Wednesday, 7 February 2018

// ये तो रेपसीड आयल में तला बासी पकौड़ा निकला.. ..//


वो तो कह रहे हैं कि.. " जितना उछालोगे कीचड़, उतना खिलेगा कमल " .. ..

तो आओ भक्तों !!.. कीचड़ उछालें कमल खिलाएं .. ..

ये फेंकू बहुत टुच्चा है.. निकम्मा है.. नकारा है.. ये तो रेपसीड आयल में तला बासी पकौड़ा निकला.. और निश्चय ही भ्रष्टाचारी भी निकला..

और अब यदि कमल की एकाध पंखुड़ी खिली हो तो मुझे धन्यवाद दें !!..

वो क्या है न कि मुझे कीचड पसंद नहीं..
मुझे तो धन्यवाद पाना अच्छा लगता है..

और इसका एक और कारण ये भी है कि मैं तो एक शरीफ इंसान हूँ..
मैं कोई कीचड़ में सना बेशर्म टुच्चा थोड़े ही हूँ..

और मुझे इसलिए अपने ऊपर गर्व भी है !!..
देखो मैंने कमल खिलाया !!.. हा !! हा !! हा !! हा !! हा !! हा !! हा !! .. ..

ब्रह्म प्रकाश दुआ
'मेरे दिमाग की बातें - दिल से':- https://www.facebook.com/bpdua2016/?ref=hl

No comments:

Post a Comment