Saturday, 1 July 2017

// GST को आज़ादी के समकक्ष महामंडित करना भी 'स्वीकार्य' नहीं .. ..//


देश की आज़ादी के समय स्थान और समारोह की नक़ल कर GST को मध्यरात्रि संसद के सेन्ट्रल हॉल से भव्य समारोह आयोजित कर शुभारम्भ कर उसे आज़ादी के समकक्ष महामंडित करने के प्रयास को मैं किसी अक्षम अहंकारी अपरिपक्व फेंकू का एक और अनुचित निर्णय मानता हूँ .. ..

और इसलिए इसे भी 'स्वीकार्य' नहीं किया जा सकता .. ठीक वैसे ही जैसे गौरक्षकों द्वारा कर दी गई निर्दोष इंसानों की हत्या को 'स्वीकार्य' नहीं किया जा सका .. ..

और दलील देना चाहूंगा कि .. ..

हर २ अक्टूबर को जन्म लेने वाला बालक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जैसा हो जरूरी नहीं .. वो हिंसक हत्यारा निर्दयी सांप्रदायिक चपल चालाक देशद्रोही भी हो सकता है .. वो फेंकू भी हो सकता है .. ..

इसलिए मुझे लगता है कि देश की बहुमूल्य आज़ादी के टुच्चई अवमूल्यन के प्रयासों की आलोचना हो तो बेहतर !! .. ..

और GST के गुणों और अच्छाइयों का स्वागत हो - और विरोध का सही आंकलन हो - और यदि अवगुणों या कमियों को दूर करने के सतत सामूहिक प्रयासों के द्वारा इसे राष्ट्रहित में सफल बना दिया जाए - तो तो और भी बेहतर !! .. ..

और भक्तों से अपेक्षा !! .. बस पारम्परिक भावावेश में आकर अब - 'जय GST' - GST की जय' - 'वंदे GST' - के नारे मत लगा बैठना .. प्लीज़ !! .. ..

'जय हिन्द' !! - भारत माता की जय' !! - 'वंदे मातरम्' !! .. ..

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1 comment:

  1. मत करो स्वीकार तुम्हारे स्वीकार और अस्वीकार से कोई फर्क नहीं पड़ता है

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