Saturday, 31 March 2018

// आपातकाल नहीं आघातकाल.. इलाज किए बगैर ज़िंदा बचे तो हम भी मजबूर भक्त होंगे !!..//


इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाया था..
और परिणाम क्या हुआ था.. देश को आघात पंहुचा था.. और इंदिरा को परिणाम भुगतने पड़े थे..

और आज मोदी ने तो सीधे-सीधे आघातकाल लगा मारा है.. इसे मार उसे कूट - उसे काट इसे निपटा - इसे उलझा उसे फंसा - इसे धमका उसे फुसला - इसे चिढ़ा उसे रुला - इसे लूट उसे खरीद - इसे जला उसे दफना.. यानि दे दनादन दे - आघात ही आघात - निर्मम निरंकुश निर्लज्ज निंदनीय..
  
और परिणाम है.. देश अभूतपूर्व आपात स्थितियों में पहुंचा दिया गया है..

और आघात बहुत गहरे हैं.. और इसलिए मुझे लगता है कि मोदी बोलो या नरेंद्र दामोदरदास मोदी - अंततः परिणाम तो भुगतने ही होंगे..

पर क्योंकि स्थितियां बेहद आपात हो चली हैं इसलिए अब तो किसी इंदिरा या अटल जैसे नेता का उभरना या केजरीवाल जैसे क्रांतिकारी नेता का अपनी पूर्ण प्रतिभा के उपयोग की ताकत के साथ देश की बागडोर संभालना तत्काल आवश्यक है..

अन्यथा ये आघात ही देश को अपूरणीय क्षति के अंजाम तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त साबित होंगे.. और कुछ दिनों के बाद हम सब भी भक्तों की ही तरह मोदी मोदी मोदी का जाप रटने के लिए अभिशप्त होंगे.. और ज़िंदा बचे तो हम भी मजबूर भक्त होंगे !!..

ब्रह्म प्रकाश दुआ
'मेरे दिमाग की बातें - दिल से':- https://www.facebook.com/bpdua2016/?ref=hl

No comments:

Post a Comment