Monday, 16 April 2018

// संस्कृति की जड़ें कट जाएंगी ??.. संस्कृति ना हुई भूतनी की चुटिया हो गई ??.. //


"यदि अयोध्या में राम मंदिर फिर से नहीं बनाया गया तो हमारी संस्कृति की जड़ें कट जाएंगी" : मोहन भागवत..

संस्कृति ??.. हद्द हो गई !!..
अरे मोहन भागवत जी ये जो संस्कृति होती है ना ये तो बहुत वृहद चीज़ होती है और इसके लिए सबसे पहले तो व्यक्तिगत संस्कार होना आवश्यक हैं.. और ये संस्कार तो बड़े यत्नों से डाले जाते हैं - रोपे जाते हैं .. और संस्कार तो व्यक्तियों में पड़ते हैं - जिससे एक वृहद संस्कृति का निर्माण होता है..

पर ये संस्कार या फिर संस्कृति कोई कटने-काटने की वस्तुएं थोड़े ही हैं कि मानों आप अपने संगठन के कुछ मवालियों दंगाइयों में प्रवाहित हो रहे साम्प्रदायिक होने के घृणित संस्कार काट दो - या फिर मंदिर नहीं बना तो आपकी संस्कृति ही कट जाएगी - मानो ये कोई संस्कृति ना हुई भूतनी की चुटिया हो गई ??..

और ये जो संस्कार होते हैं ना ये कत्तई कटते नहीं हैं - कटते तो पाप हैं जो आपके कटते नहीं दिख रहे - क्योंकि आप में संस्कारों की भी तो कमी दिखती है.. है ना !!

क्योंकि असली संस्कार तो वो होते हैं जो इंसानियत के होते हैं.. और इंसानियत के जाते और हैवानियत के आते ही संस्कार बचते ही कहाँ हैं - वो तो स्वतः ही ऐसे गायब हो जाते हैं जैसे भक्तों के भेजे से अक्ल.. समझे !!

और अंततः भागवत जी विदित हो कि - ये जो शाश्वत गौरवशाली हिन्दू या मुस्लिम संस्कृति है ना - ये तनिक भी इतनी नाज़ुक कोमल या छुईमुई नहीं कि एक मंदिर के ना बनने से इसकी जड़ें ही कट जाएं - या आपके एक मस्जिद के ढहा देने से ही छिन्न भिन्न हो जाए..

इसलिए अब संस्कति के नाम पर लोगों को हिन्दू-मुसलमान या साम्प्रदायिकता के भरोसे बांटने या आपस में लड़ाने की घिनौनी कोशिशें बंद हों तो बेहतर.. क्योंकि वैसे भी आम हिन्दू और मुसलमान बहुत संस्कारी हैं - ओछे साम्प्रदायिक नहीं - समझे !!

ब्रह्म प्रकाश दुआ
'मेरे दिमाग की बातें - दिल से':- https://www.facebook.com/bpdua2016/?ref=hl

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