Monday, 8 May 2017

// अभियुक्त शीला - दोषी केजरी - मोदी फुरसती - कपिल परेशान .. बेवकूफी या बेशर्मी ?..//


यदि ये सत्य गलती से भी एक बार स्वीकार्य कर लिया जाए कि दिल्ली के टैंकर घोटाले में शीला दीक्षित अभियुक्त हो दोषी होंगी .. तो फिर कुछ बेवकूफों को ये समझ क्यों नहीं पड़ रही है कि केजरीवाल शीला दीक्षित को और मोदी केजरीवाल को इतने लम्बे समय से बचाते क्यों फिर रहे हैं ?? .. और ये कपिल मिश्रा बेचारा अकेला गधे जैसा हलाकान परेशान हो टैंकर घोटाले पर कार्यवाही की मांग को लेकर इतना प्रखर क्यों होते जा रहा है ?? .. .. 

कहीं ऐसा तो नहीं कि टुच्चे बेवकूफों के सत्ता में रहते शीला दीक्षित - जो भाजपा में जाने के पहले अब तक कांग्रेस में बनी हुई हैं - को छोड़ टैंकर घोटाले में सजा केजरीवाल को करा दी जाए ?? .. ..

मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि बेवकूफों को कभी ये भी तो आभास नहीं होता कि वो बेवकूफी की सीमा लांघ बेशर्मी करने लगे हैं .. .. है ना !!

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// ना तो 'समान नागरिक संहिता' - और ना ही 'समान राजनीतिक संहिता' .. है ना !! ....//


मुझे लगता है कि अब देश में 'समान नागरिक संहिता' ना सही - कम से कम 'समान राजनीतिक संहिता' तत्काल ही स्थापित हो ही जानी 'चाइये' ..

मसलन यदि किसी भी पार्टी का कोई भी नेता / विधायक / सांसद / मंत्री अपने बड़े नेता के विरुद्ध कोई गंभीर आरोप लगाए तो आरोपित नेता को तत्काल इस्तीफ़ा दे देना 'चाइये' .. .. जैसे तोमर क्या मोदी क्या स्मृति क्या सब पर 'समान राजनीतिक संहिता' .. और तो और संदीप क्या वरुण क्या - बस 'समान राजनीतिक संहिता' .. ..

बोलो भक्तों क्या कहते हो ?? .. केजरीवाल को इस्तीफ़ा दे देना 'चाइये' ना ?? .. है ना !! .. .. और भविष्य में ही सही यदि किसी भाजपाई पर भी ऐसा ही आरोप लगे तो भी इस्तीफ़ा होना 'चाइये' ना .. नहीं ना !! .. ..

तो भक्तों मान के चलूँ ना कि - ना तो 'समान नागरिक संहिता' - और ना ही 'समान राजनीतिक संहिता' .. .. बस जैसी धक्कमपेल चल रही है चलाते रहोगे !! - है ना !! .. हा !! हा !! हा !! ..../

मेरे दिमाग की बातें - दिल से .. ब्रह्म प्रकाश दुआ

Sunday, 7 May 2017

/.. क्या दिल्ली में कानून व्यवस्था इस कदर चरमरा सी गई है ?? .. ..

/.. अब यदि कोई ये सहजता से मान ले कि चतुर केजरीवाल ने २ करोड़ रूपए किसी से भी किसी की भी उपस्थिति में खुल्लमखुल्ला ले लिए - या २ करोड़ रूपए लेते हुए वो स्वयं एक मुख्यमंत्री होते हुए मुख्यमंत्री निवास पर तमाम सिक्योरिटी के रहते किसी तीसरे व्यक्ति की उपस्थिति तक को टाल  नहीं सके - तो मैं ये कहूंगा कि शायद बेहतर होगा वो सोचना बंद कर दे - क्योंकि बेवकूफों के सोचने से भी कुछ हासिल नहीं होता .. समझे !! .. ..

और इसलिए मैं ये भी सोच रहा था कि क्या दिल्ली में ऐसा कुछ संभव है कि कोई भी किसी के भी घर में बिना अनुमति सीधा घुसा चला जाए ?? .. क्या कानून व्यवस्था इस कदर चरमरा सी गई है ?? .. तौबा !! ..../

मेरे दिमाग की बातें - दिल से .. ब्रह्म प्रकाश दुआ

// कम से कम अब तो केजरीवाल को मानना ही पड़ेगा .. ..//


वो इसलिए कि उन्होंने उनके साथ दोयम दर्जे के साथी होते हुए भी वो मुकाम हासिल किये जो अभूतपूर्व थे .. मसलन उन्होंने अन्ना प्रशांत योगेंद्र वीके सिंह किरण बेदी एवं कई अन्य बागी नेताओं का साथ ले अपना पथ प्रशस्त किया - और इन सब लोगों के अलग हो जाने के बाद भी लगातार आगे बढ़ते रहने में सफलता पाई है .. और अब तक उनसे अलग हुए किसी भी व्यक्ति ने अपने दमखम पर किसी भी प्रकार की सफलता नहीं पाई है .. ..

आज लगता है कपिल मिश्रा का एक छोटा नाम उस फेहरिस्त में जुड़ने जा रहा है - और शायद कल एक बड़ा नाम कुमार विश्वास का भी जुड़ जाए - या हो सकता है संजय सिंह या आशुतोष जैसे कुछ और बड़े नाम भी जुड़ जाएं .. पर चूंकि अरविन्द केजरीवाल ने अब तक जो हासिल किया है अपने दमखम और अपनी योग्यताओं और अपनी मेहनत पर ही किया है .. मुझे लगता है वो और मज़बूत हो आगे बढ़ेंगे .. ..

एक बात और - अरविन्द केजरीवाल से कई लोग बागी हो अलग हुए - और उन पर लगातार आरोप भी लगते रहे - पर केजरीवाल अब तक किसी के आगे डरते या झुकते नहीं दिखे .. और ना ही कोई आरोप अब तक साबित हो पाया .. ..

और अभी-अभी इसी कड़ी में सत्येंद्र जैन से २ करोड़ रूपए नगद लेते देखने का अब तक का सबसे गंभीर आरोप कपिल मिश्रा ने अरविन्द केजरीवाल पर लगाया है .. और मेरे तर्क अनुभव और दिमाग से मैं इस आरोप को भी मान्य नहीं करते हुए शायद भाजपा की ही एक और साज़िश के रूप में ही देखता हूँ .. ..

और इसलिए ही कहता हूँ कि यदि आरोप सही हैं तो भी और यदि आरोप साज़िश हैं तब भी - मानना पड़ेगा केजरीवाल को !! .. और ये भी सोचना पड़ेगा कि कपिल मिश्रा भी तो अरविन्द केजरीवाल को गलत ही समझते रहे .. यानि कपिल मिश्रा ने भी मान लिया कि केजरीवाल बहुत ऊंची चीज़ हैं - और कपिल मिश्रा स्वयं एक सामान्य बेवकूफ हैं - है ना ?? .. ..

और अंत में एक बात और .. यदि अरविन्द केजरीवाल भी व्यक्तिगत रूप से भ्रष्ट हैं तो फिर प्रश्न उठता है कि जनता किस अन्य एक भी नेता पर विश्वास करे और वो भी किस बिनाह पर .. और फिर फ़र्ज़ी डिग्रीधारी मोदी पर ही विश्वास क्यों किया जाए ?? .. कोई विशेष कारण ?? .. ..

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Saturday, 6 May 2017

// तो फिर इन दोगले डरपोकों को "सेक्युलर" नाम से मिर्ची क्यों लगती है ?? ....//


संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 27 वें सत्र में गुरुवार को भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि .. भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है जिसका कोई राजकीय धर्म नहीं है और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की हिफाजत इसकी राजनीतिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण तत्व है - भारतीय संविधान हर व्यक्ति को धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी देता है - भारतीय संविधान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए विभिन्न प्रावधान हैं - भारत नागरिकों के जाति, नस्ल, रंग या धर्म में कोई भेदभाव नहीं करता .. ..

मेरी प्रतिक्रिया .. ..

और मैं भी तो यही कहता मानता अपनाता चाहता लिखता समझाता आया हूँ - और इसी बात की तो वकालत करता आया हूँ .. फिर ना जाने कुछ मित्र और मोदी भक्त मुझसे चिढ़ते क्यों हैं - क्यों मुझे गालियां देते हैं ?? .. ..

शायद इन्हें "सेक्युलर" शब्द से चिढ़ है या एलर्जी है और इन अनपढ़ों को यह तक नहीं पता कि अंग्रेजी शब्द "सेक्युलर" को ही तो हिंदी में "धर्मनिरपेक्ष" कहते हैं !! .. ..

या फिर हो सकता है कि इन सबको मुझे गालियां देना इनकी कद काठी और अक्ल को आसान उपयुक्त और अनुकूल लगता होगा .. पर संघ या भाजपा या विहिप या बजरंग दल या मोदी या शाह आदि को गाली देने में इन्हें डर लगता होगा .. डरपोक कहीं के !! दोगले !! .. है ना !! .. ..

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// अरे साहेब !! पेड़ लगाने की छोडो - किसी झंडे गाड़ने वाले को ही ले आओ !! ....//


मोदी ने कुछ दिनों पहले कुछ आला अफसरों को एक कहानी से पकाया था .. कहानी बहुत खींचतान कर लंबी सुनाई थी पर संक्षिप्त में उसका लुब्बेलुबाब था कि - एक आदमी गड्ढे खोदता और दूसरा उसे भर देता .. जब पता किया गया कि माजरा क्या है तो पता चला ३ आदमियों का सामूहिक प्रोजेक्ट कार्य था पेड़ लगाने का - एक का काम था गड्ढे खोदना जो खोद रहा था - दूसरे का काम था पेड़ लगाना जो छुट्टी पर था - तीसरे का काम था गड्ढे भरने का जो भर रहा था .. ..

हॉल में बैठे सब अफसर हंसे थे - आप भी चाहें तो हंस लें - और मेरी प्रतिक्रिया भी सुन लें .. ..

मोदी जी आप भी ३ साल से गड्ढे ही तो खोद रहे हो - या कभी खोदे गड्ढे भरवा भी देते हो .. बाक़ी तो आप पहले से खुदे गड्ढे पर रोते ही रहते हो .. और आप पेड़ लगाने की नीवें डालने की इमारतें बनाने की बातें तो ऊंची-ऊँची करते हो - पर गड्ढे खुदने के अलावा हुआ तो कुछ भी नहीं है .. ..

बाकी पेड़ लगाने के लिए आपका प्रिय सरकारी प्रोजेक्ट आपके प्रिय खोपडिया की देख-रेख में पूर्ण सरकारी व्यय के साथ चल तो रहा ही है - आपकी तो पूरी पार्टी और आपकी पूरी सरकार और आपके सारे मित्र बस दिन-रात इसी प्रोजेक्ट कार्य में तो लगे हैं  - और बिना पेड़ लगाए ही पेड़ पर लगने वाले फल-फूल सभी धड़ल्ले से प्राप्त कर ही रहे हैं .. ये बात तो सच ही है ना साहेब !! .. ..

और कहानी के अनुरूप कहानी में जो बकवास २ आदमी मिलकर कर रहे थे - वो आप भी तो दो जने ही मिलकर कर रहे हो - आप और शाह .. ..
तो बस अब आप तो ये बता दो वो तीसरा कौन है जो छुट्टी पर है और जिसके जिम्मे पेड़ लगाने का कार्य है .. कहीं वो केजरीवाल तो नहीं ?? .. हा !! हा !! हा !! .. ..

वैसे एक बात बता दूँ - ये केजरीवाल ही वो पहला व्यक्ति है जो तुम्हारे लिए गड्ढे खोद खुल्ले छोड़े जा रहा है .. और ये ही है जो जनता के लिए पेड़ भी लगाएगा और तुम्हारे गड्ढे भी भरेगा .. समझे साहेब !! .. ..

खैर ये तो बात हुई पेड़ लगाने के लिए गड्ढे खोदने की - पर वो १ के बदले १० सिर काट के लाने के लिए कौन से गड्ढों की लगातार खुदाई भराई चल रही है साहेब ?? .. और फिर सर्जिकल स्ट्राइक कर गुजरने वाले होनहार रक्षामंत्री की छुट्टी कर ये किस चुनाव हारे हुए आढ़तिये टाइप परचूनी फडतूस व्यक्ति को ये पेड़ लगाने से भी कहीं अति महत्वपूर्ण और संवेदनशील कार्य सौंप बैठे हो साहेब जो स्वयं छुट्टी कर देने लायक है - और जिसकी १ खोपडिया में १० खोपड़ियों जितने भ्रष्टाचार करने के नायाब तरीके ठूंसे पड़े हैं ?? .. ..

अरे साहेब !! अफसरों को कहानी सुना जितना हंसाया पकाया - अब उतनी शर्म भी महसूस कर लो साहेब !! .. ये खोपडिया को हटाओ और कुछ ठोस कर के बताओ साहेब - पेड़ो की छोडो १० की छोडो - १ के बदले १ तो ले आओ साहेब !! .. किसी झंडे गाड़ने वाले को ही ले आओ साहेब !! .. जय हिन्द साहेब !! .. ..

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Friday, 5 May 2017

// 'स्वच्छतम' इंदौर की "खान चाची" को भी 'लिविंग एंटिटी' का दर्जा हासिल हो !! ....//


पूरे देश की आस्था और श्रद्धा की पात्र नदी 'माँ गंगा' को उच्च न्यायलय द्वारा 'लिविंग एंटिटी' या 'ज़िंदा वैधानिक नागरिक' का दर्जा दे दिया गया था .. ..

और अभी इंदौर को 'स्वच्छतम' शहर घोषित कर दिया गया है .. ..

मध्यप्रदेश की जीवनदायिनी नदी और पूरे प्रदेश की आस्था और श्रद्धा की पात्र नदी "नर्मदा मैय्या' को भी अब 'लिविंग एंटिटी' या 'ज़िंदा वैधानिक नागरिक' का दर्जा देने की जबरदस्त मांग उठ खड़ी हुई है  .. ..

अब मेरी भी मांग .. ..

मेरे इंदौर में भी एक नदी सी बहती है - बहुत पुरानी नदी है और बचपन में मैं इसमेँ खूब नहाया हूँ - और नाम है खान नदी .. और ये नदी सबकुछ सहन करते आज भी एक संकुचित नाले के रूप में बहते हुए शहर की गन्दगी को अपने साथ बहा ले जाने की दिन रात अथक कोशिश करती रहती है .. बेचारी !! - है ना !! .. .. ऐसी नदी पर मेरी आस्था और श्रद्धा स्थापित हो जाना स्वाभाविक ही है .. ..

अतः मैं भी इंदौर की खान नदी को "खान चाची" मानते हुए इसे भी 'लिविंग एंटिटी' या ज़िंदा वैधानिक नागरिक का दर्जा देने की जबरदस्त मांग करता हूँ .. .. कोई आपत्ति ?? .. ..

और हाँ !! .. जो भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे नेता स्वच्छतम इंदौर हेतु श्रेय लेने के लिए तड़प और तड़क रहे हैं मैं उन्हें 'डेडली एंटिटी' या 'घातक वैधानिक नागरिक' का दर्जा देने की जबरदस्त मांग करता हूँ .. .. इसमें भी कोई आपत्ति ?? .. ..

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