Monday, 21 May 2018

// 'कर्नाटक के नाटक' और 'तेल के खेल' ने सिद्ध किया.. अंधभक्त भक्तों से बेहतर !!.. //


भला हो कर्नाटक के चुनावों का जिसकी वजह से पहले कोई २०-२२ रोज़ तक तेल के भाव नहीं बढे..

पर कर्नाटक के चुनाव निपटे नहीं - अंततः भाजपा गई तेल लेने और मोदी की भी औकात सबके सामने आ गई.. और तेल के भाव अपने नियत उच्चतम रिकॉर्ड की ओर फिसल लिए..

और सिद्ध हुआ कि स्वघोषित नसीब वाले मोदी अब हुए बदनसीब - क्योंकि उनकी नीयत और औकात की पोलें खुल गईं..

और ऐसा मैं इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि शायद अब तो भक्तों को भी एहसास हो चला है कि अंधभक्तों के दिमाग में तेल तो बचा ही नहीं - बस शुष्क भूसा ही बचा है.. और इसलिए उनका ठस दिमाग चलने लगे इसकी कोई गुंजाईश बची नहीं..

और इसलिए ही तो अब अंधभक्त भी चिल्ला-चिल्ला कर यही कहने लगे हैं कि कॉंग्रेस के राज में भी तो यही सब होता था - मसलन ऐसे ही बेकार नकारा मन्दबुद्धिमान वफादार माननहीं राज्यपाल हुआ करते थे जो कोई यूपीएससी से सेलेक्ट होके थोड़े ही आते थे - और ऐसे ही तो जोड़-तोड़ करके सरकारें बनती थीं या तोड़ दी जाती थीं.. और ऐसे ही तो तेल के दाम मनमाने ढंग से बढ़ा करते थे..

यानि मानों अंधभक्त अब ये सिद्ध करने के कुप्रयास में कि उनकी मोदी वाली भाजपा सबसे अच्छी है - वस्तुतः अपने बावलेपन या बेवकूफी में यह सिद्ध करते जा रहे हैं कि भाजपा और कांग्रेस में तो कोई अंतर है ही नहीं - और मोदी किसी कॉंग्रेसी से भिन्न नहीं !!..

और अब भक्तों और अंधभक्तों में बस यही अंतर बचा है.. अंधभक्त मुखर हो अब भी मोदी के नामे टेके लगा रहे हैं और भक्त बेचारे क्षुब्ध हैं और खामोश रहकर तेल और तेल की धार देख पा रहे हैं..

यानि मैं पहली बार अनुभव कर रहा हूँ कि अंधभक्तों का प्रदर्शन भक्तों से देशहित में बेहतर सिद्ध हो रहा है..

इसलिए अंधभक्तों की जय हो !!.. और मेरी बला से भक्त जाएं मोदी के पास तेल लेने.. समझे !!..

ब्रह्म प्रकाश दुआ
'मेरे दिमाग की बातें - दिल से':- https://www.facebook.com/bpdua2016/?ref=hl

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