My blog is my reaction and analysis of the current Political and Social affairs of our country - India.
Saturday, 31 December 2016
/.. उफ्फ्फ !! .. बचे मितरों बचे .. मोदी ने राष्ट्र के नाम अभी-अभी समाप्त किए अपने लम्बे संदेश में ऐसा कुछ नहीं कहा जिसे चिंतनीय कहा जा सके - और वो ऐसा कुछ कहते भी नहीं जिस पर चिंतन किया जा सके .. .. इसलिए मैं सोचता हूँ कि इसी ख़ुशी के साथ अफलातून २०१६ को विदाई दे दी जाए और २०१७ का बिंदास स्वागत किया जाए .. इस उम्मीद के साथ कि २०१७ 'कैशमय' ही रहे .. .. आप सभी को नववर्ष की शुभकामनाएं !! ..../.... मेरे दिमाग की बातें - दिल से .. ब्रह्म प्रकाश दुआ
/.. कल मुलायम द्वारा पार्टी से निकाले गए अखिलेश आज वापस ले लिए गए .. .. अब अखिलेश कब फिर से निकाले जाएंगे पक्का पक्का कह नहीं सकता .. पर एक बात पक्की है कि आज शाम को यह तय हो जाएगा कि मोदी और मुलायम में पलटी मारने में कौन अव्वल ?? .. .. और मुझे लगता है कि यदि दोपहर तक शिवपाल इस्तीफ़ा दे दें - जो नामंज़ूर हो शाम तक वापस ले लिया जाए - तो फिर मुलायम मोदी से बाज़ी मार सकते हैं .. .. या फिर मोदी आज शाम घोषणा कर दें कि १ जनवरी से पुराना १००० का नोट पुनः वैध होगा - या फिर ऐसी ही कोई विचित्र घोषणा कर दें - तो बाज़ी मोदी जी के नाम ही रहेगी .. .. पर यदि रात तक अरविन्द केजरीवाल ये घोषणा कर दें कि वो भी उत्तरप्रदेश चुनाव में शिरकत करेंगे - तो फिर तो मुझे लगता है बाज़ी मुलायम और मोदी के हाथ से निकल जाएगी .. .. समझे ना !! ..../.... मेरे दिमाग की बातें - दिल से .. ब्रह्म प्रकाश दुआ
/.. कल मुलायम बोले थे - अगला मुख्यमंत्री वो तय करेंगे .. मुलायम को सूचित हो कि मुख्यमंत्री का पद रिक्त ही नहीं हुआ है .. .. और कल ही भाजपा ने दावा किया था कि अगला मुख्यमंत्री भाजपा का होगा .. भाजपा को सूचित हो कि अखिलेश सपा से निकाले जाने के बाद भाजपा ज्वाइन नहीं करेंगे .. .. और कल ही मायावती ने भी दावा किया था कि बसपा ही जीतेगी .. बहनजी को सूचित हो कि लड़ाई बाप बेटे की है - इस बार बहन का स्कोप ना के बराबर है .. .. और कल पूरा दिन निकल गया कांग्रेस ने दावा तक नहीं किया कि अगली मुख्यमंत्री शीला दिक्षित होंगी .. कांग्रेस को सूचित हो कि उनकी सोच बिल्कुल सही है .. .. क्योंकि शायद कांग्रेस इस बार मुख्यमंत्री बनवाएगी .. ../.... मेरे दिमाग की बातें - दिल से .. ब्रह्म प्रकाश दुआ
/.. उत्तरप्रदेश के घटनाक्रम की स्थितियां और परिस्थितियां अपेक्षानुसार ही अब परिलिक्षित हो रही हैं .. और लोग कह रहे हैं - "बेटा बाप पर भारी पड़ गया" .. .. ठीक भी है - मुलायम की मीटिंग में ११ विधायक पहुंचे हैं - और अखिलेश की मीटिंग में करीब २०० विधायक पहुँच गए हैं .. इसलिए मेरा मत है कि "बेटा बाप पर भारी पड़ गया" के बजाय ये कहना उपयुक्त रहेगा कि - "अकेले बेटे ने बाप चाचा और अंकल को दे पटक मारा रे !!!!" ..../.... मेरे दिमाग की बातें - दिल से .. ब्रह्म प्रकाश दुआ
Friday, 30 December 2016
/.. मुलायम ने अखिलेश को पार्टी से निकाल दिया है - और मेरे आंकलन अनुसार ..... अब पूर्व से संभावित राहुल और अखिलेश मिलकर चुनाव लड़ेंगे - और संभवतः समस्त गुणा-भाग के बाद अखिलेश ही अगले मुख्यमंत्री बनेंगे .. .. एक बात और .. अंततः जिस अंतिम मुद्दे पर पार्टी टूटी वो रहा दागियों और बाहुबलियों को टिकट देने या ना देने का - और अखिलेश ने यहां बाज़ी मार ली .. .. और शायद एक तो इस कारण से - और एक सहानुभूति की लहर के कारण - और फिर अखिलेश द्वारा मुख्यमंत्री रहते हुए कुछ अच्छे कार्यों का सफलतापूर्वक प्रचार होने के कारण - और अखिलेश द्वारा अपनी व्यक्तिगत छवि बना लेने के कारण - अखिलेश के ही जीतने की संभावना बढ़ गई है - और बद एवं बदनाम मुलायम-शिवपाल का पतन अब तय लगता है ..../.... मेरे दिमाग की बातें - दिल से .. ब्रह्म प्रकाश दुआ
// मोदी जी घोषणा कर ही दो कि अच्छे दिन आ गए .. शरमा इतरा क्यों रहे हो जी ?? ....//
नोटबंदी के ५० दिन पूरे .. और फायदे ही फायदे .. टैक्स ज्यादा आ गया .. कालाधन बाहर आ गया .. रवी की बुवाई भी अधिक ही हो गई .. पर्यटन भी बढ़ा .. आतंकवाद नक्सलवाद माओवाद की कमर टूटी .. पाकिस्तान का भी मुहँ टूटा .. म्यूच्यूअल फण्ड और लाइफ इंश्योरैंस में बढ़ोतरी हो गई .. अब लोगों को कोई परेशानी नहीं बची .. अर्थव्यवस्था पर कोई विपरीत प्रभाव पड़ा नहीं .. रोज़गार कम होने वाला नहीं .. किसान का भला होगा - व्यापार करना भी आसान होगा .. रिज़र्व बैंक के पास पर्याप्त करेंसी उपलब्ध .. किसी ईमानदार को कोई फ़िक्र नहीं .. कोई बेईमान बेफिक्र नहीं .. .. और तो और महँगाई भी काबू में आ गई .. विशेषकर सब्जियां सस्ती .. भाजपा चुनाव भी जीत गई .. यानि जनता भी खुश - सरकार भी खुश - बैंक भी खुश - बैंक के चोर ग्राहक भी खुश - कैशलेस और ई-पेमेंट में भी बढ़ोतरी .. और मोदी भी खुश .. .. अब क्या ढाई साल में एक चायवाले से इससे ज्यादा तनिक भी उपलब्धि संभव हो सकती थी ?? ....
तो मोदी जी अब तो घोषणा कर ही दो कि अच्छे दिन आ गए .. ऐसे छुई मुई नई नवेली ब्याहता जैसे शरमा इतरा क्यों रहे हो जी ?? .. .. बल्कि मैं तो सलाह दूंगा कि घोषणा कर दो कि अब तो अच्छों अच्छों के दिन आ गए .. .. और आ के लद भी गए .. ..
और एक मुफ्त वाली सलाह भी .. ख़ुशी के ऐसे आलम में पिछले ६०-७० साल का विलाप करना छोड़ दो - नहीं तो ऐसा लगता है कि सर्दियों की रात में कुत्ता फ़ोकट अलाप रहा है - मानों उसे ठण्ड लग रही हो !?!? .. ..
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Thursday, 29 December 2016
// तो करवा लो जाँच - जो तुम में हो औकात .. समझे ?? ....//
मैं क्यों ना मानूं कि सहारा लेन-देन दस्तावेजों में क्योंकि मोदी के साथ शीला दीक्षित के अलावा और भी कई मुख्यमंत्रियों के नाम थे इसलिए ना कोई जाँच हुई - ना होगी .. और ना किसी की औकात जो कुछ कर ले .. और ना किसी जवाबदार को कुछ करने की आवश्यकता .. और ना किसी में हिम्मत .. और ना किसी में नैतिकता !! .. ..
और क्योंकि ना जाँच हुई ना जाँच होगी - तो मैं क्यूँ ना मानूं कि मोदी समेत सभी ने सहारा से भारी रकम किसी रिश्वत के रूप में सादर ग्रहण करी ही होगी .. .. और मैं ये क्यूँ ना मानूं कि राहुल गाँधी ने केजरीवाल या प्रशांत भूषण द्वारा पहले ही सार्वजनिक किये जा चुके इस मुद्दे को केवल चेताने के लिए ही बखूबी उछाला कि -"हम तो डूबे हैं सनम तुमको भी ले डूबेंगे" !! .. ..
और मित्रो जब एक बार फिर कीर्ति आज़ाद ने अरुण जेटली पर सैंकड़ो करोड़ों की अर्जित दौलत पर प्रश्न खड़े कर दिए हैं तो मैं क्यूँ ना मानूं कि जब तक कभी ना संभव होने वाली जाँच नहीं होती तब तक जेटली अपराधी .. ..
और क्योंकि बसपा जैसी क्षेत्रीय पार्टी १०० करोड़ से ज्यादा की रकम अपने बैंक खातों में डलवा देती है तो फिर क्या भाजपा जैसी पार्टी के पास कुछ भी धन ना रहा होगा ?? .. और रहा होगा तो क्या बसपा से कम या ज्यादा ?? .. और यदि बसपा से ज्यादा तो फिर भाजपा भी बसपा से ज्यादा दोषी या कम ?? .. या सभी पार्टियों निर्दोष और जनता मूर्ख ?? .. ..
और क्योंकि अब तक जेटली या मोदी के पद पर बने रहते यह तक मालुम ना पड़ने दिया गया है कि 13,860 करोड़ की अघोषित संपत्ति का खुलासा करने वाले महेश शाह के पास किसकी अघोषित संपत्ति थी तब तक मैं क्यों ना मानूं कि संपत्ति भक्तों या भाजपाइयों की ही थी ?? .. ..
और क्यों ना मानूं कि यदि मुंडे परिवार को भी किसी जाँच से बख्श दिया गया है तो फिर गड़बड़ तो होगी ही ?? .. ..
और क्योंकि अब तो स्वघोषित ५० दिन भी पूरे हो गए पर नोटबंदी से राहत तो दूर नोटबंदी के दुष्परिणाम और ज्यादा साल रहे हैं .. तो क्यों ना मानूं कि मोदी जी ने जनता के साथ किसी अन्य अनपयुक्त कारण के खिलवाड़ कर मारा ?? .. .. और क्यों ना मानूं कि इन्हीं कारणों से अभी तक एक भी अपराधी ना तो जेल गया और ना जाएगा - और जाएगा भी तो निकल आएगा - या निकलवा लिया जाएगा ?? .. ..
क्या कहा ?? .. बिना सबूत कुछ भी मानना गलत ???? ..
तो फिर क्या बिना सबूत ये मान लिया जाए कि मोदी गंगा जैसे पवित्र ???? ..
यानि सबूतों की दरकार तो हर हालत में है .. पर बिना जाँच सबूत मिलने वाले नहीं - और जाँच होनी नहीं .. तो फिर किया क्या जाए ??
मित्रो मेरा दिल-दिमाग ये मानने को तैयार नहीं कि मोदी गंगा जैसे पवित्र - और भाजपा व भाजपाई निष्कलंक .. इसलिए मैं तो यही मानता हूँ कि मोदी पहले भी खाते रहे - अब भी खा रहे हैं - और खाने दे रहे हैं .... और जिसको मेरी बात से आपत्ति हो उससे मेरी प्यार भरी प्रार्थना .. .. तो करवा लो जाँच - जो तुम में हो औकात .. समझे ??
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