Tuesday, 28 February 2017

// बहादुर बिटिया गुरमेहर कौर को दिली दुआएं .. और नमकहरामों को धिक्कार ....//


एक शहीद की बिटिया - गुरमेहर कौर - जिसने अपने पिता को मात्र २ साल की उम्र में खो दिया था - आज उसकी सोच धैर्य और हिम्मत पर गर्व होता है .. क्योंकि वो होश सम्हालने के बाद बजाय प्रतिशोध और गुस्से के पाकिस्तान और हिंदुस्तान के बीच शांति की बात कह रही है - और उसका एक एक शब्द मुझे उसके सामने रुआंसा होते हुए नतमस्तक होने को मजबूर करता है .. ..

मैनें ताउम्र दिल दिमाग को झकझोरने वाले ऐसे शब्द नहीं सुने थे कि - "मेरे पिता को पाकिस्तान ने नहीं युद्ध ने मारा था" .. ..

लेकिन अफ़सोस कि वीरेंद्र सहवाग जैसे संकुचित दिल दिमाग के पिछलग्गू लोग अपना होश गँवा बैठे हैं और आज गुरमेहर जैसी बिटिया का मखौल उड़ा रहे है - और एबीवीपी सहित फ़र्ज़ी देशभक्तों की पूरी की पूरी सेना पूरी बेशर्मी के साथ गुरमेहर को बुरी बुरी गालियां दे उसका उपहास कर रही है .. .. इतनी बुरी गालियां कि "गधे" जैसे शब्द तो बहुत फीके लगने लगते हैं - और उनकी शर्मनाक गालियों का वर्णन तो कोई भी सभ्य व्यक्ति या असभ्य सहवाग भी नहीं कर सकेगा .. .. और कोई सभ्य पिता तो सहन भी नहीं कर सकेगा .. ..

और इस सबके बीच बिना रुके टुके अपनी मन की ही बात पर बात करते रहने वाले भक्तों के मोदी जी इस संवेदनशील मुद्दे पर हमेशा की तरह चुप्पी साधे हुए हैं .. और अन्य सभी बेफिज़ूल मुद्दों पर ओछी चुनावी बकवास करते ही जा रहे हैं .. .. और इसलिए मुझे लगता है कि मोदी गुरमेहर के खिलाफ हर शब्द को अपनी मौन स्वीकृति प्रदान किये हुए हैं .. ..

और तब तो मेरे दुःख की कोई सीमा ही नहीं रही जब मोदी के मंत्री गृह राज्य मंत्री किरण रिजुजू भी अनन्य बकवास करते हुए कह गए कि .. ..
.. .." वे कौन लोग हैं जो इस युवा लड़की की मानसिकता को दूषित कर रहे हैं ".. .. " इस देश का नमक खा के कोई इस देश के खिलाफ बात ना करे " .. ..

इन सब बातों से व्यथित होकर दिल से कुछ पंक्तिया निकली .. जो मोदी-रिजुजू को धिक्कार के साथ सम्माननीय बहादुर बिटिया गुरमेहर कौर की शान और समर्थन में प्रस्तुत कर रहा हूँ ....

मैं दिमाग रखता हूँ ..
इसलिए समझता हूँ ..

बातें तेरी मीठी-मीठी ..
कभी खट्टी - कभी कड़वी ..
कभी फीकी - कभी कसैली ..

पर तेरी बातों में अब नमक कहाँ ..
नमकहराम तू नमकहलाल कहाँ .. ..

(२८/०२/१७)
मेरे दिमाग की बातें - दिल से .. ब्रह्म प्रकाश दुआ

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