Sunday, 3 June 2018

// १५ मिनिट की भी छुट्टी नहीं ??.. जरा १५ मिनिट छुट्टे होकर तो सोचना भक्तों !!..//


चौकीदार सेवक कुछ ही दिन पहले सिंगापूर में आदतन जबरन भावुक हो बघार रहे थे कि उन्होंने २००१ के बाद से १५ मिनिट की भी छुट्टी नहीं ली है.. क्योंकि जब-तब वो सेना के जवान को कभी बर्फ में खड़े कभी रेगिस्तान में कभी पानी में खड़े देखते हैं - और गरीब माँ को घंटों मजदूरी करते देखते हैं - तो उन्हें चैन से सोने का हक़ नहीं है..

जनाब को विदित होवे .. .. सीमा पर तो शहादत हो रही है - जवान तो गोलियां खा रहे हैं - अपनी जान गवां रहे हैं.. और गरीब तुम्हारे नाकारापन और मक्कारी धूर्तता कुकर्मों और राजनीतिक कौशल को भुगत रहे हैं - पछता रहे हैं - रो रहे हैं !!..

इसलिए मेरी जनाब से धिक्कार के साथ मांग है कि अब बहुत हुआ.. १५ मिनिट तो क्या पक्की छुट्टी ही ले लो.. समझे !!..

और कम से कम ये अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने और जुमले देने में देश की सेना और बेचारे दुखियारे गरीब को घसीटने और अपमानित करने का दुस्साहस मत करो..

हमें सब समझ आ रहा है कि तुम्हें जवानों या गरीबों से और अपने स्वार्थ से कितना सरोकार है.. क्योंकि हमें तो ये भी एहसास हो रहा है कि १५ मिनिट की छुट्टी की तो छोडो - यदि तुमने अपनी ऐश भरी खर्चीली शाही दिनचर्या में से प्रतिदिन भी १५ मिनिट अपना स्वार्थ छोड़ देशहित के बारे में सोच भर लिया होता ना - तो आज ४ साल बाद कम से कम १५ अच्छे काम गिना पाते.. और यूँ ही जुमले छोड़ने और बकवास करने पर मजबूर ना होते.. और यूँ ही अपने पद का दुरपयोग कर सैंकड़ों दिन अपनी टुच्ची पार्टी के प्रचार मात्र में जाया करने पर मजबूर ना हुए होते..

और भक्तों को भी एक सुझाव !!.. तुम्हारे साहेब का दिमाग थक गया है.. बेचारे की पक्की छुट्टी क्यों नहीं कर देते ??.. सोचना तुम भी १५ मिनिट अपना सीमित दिमाग लगा कर सोचना.. केवल १५ मिनिट छुट्टे होकर सोचना.. फिर सब अपने आप समझ आ जाएगा !!.. शर्तिया !!..

ब्रह्म प्रकाश दुआ
'मेरे दिमाग की बातें - दिल से':- https://www.facebook.com/bpdua2016/?ref=hl

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