Tuesday, 24 July 2018

// भारतीय मुसलमान रकबर की हत्या "हिन्दू-मुसलमान" विषय के अंतर्गत नहीं ??.. ..//


राजस्थान में गाय की कथित अफरातफरी के आरोप में एक और नृशंस हत्या कर दी गई..
हमारे अलवर के भाई रकबर की हत्या कर दी गई.. जो एक भारतीय मुसलमान थे..

और क्योंकि रकबर एक भारतीय थे तो मेरा प्रश्न है कि क्या भारतीय हिन्दुओं को इससे पीड़ा होनी चाहिए कि नहीं ??..

और यदि भारतीय हिन्दुओं को पीड़ा होनी चाहिए तो उन का क्या किया जाए जिन भारतीय हिन्दुओं ने हत्या को अंजाम दिया या जिनका इस हत्या में आंशिक या पूर्ण या परोक्ष अपरोक्ष रूप से हाथ है.. या फिर जिन्हें पीड़ा ही नहीं हुई.. या फिर जो इस हत्या पर मन ही मन प्रसन्न हुए हों या दिख रहे हों.. या फिर बेशर्मी से ताल ठोकते दिख रहे हों..

मामला संगीन है !!.. क्योंकि सुनियोजित "लिंचिंग" द्वारा हत्या करने वाले - और जिसकी हत्या हुई - वो सभी भारतीय हैं और इंसान भी माने जाते हैं.. और क्योंकि प्रथम दृष्टया जानकारी अनुसार हत्या करने वाले हिन्दू और जिसकी हत्या हुई वो एक मुसलमान थे इसलिए ये मामला "हिन्दू-मुसलमान" हो जाता है..

पर मुझे इस बात की पीड़ा है कि जो गोदी मीडिया और जो भाजपाई या संघी पिछले कई समय से चीख-चीख कर हर बात पर "हिन्दू-मुसलमान" करते रहे थे.. एकाएक वो इस मामले में "हिन्दू-मुसलमान" नहीं करते दिखे.. वो बड़ी चालाकी से इसे मानवता इंसानियत का दुःखद मुद्दा बतलाते दिखे..

जबकि मेरा ऐसा स्पष्ट मानना है कि यदि राहुल का जनेऊधारी होना "हिन्दू-मुसलमान" हो गया था - तो फिर ये मामला भी तो स्वतः स्वाभाविक ही १००% "हिन्दू-मुसलमान" माना जाना चाहिए था.. है ना !!..

और इसलिए "हिन्दू-मुसलमान" विषय पर पीएचडी प्राप्त समस्त टुच्चों को आगे आकर बताना चाहिए कि इस घटना के पीछे कौन सी विकृत सांप्रदायिक या धार्मिक या वहशी मानसिकता दोषी है.. और वो स्वयं इस मानसिकता को जन्म देने और प्रोत्साहित करते हुए भड़काने और क्रियान्वित करने के कितने दोषी हैं ??..

यानि अब मानवता इंसानियत आदि की बातें करना उन टुच्चों को शोभा नहीं देता जो "हिन्दू-मुसलमान" के शौक़ीन हो चले थे.. धिक्कार है !!..

और बेवकूफ बन रहे भक्तों को छूट है कि यदि उन्हें मेरी बात समझ आ गई हो तो वे मानवता इंसानियत की बात करते हुए इस नृशंस जघन्य हत्या की "कड़ी निंदा" कर अपने भारतीय और इंसान होने का दावा कर सकते हैं.. !! भारत माता की जय !!

ब्रह्म प्रकाश दुआ
'मेरे दिमाग की बातें - दिल से':- https://www.facebook.com/bpdua2016/?ref=hl

No comments:

Post a Comment