Friday, 3 March 2017

// और ना सही - कम से कम 'गधा-हम्माली' के सबूत तो परिलक्षित कर ही दिए ....//


एक भक्त का व्हाट्सएप पोस्ट .. ..
" मुझे अंतरिक्ष में भेजो - मैं खुद जा के गिनूंगा - १०४ सेटेलाइट हैं या नहीं .. केजरीवाल !! " .. ..

त्वरित जवाबी पोस्ट .. ..
" मित्रों भेज दो साले को अंतरिक्ष में - साली मेरी नैय्या तो डूबने से बच जाएगी .. मोदी !! " .. ..

पलट जवाब निरंक .. और इसलिए मैं सोच रहा था कि .. क्योंकि मोदी फांकते बहुत हैं पर वाकई सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत और अपनी डिग्री नहीं बता पाए - इसलिए भक्त बेचारे उपहास का पात्र बन रहे हैं .. और भक्त केजरीवाल से भयभीत भी हो चले हैं कि ना मालूम अब और कितने झूठ के सबूत मांग ले और कब इनके विरुद्ध कौन से सबूत पेश कर दे .. ..

इसलिए आजकल मोदी भी केजरीवाल का 'के' नहीं बोल रहे हैं .. शायद केजरी से 'बिदक' रहे हैं .. और शायद इसलिए ही भक्त केजरी का उपहास कर अपनी खीज निकालने का प्रयास कर रहे हैं  .. .. वो भी पूरी गधों जैसी मेहनत के साथ .. ..

मेहनती तो मोदी भी कम नहीं - मेहनती बोले तो हार्ड वर्किंग - हार्ड वर्किंग बोले तो हॉवर्ड वाले निकम्मे निठल्लों से कहीं आगे .. पर शायद चूक गए सबूत साथ रखने में - या सबूत जुटाने में - या सबूत बताने में .. और इसलिए मुझे लगता है कि मोदी जी की मेहनत को यदि "गधा-हम्माली" (मालवी भाषा में हम्माली मायने मजदूरी) की संज्ञा दी जा रही है तो वो सही है .. और हमें उस मालवी पूर्वज की प्रशंसा करनी होगी जिसने ये "गधा-हम्माली" का जुमला बनाया होगा .. और गुजरात का भी नाम लेना होगा जिसने गधों को संरक्षण दिया - और अखिलेश का भी साधुवाद जिन्होंने देश को गधे और मेहनत के सभी पहलुओं पर विचार विमर्श करने का एक स्वर्णिम अवसर प्रदान किया .. ..

और कृतार्थ होना पड़ेगा मोदी जी का भी जिन्होंने आज इस जुमले को कबूलनामे सहित चरित्रार्थ कर दिखाया और बाकायदा "गधा-हम्माली" के सबूत परिलक्षित कर दिए .. वो भी बिना केजरीवाल के मांगे .. हा !! हा !! हा !!

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