Sunday, 10 April 2016

// केरल मंदिर का हादसा भी 'एक्ट ऑफ़ गॉड' नहीं - आगे खुलासा मोदी करेंगे ..//


केरल के कोल्लम के पुत्तिंगल मंदिर में एक हादसा हो गया .... जो 'एक्ट ऑफ़ गॉड नहीं' है .... क्योंकि हादसा वहां के प्रबंधन की घोर लापरवाही के कारण वहां जमा की गई आतिशबाजी में लगी आग के कारण हुआ .... और जो आतिशबाजी खुशियां मनाने और हर्षोउल्लास का इज़हार करने के लिए थी - गॉड को खुश करने के लिए थी .. वही हादसे का कारण बन गई .. वो भी गॉड के ही घर आंगन में -  गॉड की उपस्थिति में - गॉड की रज़ामंदी से या गॉड की अनापत्ति रहते ....

पर खबरदार !! कोई भी इसे 'एक्ट ऑफ़ गॉड' ना माने ना कहे .... नहीं तो हो सकता है कि सर काट लिया जाए या पकिस्तान भेज दिया जाए - या फिर दण्ड स्वरुप ३ बार 'भारत माता कि जय' बोलने के लिए कहा जाए ....

और .. ऐसा इसलिए भी कि कलकत्ता के एक पुल के एक भाग के गिरने वाले भीषण हादसे को भी किसी 'बेवकूफ मान लिए गए' व्यक्ति ने 'एक्ट ऑफ़ गॉड' कह दिया था .... और चुनावी मौसम में हमारे प्रधानमंत्री जी ने चुनावी लफ़्फ़ाज़ी का कौशल प्रदर्शित करते उसे ममता दीदी का 'एक्ट ऑफ़ फ्रॉड' करार दे मारा ....

और अब वही प्रधानमंत्री मोदी केरल वाले मंदिर के हादसे का जायज़ा लेने स्वयं जा रहे हैं .... उस हादसे का जायज़ा जो एक बार फिर 'एक्ट ऑफ़ गॉड' नहीं है .... और इसलिए शायद ये जायज़ा लेने जा रहे हों कि इस चुनावी मौसम में केरल के इस हादसे को किसका एक्ट करार दिया जा सके .... या शुद्ध हिंदी में कहूं तो हमारे कर्मठ या 'कर-मत' प्रधानमंत्री सारा कामधाम छोड़ वहां इसलिए जा रहे हैं कि वो अपनी पार्टी के हित में इस भीषण हादसे का जिम्मा किसके सर फोड़ सकें .. इसे किसका एक्ट बता सकें ....

और क्योंकि वो जा ही रहे हैं तो हमेशा की तरह अनेक प्रश्न भी उनके पीछे पीछे हो लेंगे - मसलन वो कश्मीर में श्रीनगर एनआईटी क्यों नहीं गए ??  .... ऐसा इसलिए कि इस देश की केजरी ग्रसित राजनीति के लेटेस्ट ट्रेंड अनुसार ऐसे थोथे प्रश्न फैशन बन गए हैं .... केजरी वहां क्यों गए थे ? - यहाँ क्यों नहीं आए ? - राहुल अब क्यों नहीं जाते ? - मोदी तब कहाँ थे ? - कांग्रेस अब कहाँ है ? - फलां तब क्यों गया था ?- फलां अब क्यों नहीं आया है ? - ये यहाँ क्या करने आया है ? - वो वहां क्या करने गया था ? - ये ६० साल से कहाँ था ? .. ?? ....

खैर मैं इन महत्वपूर्ण प्रश्नों में तो अपने आपको खपाना नहीं चाहता - पर हाँ यह जरूर सोच रहा हूँ कि ऐसे हादसों के बाद जो भी पूर्व में ऐसे हादसों का जायज़ा लेने गया था उसने जायज़ा लेने के बाद ऐसा क्या महान और उपयुक्त आवश्यक किया था जिसे वहां जाए बिना नहीं किया जा सकता था ???? .... 

पर मेरी ऐसी सोच को आप कदापि मोदी जी के केरल जाने के विरोध में नहीं देखें .... क्योंकि मैं तो अब मोदी के हर आने और हर जाने और हर रुकने और हर चलने का विरोधी हो चुका हूँ - क्योंकि मैं भारत माता की ऐसी दुर्दशा को 'एक्ट ऑफ़ गॉड' नहीं मानता हूँ .... मैं इसे जनता का 'एक्ट ऑफ़ ब्लंडर' मानता हूँ ....

तो इंतज़ार करें .... शाम तक आपको इसकी पुष्टि कर दी जाएगी कि केरल मंदिर का हादसा 'एक्ट ऑफ़ गॉड' नहीं था - और शायद खुल्ला खुलासा भी कि ये 'एक्ट ऑफ़ चांडी' था .... और गॉड की मर्ज़ी से १०० से ज्यादा मरने वालों को कितने लाख का मुआवज़ा और गॉड की कृपा से मरने से बचे ३५० से ज्याजा घायलों को कितने हज़ार का मुआवज़ा हम आप जैसे करोड़ों ना मरने वाले जिन्दों के सरकारी धन से कर दिया जाएगा .... और शायद इस बात का भी आंकलन हो जाएगा कि गॉड की कृपा से इस हादसे के कारण किसे कितने वोट प्राप्त होंगे - या गॉड की गलती से किसके कितने वोट कटेंगे ....

केरल से कश्मीर तक वाली भारत माता की जय !!!!

पुनष्च: - मैं सोच रहा था कि "दुर्घटना" नाम की भी कुछ तो चीज़ होती है या नहीं ?? .. और क्या "दुर्घटना" एक्ट ऑफ़ गॉड होती है या नहीं ?? .. और क्या मोदी भी एक "दुर्घटना" ही नहीं ??

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Friday, 8 April 2016

// गुरुद्वारे में चोरी - छिः !! .. जेएनयू छिः !! .. श्रीनगर एनआईटी ?? ....//


आज समाचार देखा कि कुछ चोर एक गुरुद्वारे में सफल चोरी कर इत्मीनान से चलते बने और सीसीटीवी पर कैद हो गए .... और मुझे कुछ सार्थक मनन करने पर मजबूर कर गए ....

और मैं सोचने लगा कि .... एक चोर यदि अमीर के यहाँ चोरी करे या फिर गरीब के यहाँ या फिर किसी पूजास्थल में भगवन के यहाँ तो क्या कुछ भेद या अंतर ??

अब इस बाबद कोई कह सकता है कि चूँकि अव्वल तो चोरी ही गलत है - फिर चोर किसके यहाँ चोरी करता है क्या फर्क पड़ता है ?? .... पर फर्क तो है .. गरीब तो बर्बाद हो सकता है - अमीर उदास - पर क्या भगवन को भी कोई असर पड़ेगा ?? .. पड़ना तो नहीं चाहिए क्योंकि उसके पास तो असीमित भंडार है और वो ही तो सबको देता है ....

पर नैतिकता के ठेकेदार शायद ये कह और मान सकते हैं कि - चोरी वो भी मंदिर मस्जिद गुरद्वारे में ?? छिः .. इससे बड़ा पाप और क्या होगा ??

तो जनाब सोचियेगा और किसी भी निर्णय पर ना पहुँच पाने की स्थिति में इस विषय को ज़रा कुछ देर के लिए अलग कर सोचियेगा कि - क्या देशभक्ति के कर्म या देशद्रोह की हरकत और उससे जुड़े देश के कानून क्या जेएनयू के लिए और श्रीनगर एनआईटी के लिए समान हैं या होने चाहिए या उनमें भेद अंतर है या होना चाहिए ????

मुझे लगता है शायद अब आपकी उलझन और बढ़ गई होगी .... है ना ?? .... तो आइये मैं कुछ सुलझाने का प्रयत्न करता हूँ ....

कल्पना कीजिये कि वही चोर यदि जेएनयू या श्रीनगर में देशभक्ति के नारे लगाता है तो क्या उसे आप देशभक्त कहेंगे ??
और यदि जिनके यहाँ चोरी हुई ऐसे गरीब अमीर और भगवन के एजेंट संतप्त और कुपित हो जेएनयू या श्रीनगर में देशविरोधी बातें करने लगें तो उन्हें आप देशद्रोही कहेंगे ??

मुझे लगता है शायद अब तो आपकी उलझन और ही बढ़ गई होगी .... है ना ?? .... तो आइये मैं एक बार फिर सुलझाने का अंतिम प्रयत्न करता हूँ ....

मित्रो !! मेरा कहना माने तो बस फिलहाल मोदी जी को उनके भक्तों को और संघी-भाजपाई प्रवक्ताओं को और कुछ छुटभैय्ये भड़के भड़काऊ नेताओं को सुनना बंद कर दें - और ज़रा अपनी अक्ल और तर्क पर भरोसा कर सोचें तो पूरा मामला सुलझ जाएगा - और आपको मालूम पड़ जाएगा कि ये चोर कौन ?? .. साहूकार कौन ?? नीच साहूकार कौन ?? .. देशभक्त कौन ?? .. देशद्रोही कौन ?? .. और ये ईश्वर-अल्लाह-भगवन क्या है और ये कहाँ रहता है और क्या करता है - और उसके कर्तव्य क्या हैं अधिकार क्या हैं और औकात क्या है .... और उसके कितने सारे और कैसे-कैसे एजेंट हैं ....

बस फिर क्या है !! निश्चित ही आपके देशप्रेम और इंसानियत का पुरज़ोर सदुपयोग इस देश को बनाने में और मानवता के पक्ष में भरपूर होने लगेगा .... इसी कामना के साथ .. धन्यवाद !! .. और .. और - "भारत माता की जय" !!

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// कूटनीतिक नाबालिग मोदी - अब पाक और श्रीनगर मुद्दे पर क्या कहेंगे ?? ..//


हमेशा की तरह बड़े दुःख के साथ मोदी का उपहास कर रहा हूँ .... क्योंकि पानी सर के ऊपर से निकल गया है - बात अब देश की बेइज़्ज़ती की आ गई है ....

और ऐसा इसलिए कि मोदी और मोदी सरकार की अपरिपक्वता लफ़्फ़ाज़ी फूहड़ता फेंकमफांक बड़बोलापन टशन और अकर्मण्यता ये सब कुछ हमें ले डूबे .... क्योंकि लगता है टुच्चे से पाक ने भारत को ठेंगा बता दिया है - आँखें भी दिखा दी हैं - आँखें तरेर भी ली हैं - आँखें फेर भी ली हैं .... और मैं स्तब्ध हूँ - दुखी हूँ ....

और साथ ही श्रीनगर के एनआईटी से भी जो समाचार आ रहे हैं उनसे मैं हताश भी हूँ और कुछ अचंभित भी हूँ .... और जिस तरह वहां नियोजित तरीके से कई देशभक्त छात्रों को प्रताड़ित किया गया है और लगातार किया ही जा रहा है - उससे चिंतित और आक्रोशित भी हूँ .... 

कुछ वर्ष पहले जब बांग्लादेश ने भारत को क्रिकेट के एक महत्वपूर्ण मैच में अप्रत्याशित उलटफेर कर हरा दिया था - तब मुझे बहुत बुरा लगा था .. पर आज मुझे कुछ वैसा ही बुरा लग रहा है - और वो भी कई गुना ज्यादा .... क्योंकि वो तो फिर भी खेल की बात थी - पर ये तो खिलवाड़ हो गया .. देश के साथ खिलवाड़ ....

पर मुझे लगता है ये कूटनीतिक नाबालिग अभी भी फेंकमफांक से बाज़ नहीं आएंगे - और शायद यही कहेंगे - ये हमारी जीत है - ये भारत की जीत है - क्योंकि पहली बार ऐसा हुआ है कि पाकिस्तान हम से डर गया - बात करने से भी कतरा गया .. और देखो हमने माहौल बदल दिया है - श्रीनगर में छात्रों ने तिरंगा लहराने की हिम्मत बताई है .... "भारत माता की जय" - "भारत माता की जय" - "भारत माता की जय" (पूरे ३ बार) ....

और क्या कहेंगे क्या नहीं कहेंगे - यदि इस मुद्दे को छोड़ भी दूँ - तो कम से कम ये ज़रूर कह सकता हूँ कि - ये करेंगे कुछ नहीं .... क्योंकि ये ५६ इंची बातों के शेर हैं - और कर्मों के चूहे - और हिम्मत के पिस्सू - और अक्ल के बैक्टीरिया - और समझ के दिव्यांग ....

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Thursday, 7 April 2016

// तो क्या श्रीनगर एनआईटी में कोई देशविरोधी नारा नहीं लगा ?? ....//


>> भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशा अल्लाह इंशा अल्लाह ....
>> कश्मीर की आजादी तक जंग रहेगी जंग रहेगी .... आदि ....

मुझे पूरा विश्वास है कि इस देश के हर सजग नागरिक को उपरोक्त गंदे नारों के बारे में पता है कि ये नारे जेएनयू में लगे थे ....
पर किसने लगाए थे ?? .. पता नहीं - शायद देशद्रोही "अज्ञात" लोगों द्वारा .... "अज्ञात" लोगों द्वारा !! .. तो फिर आपको और हम सबको ये नारे इतने जाने पहचाने क्यों हो गए ????

कारण ये कि इन नारों को भरपल्ले बोला गया दोहराया जाता रहा और चलाया गया और चिल्लाया गया भाजपाइयों और संघियों द्वारा .... भाजपा के सबसे काबिल और बकवास प्रवक्ता संबित पात्रा द्वारा तो असंख्य बार दोहराया गया - और वो तो अभी कल तक भी यही नारे दोहरा रहे थे ....

जी हाँ कल ही की बात है - एक टीवी चैनल पर श्रीनगर एनआईटी प्रकरण में भी संबित पात्रा इन्ही नारों को दोहरा रहे थे .... और तब मेरे मन में प्रश्न उठा कि श्रीनगर एनआईटी में जो अब नारे लगे हैं जब वो भी देश विरोधी हैं तो संबित पात्रा या अन्य कोई "भाजपा प्रमाणित देशभक्त" इन नए नारों का "वाचन" क्यों नहीं करता ????

मेरा प्रश्न तो हमेशा की तरह वाजिब है - पर मुझे जवाब नहीं मिलेगा - इसलिए जवाब भी मुझे ही देना होगा .... और जवाब है .... जेएनयू के नारों के सहारे भाजपा अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना चाहती थी - इसलिए उन नारों को प्रचारित प्रसारित करना आवश्यक था .... पर जम्मू-कश्मीर की बात अलग है .. यहां लगे नारों को यदि प्रचारित प्रसारित कर दिया गया तो लोग पूछेंगे कि ....
>> राष्ट्रपति शासन के दौरान ऐसे नारे लग कैसे गए ?? .. और जवाबदार कौन ?? ....
>> अब क्या ?? .. नारे लगाने वालों को पकड़ते क्यों नहीं ?? ....
>> क्यों - क्या श्रीनगर में तुम्हे कोई "कन्हैया" सपड़ाई में नहीं आया ?? ....
>> क्यों - क्या ये गंदे नारे तुम्हे अब अच्छे लगने लगे हैं ?? ....
>> क्यों - जब अपने ऊपर आई तो मिद्द निकल गई ?? ....
>> क्यों - श्रीनगर में गंदे नारे लगाने वालों को कौन और कब और कहाँ पकड़ेगा ?? ....
>> क्या श्रीनगर की पुलिस में कोई बकवास "बस्सी" तक नहीं ?? .... आदि ! इत्यादि !!

और दिक्कत ये है कि मेहबूबा के चक्कर में ये ना तो कुछ जवाब दे पाएंगे - ना कुछ कार्यवाही कर पाएंगे - और ना ही खिसके खेर साहब ही कुछ टेका लगा पाएंगे - और ना ही कटु रामदेव ही किसी का कुछ काट पाएंगे - और ना ही मौनमोदी अपनी चुप्पी तोड़ पाएंगे ....

इसलिए मित्रो !! तैयार रहें .. शायद कुछ दिन बाद संबित पात्रा आपको ये बोलते बेवकूफ से नज़र आएंगे कि - श्रीनगर एनआईटी में तो कोई देश विरोधी नारा लगा ही नहीं था .... हा !! हा !! हा !!

और इसलिए मेरी विवेचना मुझे फिर विश्वास दिलाती है कि - वर्तमान भाजपा और संघ की देशभक्ति केवल थोथी है .... ये दोगले लोग देश विरोधी नारों तक का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं .... ये देश की आन बान शान से खिलवाड़ कर रहे हैं - ये पूरे समाज को बांटने का काम कर रहे हैं - ये छात्रों का और शैक्षणिक संस्थाओं की ऐसी की तैसी करने पर तुले हैं - और इस कारण ये देश की भी ऐसी की तैसी ही कर पाएंगे - इससे बेहतर की अपेक्षा इनसे की ही नहीं जा सकती है .... इसलिए सावधान !!!!

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Wednesday, 6 April 2016

// देशद्रोही तो बस जेएनयू में - जम्मू कश्मीर में तो सब मेहबूबा के बन्दे ....//


श्रीनगर के एनआईटी में भी नारे लग गए .. देश विरोधी भी - और देशभक्ति वाले भी ....

पर अभी तक देशद्रोह का कोई मामला दर्ज हुआ नहीं है .... ना ही किसी देशभक्त छात्र को कोई वीरता पुरूस्कार देने या पद्म अवार्ड देने की घोषणा हुई - और ना ही सरकार द्वारा कोई तारीफी घोषणा हुई है ....

बल्कि इसके उलट कुछ उन छात्रों की पुलिस द्वारा जमकर पिटाई कर दी गई है जो तिरंगा लेकर देशभक्ति के नारे लगा रहे थे ....

तो आइये सर्वप्रथम हम बिना किसी भय दबाव के जावेद अख्तर भाई को याद कर अपनी जान की परवाह किये बगैर उतनी ही शिद्दत और दिलेरी से कहें - "भारत माता की जय" - "भारत माता की जय" - "भारत माता की जय" ....

और मैं जेएनयू की एबीवीपी इकाई - सेवानिवृत्त बस्सी जी - दिल्ली के बहादुर देशभक्त कालकोटिये वकील - और विशेषकर दिल्ली विधायक ओपी शर्मा अनुपम खेर और रामदेव बाबा से आग्रह और अपेक्षा करूंगा कि वो शीघ्र ही जम्मू कश्मीर कूच करें और भारत माता की रक्षा करें .... और मेहबूबा को समझा दें ....

और मोदी जी राजनाथ जी स्मृति ईरानी जी से अपेक्षा करूंगा कि वो इस मामले को संवेदनशील मानते हुए कुछ न करें .. बस देखते रहें - और समझते रहें कि उनके द्वारा अभी तक कितना गुड-गोबर कर दिया है .... क्योंकि अब स्थिति ऐसी है कि भारत माता की स्थिति के साथ मेहबूबा के मिज़ाज़ पर भी तवज्जोह देना मजबूरी है .... और ये सभी ऐसे नेता हो चले हैं कि विवाद इनके साथ साये की तरह हो चले हैं .... 

और मुझे तो ये भी लगता है कि यदि कुछ करना ही हो - या करने की मजबूरी हो - तो विचार करें कि क्या ऐसी स्थिति में एक बार फिर कन्हैया को जेएनयू के आस पास ढूंढ धारा २४ ए के तहत धर लिया जाए तो कैसा रहेगा ?? .. आखिर एक बार फिर कन्हैया ने ना सही - किसी ने तो देश विरोधी नारे लगाए ही हैं ना ??

खैर जो भी करें या ना करें - मर्ज़ी - पर एक हिदायत दे देता हूँ .. कोई भी भक्तों के भरोसे ना बैठे - क्योंकि भक्त तो भक्ति में लीन हो चुके हैं - भारत माँ के चरणों में समर्पित हो चुके हैं - चुकते हो चुके हैं ....

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// "मुंहतोड़" जवाब और "केजरीवार" ....//


हो गए लगभग ३ महीने - पठानकोट पर पाक के नापाक हमले को हुए .... और हम इंतज़ार करते रहे "मुंहतोड़" जवाब का .. मोदी की तरफ से "मुंहतोड़" जवाब ....

"मुंहतोड़" जवाब तो आया है - पर मोदी द्वारा नहीं - बल्कि मोदी पर .... और ये जवाब आया है केजरीवाल का - जिसे हम "केजरीवार" भी कह सकते हैं .... क्योंकि जब पूरा देश सन्न होने के साथ चुप भी था - और चुप्पी तो मोदी पर भी चिपकी पड़ी रही .. तब केजरीवाल ने उस तमाम चुप्पी और अकर्मण्यता पर अब "मुंहतोड़" जवाब दिया है ....

और इसका कारण ये रहा है कि मोदी का "मुंहतोड़" जवाब तो आया नहीं था - उल्टे पाकिस्तान का एक और "मुंहतोड़" जवाब मीडिया में छा गया था - और सबको विचलित कर गया था .. और जिसके अनुसार मोदी द्वारा अनुमति प्रदत्त आईएसआई युक्त पाकिस्तानी जेआईटी टीम द्वारा भारत की मेहमाननवाज़ी के बाद ये रिपोर्ट दी कि - पठानकोट हमला तो भारत की ही साज़िश थी ....

और इस "केजरीवार" के बाद ही "पाक मुद्दा" एक बार फिर गरमा सा गया है .... और मैं कह सकता हूँ कि बहुत समय से भाजपा के द्वारा असली मुद्दों से ध्यान भटकाने में सफल रहने के बाद कम से कम एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर देश में आवश्यक बहस छिड़ने की उम्मीद बन गई है ....

और शुरूआती बहस में भाजपा द्वारा केजरीवाल को नसीहत दी जा रही है कि वो केवल अपनी दिल्ली भर को क्यों नहीं देखते ?? .. उनकी क्या औकात कि भारत की विदेश नीति पर खौं-खौं करें ....

और इस विषयक मेरी प्रतिक्रिया .... जब 'भारत माता की जय' बोलने का अधिकार हर भारतीय को है तो भारत माता की इज़्ज़त आबरू को बचाना भी हर भारतीय का कर्त्तव्य है .... और मुझे लगता है कि केजरीवाल की खांसी ठीक हो चुकी है और उन्होंने खौं-खौं नहीं की है - पर वस्तुतः थू-थू की है - धिक्कारा है - दहाड़ लगाई है .... भारत सरकार की फूहड़ता और अकर्मण्यता के विरुद्ध ....

इसलिए मेरा तो सुझाव है कि मोदी जी पहले उनको दिए प्रधानमंत्री के दायित्वों का निर्वहन करने की कोशिश करें .... और यदि मोदी ये राज्यों के चुनाव में पार्टी के छुटभैय्ये नेता माफिक प्रचार करने में - और राज्य सरकारों को गिराने की साज़िश रचने में - और राहुल गांधी का मज़ाक बनाने और कांग्रेस को कोसते रहने में - और फ़िज़ूल लफ़्फ़ाज़ी करते रहने में अपने आप को खपाना बंद करें - तो शायद ऐसे "मुंहतोड़" जवाब प्राप्त करने की नौबत नहीं आएगी ....

और हाँ मोदीजी को एक और सुझाव .... केजरीवाल से - कन्हैया से - शत्रुघन से - छात्रों से अड़ने का प्रयास ना करें - आप इनको पार नहीं पा सकेंगे .. हाँ यदि कोशिश करनी है तो इन सबका साथ लेकर और जावेद स्टाइल में ३ बार भारत माता की जय बोलकर पाकिस्तान को वो "मुंहतोड़"जवाब देने की कम से कम हिम्मत तो दिखाएँ जिसकी आपसे आपके अनुपम भक्तों ने अपेक्षा करी थी ....
कुछ समझे कि नहीं ??

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Tuesday, 5 April 2016

// इस देश में यदि कानून का राज नहीं होता तो ???? .. तो ......... //


अव्वल तो मैं सोच रहा हूँ कि क्या इस देश में कानून का राज है ?? ....

और इसी तारतम्य में मैं ये सोच रहा हूँ कि अगर कानून का राज होता तो कई 'उच्चे' लोग 'टुच्चे' क्यों होते और कई 'टुच्चे' इतने 'उच्चे' क्यों होते ?? ....

मसलन यदि कानून का राज होता तो मजाल थी कि कोई चोर 'पद्म' पुरूस्कार प्राप्त कर लेता या 'सम्माननीय' ही कहलाता .... क्योंकि कानून में तो चोर केवल सजा का पात्र होता है - किसी मान सम्मान या पुरूस्कार का तो कदापि नहीं .... और क्या मजाल थी किसी लंगोटिए की कि वो किसी के सर काटने की बात कर छुट्टा घूम पाता ?? .... क्योंकि कानून में तो किसी का सर काटना गुनाह है - और गुनहगार की जगह तो जेल है - पतंजलि लोक नहीं ....

लेकिन फिर मैं यह भी सोचता हूँ कि नहीं - अगर इस देश में कानून का राज नहीं होता तो क्या होता ?? .... और मुझे लगता है कि यदि ऐसा होता तो फिर लंगोटिया लंगोट बंधे घूम नहीं रहा होता .... अभी तक तो लंगोट खींच ली गई होती .... और ये सभी 'उच्चे' 'टुच्चे' मजे मौज नहीं कर रहे होते ....

और इसलिए मुझे लगता है कि इस देश में कानून का राज तो है - पर वो 'उच्चे' 'टुच्चे' लोगों को संरक्षण देने के लिए है - और गरीब को या आमजन को संरक्षण देने की बजाय सजा देने के लिए है ....

स्थितियां बहुत विकट हैं .... और मुझे लगता है हम सबको प्रयास करना होंगे और स्थितियों को उलटना होगा .... यानि अब ये सुनिश्चित करना ही होगा कि कानून 'उच्चे' 'टुच्चे' लोगों को सजा देने और गरीब को या आमजन को संरक्षण देने के लिए उपयोग में लिया जाए - लाया जाए ....

पर क्या ऐसा संभव है ?? ....

मुझे लगता है - संभव है .... पर इसके लिए कुछ 'सरपिटे' 'लंगोटधारी' की लंगोट खींचना भी आवश्यक है - और दिल में एक संशोधित नारा बसाना भी आवश्यक है .... और वो नारा "शेरांवाली माँ" की तर्ज़ पर होगा ....

सभ्य देशवासियों वाली भारत माता की जय !! ....

अन्यथा तो फिर हो सकता है कि ओवैसी का बेहूदा फॉर्मूला ही वृहद रूप में स्वतः ही क्रियान्वित हो जाए कि - "बस १५ मिनिट के लिए पुलिस हटा लो ......" .... सब ठीक हो जाएगा .... ठीक ठाक हो जाएगा .... यानि 'कुछ सर कट जाएंगे' - और कुछ दिमाग सहित ठिकाने लग जाएंगे या ठिकाने लगा दिए जाएंगे .. और निश्चित ही कुछ लंगोटे भी खींच ली जाएंगी ....

और मेरा विश्वास करें ऐसी प्रक्रियाओं को इतिहासकार और बुद्धिजीवी "क्रांति" भी बोलते हैं .... और कुछ निर्दोष पीड़ित इसे "कत्लेआम" भी कहते हैं .... इसलिए सावधान !! भारत माता की जय बोलने-बुलाने वाले मुजरिमों से विशेषकर सावधान !!

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