Monday, 29 January 2018

// पद्मावत और कासगंज के बाद अब बजटीय साज़िश.. अंततः सब ठंडा पड़ जाएगा..//


कासगंज में हिंसा हुई.. २६ जनवरी के दिन हुई.. झंडावंदन के समय हुई.. भगवा झंडे को लेकर हुई.. वंदे मातरम को लेकर हुई.. लगातार होती रही.. लगातार हो रही है..

ख़बरों के अनुसार - शुरूआती हिंसा में लिप्त सत्ताधारी पार्टी से जुड़े लोगों का हुजूम था जो अल्पसंख्यकों द्वारा किए जा रहे झंडावंदन के स्थान पर पहुंचा था.. हिंसा में मृत युवक भी उसी हुजूम में शामिल था - शायद देशप्रेम की भावनाओं से ओतप्रोत था..

और अब तो खुलासा हो रहा है या किया जा रहा है कि - हिंसा साज़िश के तहत हुई.. और हालात गरमाए जाने की साज़िश के तहत ही हिंसा जारी है.. गिरफ्तारियां भी हो रही हैं - और हालात काबू में रखने के सभी प्रयास किए जा रहे हैं या साज़िश के तहत ऐसा बताया जा रहा है..

और मेरा आंकलन है कि कासगंज की हिंसा एक बार फिर सत्ताधारी पार्टी से जुडी हुई हिंसा है.. और इसलिए बहुत भयावह है.. और इसे रोकना किसी के बस की बात नहीं.. दंगाई बेख़ौफ़ घूमते रहे और दंगे जारी रहे .. और सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के शर्मनाक भड़काऊ बयान भी जारी ही रहे हैं..

और यदि ऐसी घटनाओं को रोकना है तो सत्ताधारी पार्टी से पार पाना ही होगा..
क्योंकि ये सत्ताधारी पार्टी स्वयं ही बहुत भयावह है.. और ये सत्ता पर बने रहने के लिए किसी भी हद दर्जे की साज़िश क्रियान्वित करती रहेगी..

तो अब मर्ज़ी आपकी.. पद्मावत हिंसा के बाद आप चाहें तो कासगंज की हिंसा को भी भूल.. बजट चर्चा में व्यस्त हो सकते हैं..

थोड़े दिनों बाद सब ठंडा हो जाएगा.. पद्मावत कासगंज की हिंसा भी और बजट की साज़िश भी.. और बजट की साज़िश इसलिए क्योंकि इस सरकार से भी आप साज़िश दंगे फसाद अलगाव भ्रष्टाचार आदि के अलावा कुछ अच्छे अलग की उम्मीद नहीं कर सकते..

और जिन्हें इस सरकार से कुछ अच्छे अलग की उम्मीदें हैं वो देश को नाउम्मीद करने के अलावा और कुछ नहीं कर सकेंगे.. शर्तिया !!..

ब्रह्म प्रकाश दुआ
'मेरे दिमाग की बातें - दिल से':- https://www.facebook.com/bpdua2016/?ref=hl

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