My blog is my reaction and analysis of the current Political and Social affairs of our country - India.
Thursday, 16 August 2018
// आओ सब मिलकर 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' और संविधान की प्रति फाड़ने वालों को निपटाएं.. //
आज तक बिना किसी वांछित ठोस सफलता या परिणाम प्राप्त किए 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' का घोर विरोध कर खपने वाले हताश देशभक्तों में ऊर्जा और जोश भरने हेतु - मिलिट्री के टैंक के दर्शन करवाने - और गोदी मीडिया के कुछ चुनिंदा चैनलों पर हुई देशभक्ति से ओतप्रोत बहस की रिकॉर्डिंग सुनवाने के लिए - मैं जोशपूर्ण मांग एवं आग्रह करता हूँ !!..
क्योंकि देश के संविधान की प्रति को फाड़ा गया है और अभी तक उतनी आवाज़ उठी नहीं है जितनी पूर्व में 'टुकड़े-टुकड़े' नारे लगाने वालों के विरुद्ध उठ खड़ी हुई थी..
और मैं तो बेसब्र हूँ बेचैन हूँ व्यथित हूँ व्याकुल हूँ और गुस्से में भी हूँ..
और इसलिए मैं तो कहता हूँ कि जिसने भी संविधान की प्रति फाड़ने की हिमाकत की है उसे तो 'टुकड़े-टुकड़े' वाले पूरे गैंग के साथ निपटा कर सबकी ख़ाक ज्वलनशील गैस युक्त गंदे नाले में गर्क कर देनी चाहिए..
क्यों भक्तों !!.. कैसी कही ??.. आज तो हमसे सहमत हुई कि नाहीं.. ..
तो फिर हो जाए ??..
बताओ तो वो 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' वाले कितने थे और कहाँ गए और कहाँ हैं ??..
आओ सब मिलकर सबको मिलाकर निपटाते हैं.. हाँ नहीं तो !!..
भारत माता की जय !!.. ..
ब्रह्म प्रकाश दुआ
'मेरे दिमाग की बातें - दिल से':- https://www.facebook.com/bpdua2016/?ref=hl
Wednesday, 15 August 2018
// गधे पर पट्टे पेंट कर ज़ेबरा तो बना लोगे.. पर गाय या शेर तो नहीं बना सकोगे ना !!..//
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मेरा एक स्वतंत्र विश्लेषण !!.. ..
पूरा मीडिया नतमस्तक हो चुका है.. सत्तापक्ष की गोदी में जा बैठा है.. और इशारों पर नाच रहा है.. बल्कि उन्मुक्त शानदार वीभत्स दर्शनीय कैबरे तक कर रहा है..
और गौरतलब है कि.. पूरा गोदी मीडिया जनता के सरोकार की कोई भी बात नहीं कर रहा है.. मसलन गरीबी भुखमरी कानून-व्यवस्था गुंडागर्दी या फिर स्वास्थ्य शिक्षा विकास आदि पर कोई बात नहीं हो रही है.. और यहां तक कि पाकिस्तान कश्मीर भ्रष्टाचार वादाखिलाफ़ी और नाकामियों जैसे विषयों पर तो कोई चपड़ू चूँ भी नहीं कर पा रहा है..
पर क्या आपने गौर किया कि आखिर बातें हो क्या रही हैं .. बातें हो रही हैं - हिन्दू-मुसलमान पर - विभिन्न चुनावों पर - विभिन्न घटनाओं दुर्घटनाओं पर - इतिहास पर - राजनीति पर - टुच्चों के बयानों पर - कावड़ियों के कबाड़ों पर - बाढ़ पर - विपक्ष की कमज़ोरियों पर - विपक्ष की लाचारियों पर - हड़तालों पर - पिछले सत्तर साल के सियाप्पे पर.. और थोड़ी बहुत छनी-छनाई तोड़ी-मरोड़ी बातें हो रही हैं - सीमाओं पर घटित गतिविधियों पर - और देश में हो रहे थोकबंद वीभत्स बलात्कारों या नियोजित भीड़ों के द्वारा की जा रही हत्याओं पर.. आदि !!..
और उपरोक्त तथ्य ये इंगित करते हैं कि सत्तापक्ष के द्वारा डरा-धमका कर या खरीद कर गोदी में बैठा ली गई मीडिया के पास भी सत्तापक्ष के पक्ष में बताने के लिए कुछ भी ठोस या महत्वपूर्ण नहीं है.. और इसका कारण है कि मोदी ने अभी तक कुछ ऐसा विशेष किया ही नहीं है जिसका अकाट्य बखान किया जा सके..
और ये बात तब और सिद्ध हो गई जब आज १५ अगस्त के दिन लाल किले की प्राचीर से ८२ मिनिट के भाषण में मोदी ज्यादातर लफ़्फ़ाज़ी करते नए वादे पेलते और पुरानी सरकारों को कोसते नज़र आए.. और अपने किये पर बढ़चढ़ कर बोलने के अथक प्रयास के बावजूद भी कुछ विशेष बोल ही नहीं पाए.. और इसलिए मुझे वो वाकई चुके खपे बेआबरू जैसे ही नज़र आए..
और देख लीजिएगा कि उनके इस भाषण पर भी गोदी मीडिया बहुत टेके और पैबंद लगाने के प्रयास करेगा.. पर निश्चित ही मोदी को सफल या अच्छा या कुशल या समझदार या ईमानदार सिद्ध करने में सफल नहीं हो सकेगा..
क्योंकि मेरा ऐसा मानना है कि ज़ू के गधे के बदन पर पट्टे पेंट कर आप उसको ज़ेबरा तो बना सकते हो.. पर किसी गधे को कुछ भी करके और कुछतो भी करके एक उपयोगी गाय या फिर बहादुर ताकतवर शेर तो नहीं बना सकते हो.. क्योंकि आखिर आप कुछ भी कर लो - गधा तो गधा ही रहेगा..
और हाँ गंदी नाली की गैस से आप ज्यादा से ज्यादा पकोड़े ही तल लोगे ना.. रॉफेल विमान तो नहीं उड़ा सकोगे ना.. राफेल तो तुमको ही उड़ा देगा ना.. .. और फिर गंदी नाली के कीड़े तो मरने के लिए नाले में ही रह जाएंगे ना - कोई गैस के साथ उड़ पकोड़े तो नहीं खा सकेंगे ना.. समझे !!
ब्रह्म प्रकाश दुआ
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// आखरी भाषण निपट गया.. अगला स्वतंत्रता दिवस बेहतर हो इस हेतु शुभकामनाएं !!..//
मैने आज मोदी का भाषण सुन लिया..
शायद इसलिए कि ये उनका आखरी भाषण था..
भाषण सुन मैं दावे से कह सकता हूँ कि भक्त ख़ुशी का इज़हार करेंगे.. क्योंकि भाषण बिना दिमाग वालों को खुश करने लायक तो था ही..
और चिंतित भी हुआ कि यदि मोदी ने ९०००० करोड़ की दलाली को रोका तो फिर मोदी ने एक भी दलाल पकड़ा क्यों नहीं - जेल क्यों नहीं भेजा.. क्योंकि भक्त ही तो दलाल हैं और दलाल ही तो भक्त हैं.. और शायद मोदी चौकीदार नहीं भागीदार ही हैं.. है ना !!..
और अंततः मैं संतुष्ट हुआ कि मोदी का आखरी भाषण निपट गया..
और इसी कारण आप सबको दिल दिमाग से स्वतंत्रता दिवस की बधाई एवं अगला स्वतंत्रता दिवस बेहतर हो इस हेतु शुभकामनाएं !!..
ब्रह्म प्रकाश दुआ
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Friday, 10 August 2018
Friday, 3 August 2018
// NRC मुद्दे पर सरफुटव्वल उधेड़बुन के बीच.. राजनाथ का उधेड़ने योग्य बयान ..//
NRC मुद्दा भी क्या उछला है.. और क्या उछाला गया है.. गजब ही है..
अब ये यूँ इसलिए भी हुआ है कि ये मुद्दा उलझाने के लिए बहुत ही अनुकूल और उलझने के लिए बहुत ही सरल सपाट है..
क्योंकि इस मुद्दे के मोटे-मोटे दो वाजिब से दृढीकोण हैं..
एक दृष्टिकोण है कि - तमाम घुसपैठियों को देश में मत रहने दो.. और ये दृष्टिकोण है राष्ट्रहित में सोचने वालों का.. और क्योंकि ये राष्ट्रहित में सोचने वालों का व्यवहार इतना उद्दंडी हो चला है कि फिर वो आगे पीछे किसी भी प्रकार की विवेचना करने या सुनने के लायक नहीं रह जाते.. और इसलिए ऐसे घुसपैठियों का क्या करें ?? क्या इनका अचार डालें ?? इस बात पर कोई 'दृष्टि' नहीं डालता और ना ही कोई 'कोण' बताता है.. बस उनका तो एक ही कहना है कि घुसपैठिये इस देश में क्यूँ ????.. और जो राष्ट्रहित की बात करने में निपुण भक्त हैं उनका तो यहां तक का कहना है कि फलां धर्म के घुसपैठिए इस देश में क्यों ????.. भारत माता की जय !!..
और दूसरा दृष्टिकोण है कि - आखिर घुसपैठिए भी हैं तो इंसान ही ना !!.. इसलिए सबसे अव्वल बात तो ये हुई कि आप उसे मार काट भी तो नहीं सकते ना !!.. और उसका दुनिया के किसी अन्य देश में प्रत्यर्पण भी तो कोई आसान नहीं ना - क्योंकि फिर उस देश में भी तो उस राष्ट्र के राष्ट्रवादी होंगे ही - जिनका कहना इतना ही तो सरल और सपाट होगा कि ये भारत की भेगत हमारे यहां क्यों ??.. और यदि ये भी स्पष्ट हो जाए कि ये भेगत भारत की नहीं बल्कि मूलतः उनके ही देश की है तो फिर प्रश्न उठेगा कि वो उस देश से निकले निकाले ही क्यों गए थे.. यानि फिर दुष्चक्र शुरू.. इधर उधर के राष्ट्रवादियों का अंतहीन दुष्चक्र - है ना !!..
अब यदि मान लो कि आप इंसानियत को राष्ट्र पर तरजीह दे दें - तो फिर क्या इंसानियत के नाम पर सारी भेगत पाल लें ?? भेगत पालने का ठेका हम ही पालें ?? और जिनकी भेगत है वो बैठे ठाले मजे लेते रहें ??.. क्या ऐसा राष्ट्रहित में हो सकता है ??.. नहीं ना !!..
और यदि राष्ट्र को इंसानियत पर तरजीह दे दें - तो क्या राष्ट्रहित में इंसानियत को दरकिनार कर वहशी हो जाएं ????..
यानि कुल मिलकर बात यूँ हुई कि एक तरफ खाई और दूसरी तरफ भी खाई.. और गड्ढा इधर का भी और उधर का भी खतरनाक जो खाई के मुहाने पर मौजूद.. तो किया क्या जाए ????..
बस इसी उधेड़बुन में था कि मुझे अंतरिम निष्कर्ष पर पहुँचते हुए एक बार फिर उधेड़ने का मौका मिल गया.. और मेरा अंतरिम निष्कर्ष ये निकला है कि इस मुद्दे पर इस मोदी सरकार के हर पहलू और पक्ष का विरोध किया जाए !!..
और वो इसलिए कि अभी-अभी होनीहार गृहमंत्री राजनाथ ने NRC के मुद्दे पर राज्यसभा में कहा है कि.. NRC को लेकर गलत प्रचार किया जा रहा है.. अभी यह फाइनल लिस्ट नहीं है.. कुछ लोग इसे सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं.. गलतफहमियां फैलाई जा रही हैं.. ..
यानि इतनी घातक देर से ऐसा टुच्चा बयान.. कि सौहार्द बिगड़ता रहा - अक्लमंद अक्लफुटव्वल करते रहे और भक्त राष्ट्रहित के नाम का परचम फहराते रहे.. देश जलता लड़ता उलझता कुढ़ता परेशान होता रहा - और सरकार बेवकूफों जैसे एक लिस्ट निकाल कर सो गई जो फाइनल ही नहीं थी ????
यानि सरकार है बेवकूफ गैरजवाबदार गैरजिम्मेदार और राष्ट्र और इंसानियत विरोधी भी.. और इसलिए ये सरकार कुछ अच्छा करेगी - या इस सरकार से कुछ जाने अनजाने अच्छा हो जाएगा - ऐसी कोई संभावनाएं बनती ही नहीं.. शर्तिया !!..
इसलिए जब तक बेवकूफ लोग फाइनल लिस्ट जारी नहीं कर देते तब तक तो इस सरकार के हर निर्णय या पक्ष का विरोध करना ही श्रेयस्कर होगा !!..
और अंततः मेरी व्यक्तिगत राय इस सरल सपाट मुद्दे पर इंसानियत को तरजीह देते हुए ही होगी.. क्योंकि मेरे लिए राष्ट्र से बढ़कर इंसानियत है.. क्योंकि एक अच्छा राष्ट्र इंसानों से ही तो बनता है .. कोई थोथे राष्ट्रवादियों से थोड़े ही बनता है .. समझे !!..
ब्रह्म प्रकाश दुआ
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