और ठेठ आसान शब्दों में समझाता हूँ ....

रामदेव साधू नहीं ....
मोदी देश के लिए नुक्सानदेह .... 
और अरविन्द केजरीवाल देश के लिए फायदेमंद .... हा ! हा !! हा !!! ....

क्या कहा ?? अभी भी नहीं समझे ?? .... बाय गॉड की कसम .. भक्त कुछ समझते ही नहीं ....

और मैं सोच रहा हूँ कि .. क्या भक्त मंदबुद्धि हैं ?? .. या मंदबुद्धि भक्त हो गए हैं ?? ....

मित्रो !! .. आप भी सोचियेगा .... धन्यवाद !! जय हिन्द !!

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