Tuesday, 6 February 2018

// भ्रष्टाचारी कम हुए भ्रष्टाचार नहीं.. क्योंकि - " खाऊंगा पर खाने नहीं दूंगा ".. ..//


मौका ताड़ मैंने भक्तु से पूछा - क्या मोदी सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार में कुछ कमी आई है ?..

भक्तु बोला.. थोड़ी बहुत तो आई है.. पर बहुत नहीं.. क्या है कि विरासत में बहुत बड़े-बड़े गड्ढे जो मिले थे - और गड्ढे भरने में टाइम तो लगेगा..

क्या मोदी सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचारियों की संख्या में कुछ कमी आई है ?..

भक्तु बोला.. आई है.. बहुत आई है.. मोदी जी ने सभी कोंग्रेसियों की तो हवा टाइट कर दी है.. नोटबंदी के बाद तो सब की दुकानें बंद हो गई हैं.. और जीएसटी के बाद सभी दुकानों की चोरी बंद हो गई है.. और आधार के कारण तो सरकारी चोरी भी रुक गई है.. और डिजीटिलाईज़ेशन ने तो कमाल कर दिया.. सभी सरकारी भुगतानों में चोरी चकारी बंद हो चुकी है.. और ये सब किया है मोदी सरकार ने..

तो फिर भक्तु ज़रा एक बात तो बता.. भ्रष्टाचारियों की संख्या में भारी कमी आई है.. पर भ्रष्टाचार में उतनी कमी नहीं आई है.. कारण ??..

और शायद मौन हो चुके भक्त के चेहरे पर लिखा था..
मतलब साफ़ है - मोदी प्रपंच "ना खाऊंगा ना खाने दूंगा" को कुछ ऐसे समझा जाए..
" बेतहाशा खाऊंगा और अपनेवालों को खाने भी दूंगा - पर आम जनता को नहीं खाने दूंगा "..

और खाने से मतलब पकौड़े खाना कदापि नहीं है.. क्योंकि वैसे भी मोदी ने पकौड़े तलने की बात कही है - पकौड़े खाएगा कौन अब तक रह्योद्घाटन नहीं किया है..

और तलने का वास्ता वैसे भी जनता के नामे ही है.. यानि एक तरफ मोदी जनता को तलते रहेंगे - और दूसरी तरफ जनता पकोड़े तलती रहेगी..

बेचारी तली-तलाई जनता !!..

ब्रह्म प्रकाश दुआ
'मेरे दिमाग की बातें - दिल से':- https://www.facebook.com/bpdua2016/?ref=hl

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